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फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में सहायक आबकारी अधिकारी बर्खास्त

फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में
सहायक आबकारी अधिकारी बर्खास्त...




मध्य प्रदेश के ग्वालियर में सहायक आबकारी आयुक्त के पद पर पदस्थ नागेश्वर सोन केसरी की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही है दरअसल सहायक आबकारी आयुक्त को सरकार के द्वारा बर्खास्तगी के आदेश दे दिए गए हैं आपको बता दें कि इंदौर उच्च न्यायालय ने सरकार को आदेश दिए थे कि सोन केसरी की सेवाएं समाप्त की जाए प्राप्त जानकारी के अनुसार उन्होंने हल्बा जनजाति के जिस प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाई थी जांच में वह जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया।


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जानिए कब जारी हुआ बर्खास्तगी का आदेश


वाणिज्य कर विभाग ने नागेश्वर सुन केसरी को उनके पद से मुक्त करने का आदेश बुधवार को ही जारी कर दिया । इस आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि राज्य सिविल सेवा परीक्षा में अनुसूचित जनजाति श्रेणी से नागेश्वर सोन केसरी का चयन जिला आबकारी अधिकारी पद के लिए करते हुए 2001 में नियुक्ति दी गई थी लेकिन विभागीय दस्तावेजों की जांच में गड़बड़ी पाए जाने पर उपरोक्त दस्तावेजों के आधार पर मिली सेवा समाप्त की जाती है।


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दस्तावेजों में प्रस्तुत किया गया था फर्जी जाति प्रमाण पत्र


गौरतलब हो कि नागेश्वर सोनकेसरी द्वारा सेवा नियुक्ति के लिए जुलाई 1998 का स्थाई जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया था जानकारों की माने तो ऐसे प्रमाण पत्रों की वैधता अवधि नियमानुसार 6 माह रहती है जिसके बाद वह स्वता ही निरस्त हो जाता है जबकि स्थाई जाति प्रमाण पत्र अगस्त 2005 को जारी होना बताया गया है विभाग को मिली शिकायत के आधार पर जब जांच की गई तो संलग्न जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया।


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2010 से चल रहा था मामला इंदौर उच्च न्यायालय में दायर हुई थी याचिका...


आपको बता दें कि ग्वालियर के सहायक आबकारी आयुक्त के पद पर पदस्थ नागेश्वर सोन केसरी का यह मामला 10 वर्ष पुराना है प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने साल 2010 में नागेश्वर सोन केसरी की सेवा को समाप्त करने का आदेश दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए नागेश्वर सोन केसरी ने इंदौर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी जिस पर इंदौर उच्च न्यायालय ने विभागीय जांच किए बगैर सेवा मुक्त करने के आदेश को निरस्त करते हुए सेवाएं बहाल रखने के आदेश दिए थे।


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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला जारी हुआ बर्खास्तगी का फरमान


राज्य स्तरीय छानबीन समिति के निर्देशों के खिलाफ पीड़ित नागेश्वर सोन केसरी ने याचिका दायर करते हुए इंदौर उच्च न्यायालय की शरण ली थी जिस पर उन्हें कुछ हद तक राहत भी मिली लेकिन इंदौर उच्च न्यायालय के फैसले को लेकर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में उपरोक्त फैसले को चुनौती दी थी जिसका निराकरण करते हुए 2019 में निर्देश दिए गए कि उपरोक्त मामले को 6 माह के अंदर निपटाया जाए इस पर 22 दिसंबर को न्यायालय द्वारा आदेश का पालन करते हुए नागेश्वर सोन केसरी की नियुक्ति को निरस्त कर दिया गया है साथ ही उनकी सेवा है तत्काल समाप्त करने के आदेश विभाग को जारी कर दिए गए हैं।


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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार






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