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परिवार का गुमशुदा बेटा बनकर 5 साल से कर रहा था ठगी फिर अचानक आ गया असली बेटे का फोन और खुल गया राज

 


परिवार का गुमशुदा बेटा बनकर
5 साल से कर रहा था ठगी 
फिर अचानक आ गया 
असली बेटे का फोन
और खुल गया राज




(अमित श्रीवास्तव-सिवनी)


हिंदी फिल्म का एक बेहद शानदार सीन जोकि हर आमजन में काफी प्रचलित है उसमें एक बैहरूपिया ऐसे परिवार की तलाश करता है जिसका बेटा गुमशुदा हो और फिर बड़े ही नाटकीय ढंग से वह उस परिवार को यह विश्वास दिलाता है की वही उनका खोया हुआ बेटा है और फिर सालों साल उस परिवार को ठगने का काम किया जाता है भले ही यह दृश्य कई बार फिल्मों में देखने को मिला हो लेकिन हमारे आज के इस लेख में ऐसा ही एक वाक्या हकीकत में अंजाम दिया गया है। जहां बिल्कुल ऐसे ही फिल्मी दृश्य का नाटकिय रूपांतरण करते हुए एक ठग ने पीड़ित परिवार का गुमशुदा बेटा बनकर 5 सालों तक उनके साथ ठगी की लेकिन अचानक ही गुमशुदा हुए असली बेटे के फोन आने पर सारी साजिश का भंडाफोड़ हो गया।


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आइए जानते हैं कहां की है घटना


मामला सिवनी जिले के लखनादौन थाने के अंतर्गत आने वाले फैशन वाही गांव का है जहां एक आदिवासी परिवार का गुमशुदा बेटा बन कर परिवार को फ़िल्मी अंदाज़ में ठगने का दिलचस्प मामला सामने आया है। पांच साल से खुद को परिवार का लापता बेटा बता कर परिवार वालो को लाखो रुपये ठगने वाले इस बेहरुपीये का राज फाश होने पर गांव वालों ने इस बेहरुपीये को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया है। 


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यहां समझिए.. क्या है पूरी कहानी


बताया जा रहा इस आदिवासी परिवार का बेटा नरोत्तम उइके करीब 15 साल पहले घर से भागने के बाद लापता हो गया था। परिवार वालो ने लड़के के लौटने की आस तक खो दी थी। लेकिन पांच साल पहले यह बेहरुपीया साधु संत के वेश में परिवार वालो के पास पहुँचा और खुद को परिवार का गुमशुदा बेटा होने का दाबा कर दिया। बेहरुपिये ने इस आदिवासी परिवार को बताया कि वह उत्तरप्रदेश में जाकर चेहरे की सर्जरी करा कर साधू संत बन गया था। परिवार वालो की याद आने पर कुछ समय के लिए उनके पास लौट आया है। परिवार के सभी सदस्य इस बेहरुपीये के जाल में फंस गये। और कोई सवाल किए बिना इस बेहरुपीये को अपना खून समझकर उसकी तमाम मांगो की पूर्ती करने लगे। यह बहरूपिया पांच साल के अंतराल में कई बार इस परिवार के पास पहुंचा और पूजा अर्चन करने के नाम पर लाखों रुपये ठग कर वापिस लौट गया। 


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जानिए क्या हुआ जब आया असली बेटे का फोन


करीब पांच महीने पहले परिवार में छोटी बेटी की शादी का समय था तब अचानक परिवार का असली लड़का नरोत्तम परिवार वालो से फोन के जरिये कॉन्टेक्ट कर खुद को जीवित होने की बात बताता है। और पंजाब में काम करने की बात कह कर परिवार वालो को पुरानी बचपन की तमाम बाते बताकर खुद को असली बेटा साबित करता है और जल्द मिलने वापिस लौटने का भरोसा दिलाता है। तब जाकर परिवार वालो को इस बेहरूपिये की असलियत के बारे में पता चलता है। और अब तक खुद को परिवार का बेटा होने का दावा कर रहा यह बेहरूपिया साधु आज फिर परिवार के पास पहुंचा था। और तभी गाँव वालो ने इस बेहरुपीये की पिक्चर का कलामेक्स करते हुए पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया है। फिलहाल पुलिस आरोपी को हिरासत में लेने के बाद जांच में जुट गई है।


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विकास की कलम

चीफ एडिटर

विकास सोनी

लेखक विचारक पत्रकार





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