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मंगलवार, 3 नवंबर 2020

आखिर आ ही गया.. निजी स्कूलों की मनमानी पर.. लगाम लगाने वाला प्राधिकरण..

आखिर आ ही गया..

निजी स्कूलों की मनमानी पर.. 

लगाम लगाने वाला प्राधिकरण..




 स्कूल संचालकों की मनमानी और इन सबके बीच पिसते अभिभावकों की दुर्दशा आज किसी से भी छुपी हुई नहीं है। वर्तमान के निजी स्कूल शिक्षा का मंदिर कम और व्यवसाय का अड्डा ज्यादा कम बन चुके हैं। जहां स्कूल यूनिफार्म से लेकर कॉपी किताबों तक हर चीज की बकायदा एक बोली सी लगाई जाती है। और इन सब के बीच अभिभावकों की यह मजबूरी होती है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा किए गए तमाम फैसलों को वह सर झुका के मानते जाए। इन मनमानी के खिलाफ कई बार आंदोलन भी किए गए लेकिन निजी स्कूल पर लगाम लगाने के लिये ऐसा कोई भी प्रावधान नहीं था जिसकी आड़ में इन की अकल ठिकाने लगाई जा सके। लेकिन अब निजी स्कूल संचालकों की मनमानी पर लगाम लगाने केंद्र सरकार का एक प्रभावी चाबुक अस्तित्व में आ चुका है प्राप्त जानकारी के अनुसार स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत बनाने के लिए सभी राज्यों में एक स्वतंत्र प्राधिकरण का गठन किए जाने की न्यू डाली जा चुकी है। फिलहाल इसे राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण (एसएसएसए) का नाम दिया गया है। जिसका प्रमुख कार्य स्कूलों की गुणवत्ता को बरकरार रखने के साथ-साथ उनकी फीस बढ़ोतरी किताब और यूनिफार्म का चयन और अन्य जुड़ी मनमानियां पर भी रोक लगाना होगा।


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कुकुरमुत्ते की तरह पनप गए निजी स्कूल


स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों से हर गली और हर मोहल्ले में कुकुरमुत्ते की तरह स्कूल पनपते जा रहे हैं। महज दो-दो कमरे में चलने वाले निजी स्कूलों की मनमानियां देखते ही बनती है। लंबे समय से आ रही शिकायतों को ध्यान में रखते हुए स्कूलों की गुणवत्ता को लेकर नए सिरे से मंथन शुरू हुआ था केंद्र सरकार की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत इस विषय को काफी गंभीरता से लिया गया है इसके साथ ही स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता बरकरार रखने के लिए राज्य स्तर पर कड़े उपायों की जरूरत बताई गई जिसे लेकर शिक्षा मंत्रालय अब ठोस और प्रभावी कदम उठाने का प्रारूप तैयार कर चुका है।


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प्राधिकरण लगाएगा स्कूलों पर लगाम 

तय मानकों को अपनाना होगा जरूरी


राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने फिलहाल राज्यों के साथ मिलकर इस पर विचार विमर्श करना शुरू कर दिया है जिसके तहत अब स्कूलों को प्राधिकरण की ओर से तय मानकों को अपनाना बेहद जरूरी होगा गौशाला भोकी इन मानकों का निर्धारण दुनियाभर में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर रखने के लिए अपनाई जाने वाली बेहतरीन पहल के आधार पर किया जाएगा। जिस का मुख्य आधार स्कूलों में बचाव सुरक्षा आधारभूत ढांचा कक्षा और विषयों के आधार पर शिक्षकों की संख्या वित्तीय ईमानदारी और शासन की उपयुक्त प्रक्रिया आदि मुख्य बिंदु सम्मिलित होंगे। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि प्राधिकरण की ओर से तय किए जाने वाले मानकों का पालन सभी स्कूलों के लिए अनिवार्य होगा हालांकि इन मांगों को अंतिम रूप देने से पहले स्कूलों के शिक्षकों और अभिभावकों की राय भी ली जाएगी।


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केंद्र सरकार का सबसे प्रभावी कदम

स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में होगी बढ़त 


स्कूल संचालकों की मनमानी पर लगाम कसते हुए स्कूलों की गुणवत्ता को मजबूती देने की इस योजना के तहत सभी स्कूलों को हर साल राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण (एसएसएसए) की तरफ से तय मानकों के आधार पर एक सूचना पत्र जारी करना होगा जिसके बाद किसी स्वतंत्र एजेंसी से इसे जांचा परखा जाएगा स्वतंत्र एजेंसी द्वारा की गई जांच में प्राधिकरण के मानक पर खरे न उतरने पर स्कूलों की रिपोर्ट राज्य के स्कूली शिक्षा विभाग को सौंपी जाएगी जो कि राज्य में स्कूली शिक्षा की सर्वोच्च निकाय है फिलहाल मौजूदा समय में स्कूली शिक्षा को गुणवत्ता और मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार यह बड़े कदम उठा चुकी है इसमें स्कूली बच्चों के लिए न्यूनतम सीखने के मानकों का निर्धारण और शिक्षकों को प्रशिक्षण देना प्रमुख है। पिछले सालों में सरकार ने सरकारी और निजी स्कूल में पढ़ा रहे करीब 15 लाख शिक्षकों को ऑनलाइन माध्यम से प्रशिक्षित किया था अभी भी शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए निष्ठा कार्यक्रम सतत जारी है


 पिछले सालों में सरकार ने सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ा रहे करीब 15 लाख शिक्षकों को आनलाइन माध्यम से प्रशिक्षित किया था। अभी भी शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए निष्ठा कार्यक्रम शुरु कर रखा है।


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विकास की कलम

चीफ एडिटर

विकास सोनी

लेखक विचारक पत्रकार





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