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भाई-दूज पर निराश हुई बहनें.. जेल में नहीं हुई.. भाई से मुलाक़ात

भाई-दूज पर निराश हुई बहनें..
जेल में नहीं हुई.. भाई से मुलाक़ात..





भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व भाई दूज संपूर्ण भारत वर्ष में पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस पर्व में बहनें अपने भाई को टीका लगाकर एवं मिठाई खिलाकर उसके मंगल स्वास्थ्य की कामना करती हैं। इस पवित्र त्यौहार को लेकर बहने काफी उत्साहित होती हैं और दूरदराज के इलाकों से इस दिन अपने भाई से मिलने जरूर पहुंचती हैं लेकिन कोरोना की मार ने इस पवित्र त्यौहार में भी खटास मिला दी । लेकिन क्या हो जब बहन अपने भाई से मिलने पहुंचे लेकिन उससे मिल ना सके। आइए जानते हैं यह कहानी जब भावनात्मक बंधनों से बंधे भाई बहन भौतिक बंधनों के चलते आपस में नहीं मिल पाये।


यहां जानिए आखिर ..कहां की है घटना




मामला मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले से है जहां जबलपुर सेंट्रल जेल में भाई दूज पर्व पर अपने भाइयों से मुलाकात करने पहुंची बहनों को उस वक्त मायूस होना पड़ गया जब सेंट्रल जेल में जेल प्रबंधन द्वारा बहनों को अपने भाइयों से मुलाकात करने की अनुमति नहीं दी गई। गौरतलब हो कि हर तीज त्योहारों पर बंदियों को अपनी बहनों से मिलने के लिए छूट मिला करती थी। लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण की वजह से सेंट्रल जेल में बंदियों की बहनों को अपने भाइयों से मिलने के लिए जेल के अंदर प्रवेश पर रोक लगा दी। इस वजह से सैकड़ों की तादाद में महिलाएं जेल परिसर के बाहर परेशान नजर आई।


बिना किसी पूर्व सूचना के जेल प्रशासन ने उठाया कदम




 सेंट्रल जेल प्रशासन के द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के बंदियों से मिलने पर रोक लगाने की वजह से बंदियों के परिजनों को खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ा और अपने भाइयों से बिना मिले ही मायूस होकर उनकी बहनों को घर वापस जाना पड़ा।इस दौरान कई महिलाओं के आंखों से आंसू भी निकल पड़े। दरअसल जेल मंत्रालय ने प्रदेश की जेलों में कोरोना संक्रमण फैलने की वजह से कड़े प्रावधान लागू कर दिए हैं। मार्च माह से बंदियों से मुलाकात पर पूरी तरह से रोक लगाई गई थी।


अब तक टेलीफोन के माध्यम से हो रही थी बातचीत 


दो नवंबर से बंदियों की परिजन से मुलाकात फिर से प्रारंभ की गई है जिसमे अब टेलीफोन के माध्यम से बातचीत भी कर सकते हैं। लेकिन भाई दूज पर्व पर बड़ी तादाद में भीड़ जमा हो जाने की वजह से जेल प्रबंधन ने भाई बहन की मुलाकात पर रोक लगा दी है. इसकी पूर्व सूचना न मिलने की वजह से बड़ी तादाद में सुबह से ही बहने सेंट्रल जेल गेट के सामने पहुंच गई थी लेकिन उन्हें मायूस होना पड़ा जिससे उन्हें खासी परेशानी उठाना पड़ी...


जेल प्रबंधन के फैसले से नाराज दिखे बहनें




 बंदियों के परिजनों का कहना था कि सेंट्रल जेल प्रशासन पहले से सूचना दे देता तो वह सेंट्रल जेल तक नहीं आते.. जेल में बंद कैदियों से मुलाकात ना होने की वजह से कई महिलाओं की आंखों से आंसू भी निकल पड़े.. सैकड़ों परिजन दूरदराज के इलाकों से आए थे लेकिन बिना मुलाकात किए ही उन्हें वापस जाना पड़ा।


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विकास की कलम

चीफ एडिटर

विकास सोनी

लेखक विचारक पत्रकार

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