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मंगलवार, 3 नवंबर 2020

यहां पूरे गाँव ने कर दिया मतदान का बहिष्कार क्या है कारण.. पढ़ें पूरी खबर..

 यहां पूरे गाँव ने कर दिया

 मतदान का बहिष्कार

क्या है कारण.. पढ़ें पूरी खबर..




यह जनता है जनाब सब कुछ सहती है लेकिन जुबान नहीं खोलती और जब बोलती है तो अच्छे-अच्छे लोगों की बोलती बंद कर देती है। देश की ऐसी ही जागरूक जनता ने अपने हक की लड़ाई का उदाहरण पेश करते हुए मतदान का ही बहिष्कार कर दिया बात अगर इक्के दुक्के की होती तो शायद हजम हो भी जाती लेकिन पूरे के पूरे गांव ने ही मतदान का बहिष्कार कर दिया जिसे लेकर उस विधानसभा के प्रत्याशी और राजनेताओं के पैरों तले जमीन खिसक चुकी हैं। हालांकि अन्य जगहों की तरह इधर भी साम दाम दंड भेद की नीति से वोटरों को लुभाने का प्रयास किया गया लेकिन इस गांव के लोगों ने पहले से ही अपनी रणनीति तैयार कर रखी थी और फिर ऐन वक्त पर अपनी ताकत का अंदाजा कराते हुए मतदान का ही बहिष्कार कर डाला आइए जानते हैं कि कौन सा है यह गांव और आखिर क्यों किया गांव वालों ने मतदान का बहिष्कार....


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कहां का है मामला..?? आखिर क्यों किया मतदान का बहिष्कार..




यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के शिवपुरी से है आप सब पहले से ही जानते हैं कि मध्य प्रदेश में उपचुनाव का माहौल है हफ्तों चले चुनावी जनसंपर्क और दोनों पार्टियों के राजनेताओं के लुभावने भाषणों के बाद अब मौका आया जनता की बारी का लेकिन यहां की जनता ने भ्रष्ट राजनेताओं को मजा चखाते हुए। ऐन वक्त पर मतदान करने से ही इनकार कर दिया। आपको बता दें कि शिवपुरी जिले की पोहरी विधानसभा में वोटर्स के मतदान के बहिष्कार की बात को लेकर पूरी विधानसभा में खलबली मची हुई है। यहां एक दो नहीं बल्कि पूरे के पूरे गांव ने या यूं कहें 500 परिवारों ने मतदान का बहिष्कार कर दिया है। यह बहिष्कार ग्राम बुडदा के लोगों ने किया है। मंगलवार की सुबह से ही पूरे गांव वालों ने मतदान न करने का फैसला कर लिया हालांकि सुबह से ही इनके मान मनुहार का दौर चालू है लेकिन गांव वाले मतदान न करने की अपनी बात पर अड़े रहे।


*यहां मास्क लगाना* *जरूरी ही नहीं बल्कि अनिवार्य* *विधेयक हुआ पारित..*


जानिए ऐसा क्या हुआ जो गांव वालों ने किया मतदान का बहिष्कार..??


ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम बुड़दा में 500 से अधिक परिवारों की स्थिति काफी दयनीय है सरकारी तंत्र की बात करें तो केवल और केवल पहुंच वालों तक की योजनाओं का लाभ मिल पाता बाकी लोग सिर्फ और सिर्फ आश्वासन की खुराख खाकर जिंदा है। मतदान के बहिष्कार को लेकर एक महत्वपूर्ण मुद्दा यह भी है की बुड़दा यहां अभी तक लोगों को अपने मुआवजे की राशि नहीं मिल पाई है जिसे लेकर वे इतने नाराज हैं कि उन्होंने मतदान ही ना करने का फैसला लिया है आपको बता दें कि अपर ककेटो डैम के डूब क्षेत्र में आने वाले 556 परिवारों में से महज 56 परिवारों को सरकारी मुआवजा मिला है जबकि 500 परिवार मुआवजा न मिलने के चलते गंभीर समस्याओं के बीच गुजर बसर करने को मजबूर हैं गांव वालों ने आरोप लगाया है कि डूब क्षेत्र का हवाला देकर प्रशासनिक अधिकारी ना तो यहां का विकास कर रहे हैं और ना ही 500 लोगों को विस्थापित कर रहे हैं यही कारण है कि यह 500 परिवार बिना सुविधाओं के नर्क जैसा जीवन भोग रहे हैं।


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पिछले चुनाव में वोट मांगने आए नेताओं ने दिया था आश्वासन... अब अगला चुनाव आ गया...


राजनेताओं के झूठे वादों की दास्तान सुनाते हुए गांव वालों ने बताया कि पिछले विधानसभा चुनाव में जब नेता वोट मांगने आए थे तो हमने उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया था जिसके बाद उन्होंने आश्वासन दिया था कि जल्द से जल्द मुआवजा और सर्व सुविधा युक्त विस्थापन वाली जगह पर उन्हें बसाया जाएगा लेकिन चुनाव बीत जाने के बाद ना तो राजनेता आए और ना ही अधिकारी और उसी आश्वासन की आस लगाए एक बार फिर से चुनाव आ गए इसलिए 500 परिवारों ने एकजुट होकर राजनीतिक दलों को जनता की ताकत दिखाने का फैसला किया है।


यहां गाँव मे फैला है..रेत माफियाओं के आतंक...*साहब..बंदूक की नोक पर* *जमीन हथिया रहे रेत माफिया..* *ग्रामीण महिलाओं ने लगाई कलेक्टर से गुहार..*


मुख्यालय से महज 65 किलोमीटर की दूरी फिर भी नहीं पहुंच पाती है राहत




गौरतलब हो कि जिला मुख्यालय से महज 65 किलोमीटर की दूरी पर बसा यह गाँव आज भी सरकारी योजनाओं के लाभ पहुंचने का इंतजार कर रहा है इस गांव की दुर्दशा का अंदाजा इस बात से लगा लीजिए कि यहां अब तक सड़क भी नहीं बन पाई बगल से डैम होने के कारण आए दिन यहां पानी भरा रहता है जिसके चलते कई विषैले जीव जंतु यह डेरा जमाए रहते हैं यहां ना तो प्राथमिक चिकित्सा की कोई व्यवस्था है और यदि कोई घटना घट जाए तो मुख्यालय तक पहुंचाने के लिए कोई साधन भी नहीं है

ग्रामीणों का कहना है कि हमें दूसरी जगह विस्थापित कराया जाएगा इस तरह की बात पिछले चुनाव में वोट मांगने आए लोगों ने कही थी लेकिन 556 परिवारों में से महज 56 परिवारों को मुआवजा देने के बाद यही पास में ही चरणों की जमीन पर प्लाट दे दिए गए और बचे हुए 500 परिवारों को उन्हीं के हाल पर छोड़ दिया गया यही एक अहम वजह है जिसे लेकर 500 परिवारों ने मतदान का बहिष्कार कर दिया है।


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विकास की कलम

चीफ एडिटर

विकास सोनी

लेखक विचारक पत्रकार




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