नफरत की दुनिया को छोड़कर.. खुश रहना...गजराज.. क्या अब नींद से जागेगा..?? वन विभाग.. - Vikas ki kalam,जबलपुर न्यूज़,Taza Khabaryen,Breaking,news,hindi news,daily news,Latest Jabalpur News

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नफरत की दुनिया को छोड़कर.. खुश रहना...गजराज.. क्या अब नींद से जागेगा..?? वन विभाग..

नफरत की दुनिया को छोड़कर.. 
खुश रहना...गजराज..
क्या अब नींद से जागेगा..??
वन विभाग..





उड़ीसा से छत्तीसगढ़ होते हुए मध्य प्रदेश के मंडला और जबलपुर जिले की सीमा में घूम रहे दो हाथियों में से एक हाथी कि आज सुबह दर्दनाक मौत हो गई, मृत हाथी का शव मोहास गाँव से लगे जंगल में पाया गया, इधर मौत की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची जांच शुरू कर दी है। आपको बता दें कि कान्हा के जंगल से भटककर तीन दिन जब पूर्व बरगी-बरेला के बीच डेरा जमाने वाले हाथियों में से एक की शुक्रवार की सुबह बरगी के मोहास गाँव से लगे जंगल में लाश मिलने से हड़कंप  मच गया। वहीं दूसरा हाथी भी लापता है, जिसको लेकर उसकी भी मौत की आशंका जताई जा रही है।


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जमीन में गड़े मिले दांत तड़प तड़प कर हुई हाथी की मौत


वीके झरिया (एमकेएफ)
ग्रामीणों को जैसे ही जानकारी मिली की पास के जंगल में एक मृत हाथी पड़ा हुआ है तो उन्होंने वन विभाग को इसकी सूचना दी, वहीं वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच कर जब जांच शुरू की तो पाया कि हाथी के दोनों दांत जमीन में गड़े हुए थे,और उसकी सूंड दबी थी,गांव वाले जब मौके पर पहुंचे तो मृत हाथी के दांत नहीं दिख रहे थे जिसके कारण ऐसी आशंका जताई जा रही थी कि शिकार के लिए उसकी हत्या हुई है लेकिन जब मृत हाथी को क्रेन से उठाया गया। तो शव में दांत मौजूद थे और लोगों की आशंका दूर हो गई ।जानकारी के मुताबिक बीते कुछ दिनों से बरगी से लगें इलाके में घूम रहे दोनो जंगली हाथी रहवासी इलाके में आ जाने के चलते बेचैन होकर यहाँ वहाँ भटक रहे थे।

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हाथी की दर्द भरी चिंघाड़ से सहम गया गांव.. लेकिन वन विभाग की नहीं टूटी नींद..


लोचन पटेल ग्रामीण
क्षेत्र के ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार तड़की सुबह करीब 4:00 बजे से हाथियों के चिंघाड़ने की आवाजें काफी जोर जोर से आ रही थी। जिसे लेकर पूरे गांव को एहसास हो गया की हो ना हो दोनों हाथी किसी बड़ी मुसीबत में है। घटना की सूचना तत्काल ही बरगी थाने में दी गई और पुलिस द्वारा भी वन विभाग की टीम को घटना से अवगत कराया गया। तकरीबन आधे से 1 घंटे तक चिंघाड़ने के बाद आवाजें आनी बंद हो गई लोग समझे कि हाथी दूसरी तरफ निकल गए हैं लेकिन उजाला होने पर हाथी की लाश देखी गई तो हंगामा मच गया। इसके तकरीबन 4 घंटे बाद वन विभाग के अधिकारियों की नींद खुली। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते वन विभाग का अमला पहुंच जाता तो आज जीवित होते गजराज..

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हाथी के मृत होने की सूचना पर पहुंचा वन विभाग का अमला




हाथी की मौत की खबर लगते ही पूरे गांव में हड़कंप मच गया यह बात सबको पता थी कि हाथी मर चुका है बस औपचारिकता करने वाले वन विभाग के अमले की राह देखी जा रही थी सूचना के 4 घंटे बाद सुबह करीब 8:00 बजे वन विभाग पुलिस वाइल्ड लाइफ सेल वन्य प्राणी विशेषज्ञ के अलावा वेटनरी डॉक्टरों की टीम घटनास्थल पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना करने के बाद हाथी को क्रेन के जरिए हाईवा में रखकर गोसलपुर स्थित वन विभाग के डिपो ले जाया गया जहां उसका करीब 5 घंटे से ज्यादा समय तक पोस्टमार्टम किया गया ।वही दूसरे हाथी की तलाश में सुबह से देर रात तक सर्च अभियान चलाया जा रहा है लेकिन हाथी का कुछ पता नहीं चला जानकारों के अनुसार दोनों हाथियों की कीमत एक एक करोड़ रुपए होने का अनुमान है।


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धरे के धरे रह गए मॉनिटरिंग के दावे..
सिर्फ औपचारिकता निभाता रह गया वन विभाग


जंगली हाथियों के जिले में प्रवेश करने के बाद से ही वन विभाग के आला अफसर उनकी सुरक्षा प्रॉपर मॉनिटरिंग और उन्हें खदेड़ का सुरक्षित जंगल भेजने के बड़े-बड़े दावे कर रहे थे विभागीय अधिकारियों ने दावा किया था कि करीब 25 लोगों की अलग-अलग टीमें 24 घंटे दोनों हाथियों की मूवमेंट पर रेस्क्यू में जुटी थीं। तमाम टीमें विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप पर पल-पल की अपडेट भी पहुंचा रही थी। फिर ऐसा क्या हुआ कि दर्द से चिल्लाते रह गए हाथी और वन विभाग के अमले को इसकी भनक भी ना लगी।


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वन विभाग की कार्यप्रणाली पर फूट रहा आम जनता का गुस्सा


जंगली हाथी की अचनाक हुई मौत से वन्य प्राणी प्रेमियों में खासा आक्रोश देखने को  मिल रहा है,वन्य प्राणी प्रेमीयो की माने निश्चित रूप से हाथी की मौत के लिए वन विभाग दोषी है क्योंकि वन विभाग को जब पता था कि ये जंगली हाथी है और रहवासी इलाका पसन्द नही करते बावजूद इसके वन विभाग ने हाथियों की देखरेख में लापरवाही बरती।

किशन लाल केवट
वही ग्रामीणों की मानें तो हाथियों की पल-पल की खबर ग्रामीणों द्वारा दी जा रही थी लेकिन शायद वन विभाग का अमला यह सोच रहा था कि हाथी अपने नियमित सफर को तय करते हुए चुपचाप नरसिंहपुर चले जाएंगे उनकी यही गलतफहमी बहुत बड़ी चूक बन गई।

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5 घंटे तक चला हाथी का पोस्टमार्टम
मौत के कारण का हुआ खुलासा..


घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद  मृत हाथी को क्रेन के जरिए हाईवा में रखकर गोसलपुर स्थित वन विभाग के डिपो ले जाया गया। जहां उसका करीब 5 घंटे से ज्यादा समय तक पोस्टमार्टम किया गया । इस दौरान जबलपुर वन परीक्षेत्र अधिकारी अंजलि मार्को सहित वन विभाग का अमला मौके पर मौजूद रहा।सूत्रों के अनुसार पीएम रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई है कि बिजली के तार में हाथी की सूंड फस जाने के कारण करंट लगने के बाद हाथी का हार्ट-फेल हो गया था संभवत हाथी की मौत इसी कारण से हुई होगी खुद को बचाने के लिए हाथी ने काफी देर मशक्कत की यही कारण है कि हाथी के वजन के चलते उसके दोनों दांत जमीन में बुरी तरीके से धंस गए थे।

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एक तो निपट गया.. कम से कम दूसरे को तो बचा ले... वन विभाग


यह कोई पहला मामला नहीं है बल्कि वन विभाग की लापरवाही के चलते इससे पहले भी एक तेंदुए की जान जा चुकी है उस दौरान भी वन विभाग ने खुद की पीठ थपथपा ने का दावा किया था। लेकिन आखिरकार तेंदुए को अपनी जान से हाथ धोना पड़ गया। वहीं बीते कुछ माह से वन विभाग शहर में घूम रहे तेंदुए को भी पकड़ने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहा है। मगर सबसे खास बात यह है कि आमजन और मीडिया को दर्शन देने वाला तेंदुआ परिवार वन विभाग को बस नज़र नहीं आता। फिलहाल वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दूसरा हाथी कहाँ है। सूत्र बताते है कि  वन विभाग के अमले को खुद ही नहीं पता कि दूसरा हाथी कहाँ है।आशंका यह भी जताई जा रही है कि कहीं दूसरे हाथी के साथ भी किसी तरह की अनहोनी घटना न घटी  हो,बहरहाल वन विभाग की एक बड़ी लापरवाही के चलते आज जहां एक जंगली हाथी की मौत हो गई तो वही दूसरा हाथी लापता हो गया है।


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दौनों हाथियों की जोड़ी का है..लंबा इतिहास..




जबलपुर जिले में अपने नियमित सफर के दौरान भटक कर आए दोनों हाथी जंगली थे।बताया जा रहा है कि करीब 2 साल पूर्व दोनों हाथी उड़ीसा छत्तीसगढ़ होते हुए कान्हा के जंगल में आकर बस गए थे। 22 से 24 वर्ष के दोनों हाथी चंचल और आक्रामक स्वभाव के थे। फैल रिकार्डों की माने तो इन्हें पकड़ने के लिए कान्हा के जंगलों में दो बार पालतू हाथियों की टीम के साथ रेस्क्यू किया जा चुका है। लेकिन दोनों बार इस जोड़ी ने 8 से 10 हाथियों को बुरी तरह घायल करके खदेड़ दिया था। यह दोनों पिछले 2 साल से ठंड की शुरुआत होते ही नर्मदा नदी पार करके नरसिंहपुर चले जाते थे। जहां फरवरी तक दोनों नरसिंहपुर से गाडरवारा के बीच गन्ने के खेतों के आसपास रहने के बाद मार्च की शुरुआत में पुनः कान्हा लौट आते थे। लेकिन इस बार वन-विभाग की लापरवाही के चलते उनका सफर आधे रास्ते मे ही खत्म हो गया।


विकास की कलम के  जिम्मेदारों से सवाल


जब हाथी चिंघाड़ रहा था तब कहाँ थी वन विभाग की टीम..


गाँव वालों के ख़बर करने पर देरी से क्यों पहुंचा अमला..


तीन दिन से क्या कर रहा था वन विभाग


कौन फैलाता है..जंगल मे करंट भरे तार..


जब स्थिति इतनी गंभीर थी तो नाइट पेट्रोलिंग का स्टाफ क्यों नहीं था एक्टिव


दो सालों से इसी रास्ते से आते जाते थे हांथी..तो वन विभाग ने क्यों दिखाई लापरवाही..


सबसे खास बात..दूसरा हांथी कहाँ है..??


*नाकारा पति को नसीहत देना* *पत्नी को पढ़ा महंगा..* *पत्नी के गले में किया चाकू से वार*


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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार

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