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यहां पैदा हुआ चतुर्भुजी बालक कड़ी मशक्कत के बाद डॉक्टरों की टीम ने की सर्जरी

यहां पैदा हुआ चतुर्भुजी बालक

कड़ी मशक्कत के बाद 

डॉक्टरों की टीम ने की सर्जरी


इंदौर के एमवाय हॉस्पिटल में बच्चे की हुई सर्जरी


हिंदू संस्कृति में देवी देवताओं के चारभुजा होने पर मजाक उड़ाने वाले पढ़े-लिखे बुद्धिजीवियों को यह खबर जरूर पढ़नी चाहिए । जो कहते थे की देवी देवताओं के दो से अधिक हाथ पैर होना महज एक कपोल कल्पना है । उसे कलयुग में पैदा हुए इस बच्चे ने गलत साबित कर दिया। यहां एक बच्चा चारभुजाओ और चार पैरों के साथ पैदा हुआ । जो की पूर्णता स्वस्थ भी था। जिसे देखने के लिए दूर दूर से लोगों की भीड़ इकहठ्ठी होने लगी। खास बात यह है कि इस बच्चे का जन्म बिना किसी डॉक्टरों की देखरेख के घर पर ही बेहद सामान्य तरीके से हुआ है।


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कहां की है यह घटना कौन है यह चतुर्भुजी बालक....


मामला मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में स्थित मेघनगर का है। जहां मध्यम वर्गीय परिवार के अल्बुज नामक शख्स के यहां यह बच्चा 9 अक्टूबर को पैदा हुआ। पिता के अनुसार वह है रोजाना की तरह काम पर गया था और 9 अक्टूबर की रात को 8:00 बजे घर लौट आया पति और पत्नी में एक साथ खाना खाया और सो गए रात करीब 12:00 बजे पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई तो पति ने 108 पर कॉल कर एंबुलेंस को सूचना दी लेकिन जब तक एंबुलेंस आती तब तक बच्चे का जन्म घर पर ही हो गया था पैदा हुआ बच्चा जन्म से ही चार हाथ और चार पैर वाला था। जन्म के बाद बच्चा पूर्णता स्वस्थ था लेकिन उसके चार हाथ और चार पैर को देखकर हर कोई हैरान था लिहाजा जन्म के बाद उसे मेघनगर अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों की टीम भी बच्चे को देखकर हैरान रह गई इसके बाद इस बच्चे को झाबुआ अस्पताल ले जाया गया जहां से बच्चे को इंदौर के एम वाय अस्पताल में रेफर किया गया।


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आधुनिक विज्ञान की भाषा में यह चमत्कार नहीं एक बीमारी है....


झाबुआ में पैदा हुआ 4 हाथ वाला बच्चा


विचित्र अंगों के साथ पैदा होने वाले बच्चों को आधुनिक विज्ञान की भाषा में एक विशेष बीमारी से ग्रसित बताया जाता है।

चिकित्सकों की मानें तो यह एक जेनेटिक डिसऑर्डर होता है जिसे मेडिकल साइंस में हेट्रोफोगस पैरासिटिक कंज्वाइंड ट्विन्स नामक जटिल बीमारी के नाम से जाना जाता है। इस तरीके की घटना प्रायः 10 से 20 लाख लोगों में से किसी एक के साथ होती है। वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार बच्चा हेट्रोफोगस नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित है। इस परिस्थिति में दो बच्चे आपस में गर्भाशय के अंदर ही जुड़ जाते हैं जिसमें 1 बच्चे का तो पूर्ण विकास होता है लेकिन दूसरा बच्चा आधा अधूरा रह जाता है ऐसी स्थिति में बच्चे में सिर के अलावा करीब-करीब शरीर के बाकी हिस्से भी पूर्ण होते हैं और नसे तथा खून की नदियां भी अन्य बच्चे के शरीर के अंगों से जुड़ी होती हैं। इस तरह की परिस्थिति में बच्चे की जान को बेहद खतरा होता है । जिसका सर्जरी ही एकमात्र उपाय है।


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इंदौर के सरकारी अस्पताल में कर दिया कमाल...

3 घंटे की जटिल सर्जरी के बाद बच्चे को किया सामान्य..


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इस विलक्षण बच्चे की सर्जरी का जिम्मा इंदौर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवाई ने उठाया और अनुभवी चिकित्सकों की एक टीम ने 3 घंटे की कड़ी मशक्कत और जटिल सर्जरी के बाद बच्चे को नया जीवनदान दिया। सर्जरी के बाद बच्चे के अन्य अंगों को अलग कर दिया गया है। झाबुआ जिले से इस बच्चे को 12 नवंबर को इंदौर लाया गया था जिसकी सफलतापूर्वक सर्जरी की जा चुकी है।


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काफी चुनौतीपूर्ण होती है ऐसे बच्चों की सर्जरी


चिकित्सकों की मानें तो इस तरह की सर्जरी काफी चुनौती पूर्ण होती है इस विलक्षण बच्चे को 12 अक्टूबर को झाबुआ अस्पताल से रेफर किया गया था बच्चा जैसे ही एमवाय अस्पताल में पहुंचा विशेष चिकित्सकों के दल ने बच्चे का पूर्ण परीक्षण किया जिसके बाद उसकी सर्जरी किए जाने का निर्णय लिया गया। चिकित्सकों के अनुसार इस परिस्थिति में बिल्कुल भी आभास नहीं हो पाता कि बच्चे के किन अंगों में खराबी है और कौन से अंग कहां से जुड़े हैं। ऐसे में सालों का तजुर्बा और धैर्य का इस्तेमाल करते हुए चिकित्सकों ने धीरे धीरे अंगों को अलग करना शुरू किया बरहाल सर्जरी के बाद बच्चे को आईसीयू में रखा गया है जहां वह पूर्णता स्वस्थ है। बच्चे को मां का दूध दिया जाना शुरू कर दिया है जल्द ही बच्चे को घर भेज दिया जाएगा।


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इन अनुभवी चिकित्सकों की टीम ने की जटिल सर्जरी..


एमवाय हॉस्पिटल के अनुभवी चिकित्सक


इंदौर के एमवाय अस्पताल में हुई है जटिल सर्जरी आधुनिक चिकित्सा विज्ञान का जीता जागता उदाहरण है अन्य जगह पर इस सर्जरी का खर्च लाखों में आता है जिसे अनुभवी चिकित्सकों की टीम ने सरकारी अस्पताल में सफल कर दिखाया इस जटिल सर्जरी में शिशु सर्जरी विभाग के डॉक्टर बृजेश लाहोटी डॉ अशोक लङ्ढा डॉ शशि शंकर शर्मा डॉक्टर पूजा तिवारी , रेसिडेंट्स डॉक्टर शुभम गोयल डॉक्टर तनुज अहिरवार साथ ही एनएसथीसिया डॉक्टर केके अरोरा और डॉक्टर पूजा वास्केल की कड़ी मेहनत और अनुभव की बदौलत आज बच्चा पूर्णता स्वस्थ है।


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विकास की कलम

चीफ एडिटर

विकास सोनी

लेखक विचारक पत्रकार






 

  

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