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शनिवार, 12 सितंबर 2020

सर जी प्लीज... मैं भू-माफिया नहीं हूं... कम से कम.. कागज तो देख लो...

सर जी प्लीज...
मैं भू-माफिया नहीं हूं...
कम से कम.. कागज तो देख लो...
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शुक्रवार की सुबह निगम और जिला प्रशासन की संयुक्त कार्यवाही में ध्वस्त किये गए दरबार रेस्टोरेंट के मामले को लेकर जबलपुर शहर की जनता दो फाड़ में बंट गयी है। एक वह जो इस कार्यवाही की वाहवाही कर रही है तो दूसरे वह जो प्रशासन की इस जबरिया कार्यवाही पर सवालिया निशान खड़े कर रहे है। लेकिन सबसे अहम बात यह है कि जिला प्रशासन जिसे भू- माफिया घोषित कर चुका है। वह जैन परिवार चीख चीख के गुहार लगा रहा है कि....
सर प्लीज..
मैं भू-माफिया नहीं हूं...
कम से कम.. कागज तो देख लो...

यहां पढ़ें :- आखिर कैसे टूटा..?? दरबार वेज रेस्टोरेंट..

पहले समझिए क्या है मामला...
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जबलपुर शहर के नौदरा ब्रिज के समीप स्थित  दरबार रेस्टारेंट को  जिला प्रशासन द्वारा नगर निगम और पुलिस के सहयोग से ध्वस्त करने की कार्यवाही प्रारम्भ की गई। आधिकारिक पुष्टि के अनुसार इस जगह पर भवन निर्माण कराए जाने की परमिशन नहीं है। साथ ही इसे अवैध अतिक्रमण घोषित करते हुए इस पर भू-माफिया द्वारा जबरन कब्जा किये जाने की बात कही गयी है। जिसके तहत जिला प्रशासन और निगम का अमला तड़की सुबह ही मौके पर पहुंच गया। और फिर बुलडोजर की फौज ने देखते ही देखते इस आलीशान रेस्टोरेंट को मलवे के ढेर में तब्दील कर दिया।

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कार्यवाही के दौरान कागज लेकर चीखता रहा संचालक...

इस पूरी कार्यवाही के दौरान रेस्टोरेंट संचालक यश जैन और हर्ष जैन भी मौके पर उपस्थित थे। जिन्होंने कई बार मौजूद अधिकारियों को रेस्टोरेंट संबंधी दस्तावेज दिखाए।लेकिन बात हद से आगे गुजर गई थी। संचालकों को यह बात तो समझ आ ही चुकी थी कि अब बात करने से कोई बात नहीं बनने वाली। इतना ही नहीं अब इस कार्यवाही के बाद रेस्टोरेंट जैन परिवार न सिर्फ अपना मान सम्मान खो चुका है बल्कि उसे भू-माफिया भी करार कर दिया गया है।


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संचालक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये कार्यवाही पर उठाए सवाल..
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जिला प्रशासन की इस कार्यवाही के बाद रेस्टोरेंट संचालक हर्ष जैन एवं यश जैन काफी व्यथित है। प्रशासन की इस जबरिया कार्यवाही को लेकर उन्होंने बाकायदा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमे उन्होंने पात्रकारों को जानकारी देते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर एक के बाद एक कई आरोप लगाए है।
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रेस्टोरेंट के मालिकों द्वारा  सारी कार्यवाही पर सवाल खड़े किए गए है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इतनी बड़ी कार्यवाही के पहले निगम प्रशासन ने उन्हें कोई  भी नोटिस जारी नही किया।
जिला प्रशासन द्वारा ज़मीन में निर्माण को अवैध बताना पूरी तरह गलत है।उन्होंने गुरुवार को ही प्रोपर्टी से जुड़े सारे दस्तावेज नगर निगम में पेश कर दिए थे। लेकिन दस्तावेजों का मूल्यांकन किये बगैर ही निगम ने बुलडोजर भेजकर कार्यवाही कर दी।दरबार मैनेजमेंट ने प्रोपर्टी से जुड़े दस्तावेज मीडिया से भी साझा किए है।उनका दावा है कि उन्होंने समय समय पर जहां टेक्स दिया है वही उनके सारे दस्तावेज वैधानिक है।

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कलेक्टर साहब के जबाब से संचालक- असंतुष्ट

दरबार रेस्टोरेंट को जमींदोज किये जाने को लेकर जबलपुर कलेक्टर का बयान भी काफी असंतोष जनक दिखाई दिया। पत्रकारों के सवालों का जबाब देते हुए जिला कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने कहा कि
 नगर निगम ने ये कार्यवाही की है तो सारी जांच पूरी होने के बाद ही कि होगी।
अब ऐसे में रह रह कर एक सवाल खड़ा होता है कि इतनी बड़ी कार्यवाही हुई और कलेक्टर को मामले से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी ही नहीं है। कहीं ये कार्यवाही हड़बड़ाहट में तो नहीं कर दी गयी।

2 साल पहले नोटिस कार्यवाही हुई अब

इस पूरी कार्यवाही को लेकर रेस्टोरेंट संचालक ने बताया कि रेस्टोरेंट की जमीन में पूर्णतया उनका ही स्वामित्व है। सरकारी दस्तावेजों खसरा इत्यादि में उन्ही का नाम विधि-पूर्वक दर्ज है।
उक्त जमीन से जुड़े सारे दस्तावेज उनके पास है।
दो वर्ष पूर्व नगर निगम द्वारा 2018 में उन्हें एक नोटिस दिया गया था जिसमे उनके निर्माण को अवैध घोषित किया गया था। जिसके प्रतिउत्तर में संचालक जैन बंधुओ द्वारा निगम को सारे दस्तावेज दिए गए थे साथ ही न्यायालय में केस भी लगाया गया था। 2018 के बाद से लेकर अब तक उन्हें कोई भी नोटिस नहीं दिया गया। और फिर अचानक रेस्टोरेंट को तोड़ दिया जाना साफ साफ नाइंसाफी है।

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बीती ताहि बिसारि दे, आगे की सुधि लेइ।

जो होना था वो तो हो गया। कहावत है कि साँप तो निकल गया अब लकीर पर लाठी पीटने से क्या होगा। ये कोई पहली कार्यवाही नहीं है। जब भी कोई क्रिया होती है..तो उसकी प्रतिक्रिया होना भी स्वाभाविक है। पहले भी शहर ने कई बड़े प्रतिष्ठानों और इमारतों को ढेर होते देख है। और फिर से उनके आबाद होने किस्सा भी आम है। अगर आपको लगता है कि अन्याय हुआ है तो आप अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए भी स्वतंत्र है।राजनीतिक पंडितों की माने तो सत्ता परिवर्तन में ऐसी कार्यवाही होना आम बात है। कभी खदान...कभी दुकान... तो कभी मकान...ये तो होता ही रहेगा ।
बुद्धिमान को चाहिए कि

बीती ताहि बिसारि दे, आगे की सुधि लेइ।




नोट-विकास की कलम अपने पाठकों से अनुरोध करती है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें..

ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें। साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए।

विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार

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