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क्या..??जिला अस्पताल में नहीं है.. कोरोना इलाज की व्यवस्था.. जो निजी अस्पताल में इलाज करवा रहे सिविल सर्जन.. आखिर करोड़ों रुपये फूंकने का क्या फायदा..??

क्या..??जिला अस्पताल में नहीं है..
कोरोना इलाज की व्यवस्था..
जो निजी अस्पताल में इलाज करवा रहे सिविल सर्जन..
आखिर करोड़ों रुपये फूंकने का क्या फायदा..??

कोरोना वायरस के नाम पर करोड़ों की होली खेलने के बाद , अभी भी जिला अस्पताल विक्टोरिया व्यवस्थाओं के नाम पर शून्य है।ये हम नहीं कहते बल्कि ..
यहां पदस्थ जिम्मेदार अधिकारी ही यहां की अव्यवस्था को जाहिर कर रहे है। कहने को तो जिला अस्पताल में उच्च स्तरीय चिकित्सकीय व्यवस्था उपलब्ध है। कागजों की माने तो यहां पर हर वो सुविधा उपलब्ध है जो एक निजी अस्पताल में होती है। और तो और इनके क्रियान्वन के लिए करोड़ों का फण्ड भी होता है। लेकिन इन सबके के बावजूद यहीं के वरिष्ठ डॉक्टर की तबियत खराब होने पर उनका निजी अस्पताल में जाना।
जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं का असली चेहरा बयान करता है।

खुद सिविल सर्जन को नहीं भरोसा..
तो आमजन का क्या होगा...

कहते है कि हलवाई अपनी मिठाई खुद नहीं खाता...इसके पीछे एक बड़ा राज होता है...दरअसल मिठाई के बनने से लेकर परोसने तक कि सच्चाई उसके सामने होती है। मसलन गुणवत्ता से लेकर साफ-सफाई के अंतिम दौर तक।
ये वही हकीकत होती है। जो आमजन से छुपी होती है।
ठीक ऐसा ही नजारा जबलपुर के शासकीय जिला अस्पताल विक्टोरिया में देखने को मिला। जहां कोरोना के उपचार के बड़े बड़े वादे किए गए। रोजाना सरकारी डॉक्टर यहां की व्यवस्थित उपचार व्यवस्था को लेकर अपनी पीठ थपथपा रहे थे। लेकिन अचानक यहां के सिविल सर्जन ही कोरोना से संक्रमित हो गए। और फिर वही हुआ जिसका अंदाजा सभी को था।

जब जिला अस्पताल में है सारी व्यवस्था
तो निजी अस्पताल क्यों गए सिविल सर्जन...??

जिला शासकीय विक्टोरिया अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. सीबी अरोरा को जैसे ही उनके संक्रमित होने का आभास हुआ। आनन फानन में उन्होंने निजी अस्पताल की शरण ले ली। वर्तमान में वह अपने कोरोना संक्रमण का  उपचार शासकीय अस्पताल में न करवाकर निजी अस्पताल में करवा रहे हैं।
उनके निजी अस्पताल में उपचार करवाने की बात ने जिला अस्पताल विक्टोरिया में दिए जाने वाले उपचार की गुणवत्ता को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है।
लोगों का कहना है कि जब जिला अस्पताल के इतने बड़े अधिकारी को खुद के विभाग पर भरोसा नहीं है। तो आमजनता इन पर भरोसा कैसे करे।

कांग्रेस सेवा दल ने सिविल सर्जन के खिलाफ सौपा ज्ञापन...

सिविल सर्जन के निजी अस्पताल में इलाज करवाने की बात को लेकर कॉंग्रेस सेवा दाल के कार्यकर्ताओं ने खासी आपत्ति जताई है। उन्होंने संभागायुक्त महेश चंद्र चौधरी से मुलाकात कर एक ज्ञापन भी सौपा है।
सेवादल ने ज्ञापन में कहा है कि मप्र में लगातार कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। जबलपुर संभाग भी अछूता नहीं है।
 सभी शासकीय अस्पतालों में व्यवस्थाओं की कमी सामने दिख रही है, इसका उदाहरण शासकीय विक्टोरिया अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. सीवी अरोरा हैं जो कोरोना संक्रमित होने पर स्वयं अपना इलाज निजी अस्पताल में कराकर चिकित्सा का लाभ ले रहे हैं। उनके इस कार्य से प्रदेश में गलत संदेश पहुंच रहा है। इसका मतलब है व्यवस्थाओं की कमी है, तभी उनको अपना इलाज प्राइवेट कराना पड़ रहा। सेवादल ने मांग की है कि उक्त अधिकारी अपना खर्च स्वयं वहन करें तथा उनके ऊपर विभागीय कार्रवाई की जाए।

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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार