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गुरुवार, 20 अगस्त 2020

सबसे कठिन व्रतों में से एक है.. हरतालिका तीज का व्रत.. जानें कब है तीज... क्या है नियम....

सबसे कठिन व्रतों में से एक है..
हरतालिका तीज का व्रत..
जानें कब है तीज...
क्या है नियम....

हरतालिका का व्रत 21 अगस्त 2020 को है. पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज पर्व के रुप में मनाते हैं. हरतालिका तीज का पर्व सुखद दांपत्य जीवन और मनचाहा वर प्राप्ति के लिए मनाया जाता है. सुहागिन स्त्रियां व्रत रखकर पति की लंबी आयु की कामना करती हैं वहीं कन्या मनचाहा वर पाने के लिए व्रत रखकर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं।

हरितालिका तीज व्रत किसे करना चाहिए

हरतालिका तीज  व्रत सुहागिनों के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की अराधना से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है। इस साल यह व्रत 21 अगस्त को है। हरतालिका तीज व्रत भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है।

हरतालिका तीज व्रत हर स्त्री के लिए बेहद खास और लाभकारी माना गया है। हालांकि कठिन नियमों के कारण इस व्रत को ज्यादा कठिन व्रत मानते हैं। जानिए

क्या है उत्तम मुहूर्त का सटीक समय..

पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 21 अगस्त को पड़ रही है. इस दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा. इस दिन सिद्ध योग का निर्माण हो रहा है. इस दिन सूर्य सिंह राशि और चंद्रमा कन्या राशि में रहेगा. 21 अगस्त को प्रात: काल मुहूर्त 05 बजकर 53 मिनट 39 सेकेंड से 08 बजकर 29 मिनट 44 सेकेंड तक. प्रदोष काल मुहूर्त 18 बजकर 54 मिनट 04 सेकेंड से 21 बजकर 06 मिनट 06 सेकेंड तक रहेगा. हरतालिका तीज पूजा मुहूर्त शाम 6 बजकर 54 मिनट से रात 9 बजकर 6 मिनट तक रहेगा.

क्या है..इस व्रत की पूजन विधि..


हरतालिका तीज पर माता पार्वती और भगवान शंकर की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस व्रत की पूजा विधि इस प्रकार है..
●  हरतालिका तीज प्रदोषकाल में किया जाता है। सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त को प्रदोषकाल कहा जाता है। यह दिन और रात के मिलन का समय होता है।
●  हरतालिका पूजन के लिए भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की बालू रेत व काली मिट्टी की प्रतिमा हाथों से बनाएं।
●  पूजा स्थल को फूलों से सजाकर एक चौकी रखें और उस चौकी पर केले के पत्ते रखकर भगवान शंकर, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
●  इसके बाद देवताओं का आह्वान करते हुए भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश का षोडशोपचार पूजन करें।
●  सुहाग की पिटारी में सुहाग की सारी वस्तु रखकर माता पार्वती को चढ़ाना इस व्रत की मुख्य परंपरा है।
●  इसमें शिव जी को धोती और अंगोछा चढ़ाया जाता है। यह सुहाग सामग्री सास के चरण स्पर्श करने के बाद ब्राह्मणी और ब्राह्मण को दान देना चाहिए।
●  इस प्रकार पूजन के बाद कथा सुनें और रात्रि जागरण करें। आरती के बाद सुबह माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं व ककड़ी-हलवे का भोग लगाकर व्रत खोलें।

पुराणों में हरतालिका तीज व्रत का महत्व



हरतालिका तीज व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। हिमालय पर गंगा नदी के तट पर माता पार्वती ने भूखे-प्यासे रहकर तपस्या की। माता पार्वती की यह स्थिति देखकप उनके पिता हिमालय बेहद दुखी हुए। एक दिन महर्षि नारद भगवान विष्णु की ओर से पार्वती जी के विवाह का प्रस्ताव लेकर आए लेकिन जब माता पार्वती को इस बात का पता चला तो, वे विलाप करने लगी। एक सखी के पूछने पर उन्होंने बताया कि, वे भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप कर रही हैं। इसके बाद अपनी सखी की सलाह पर माता पार्वती वन में चली गई और भगवान शिव की आराधना में लीन हो गई। इस दौरान भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन हस्त नक्षत्र में माता पार्वती ने रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और भोलेनाथ की आराधना में मग्न होकर रात्रि जागरण किया। माता पार्वती के कठोर तप को देखकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और पार्वती जी की इच्छानुसार उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

तभी से अच्छे पति की कामना और पति की दीर्घायु के लिए कुंवारी कन्या और सौभाग्यवती स्त्रियां हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं और भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।

हरतालिका तीज व्रत के नियम


●  हरतालिका तीज व्रत में जल ग्रहण नहीं किया जाता है। व्रत के बाद अगले दिन जल ग्रहण करने का विधान है।
●  हरतालिका तीज व्रत करने पर इसे छोड़ा नहीं जाता है। प्रत्येक वर्ष इस व्रत को विधि-विधान से करना चाहिए।
●  हरतालिका तीज व्रत के दिन रात्रि जागरण किया जाता है। रात में भजन-कीर्तन करना चाहिए।
●  हर तालिका तीज व्रत कुंवारी कन्या, सौभाग्यवती स्त्रियां करती हैं। शास्त्रों में विधवा महिलाओं को भी यह व्रत रखने की आज्ञा है।


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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार




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