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शनिवार, 8 अगस्त 2020

बंदूक की नोक पर.. किशोर से कुकृत्य.. जानिए क्या है पूरा मामला विकास की कलम पर

बंदूक की नोक पर..
किशोर से कुकृत्य..
जानिए क्या है पूरा मामला
विकास की कलम पर
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बाल शोषण की समस्या विकराल रूप ले चुकी हैं. यह केवल देश नहीं बल्कि विदेशों में भी दिन प्रतिदिन बढ़ रही हैं. कहते हैं समाज में व्याप्त हर बुराई के पीछे का कारण शिक्षा का अभाव होता हैं, लेकिन पुराने जमाने से अब तक शिक्षा का स्तर बढ़ा है, लेकिन उसके साथ ही इस बाल शोषण ने भी अपने पैर तेजी से फैलाये हैं. यह आधुनिक समाज की अति गंभीर बीमारी हैं, जिसकी गिरफ्त में मासूमों की खुशियाँ, उनकी सुरक्षा हैं. क्या हैं बाल शोषण? यह कितने प्रकार का होता हैं और इससे कैसे अपने बच्चो को बचाया जा सकता हैं, साथ ही इसके खिलाफ क्या कानून हैं, ये सब आज आप इस ख़बर में जानेंगे।

क्या है मामला..कहाँ की है घटना...

बाल यौन शोषण से जुड़ा यह ताज़ा मामला मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले के कोतवाली थाने का है। जहां 52 वर्षीय एक अधेड़ ने इस साल के नाबालिका किशोर को अपनी हवस का शिकार बनाया है।
विकास की कलम

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोतवाली थाना क्षेत्र में 21 जुलाई को बीडी सोनकर नाम का अधेड़ सब्जी का ठेला लगाकर गुजर बसर करने वाले 15 वर्षीय किशोर को अपने साथ ले गया।उसने किशोर को सब्जी के कैरेट उठाने का बहाना किया जिसके झांसे में किशोर आ गया।सोनकर के सर पर हवस का शैतान सवार था वह किशोर को अपने गोदाम में ले गया और उसकी कनपटी में पिस्तौल लगाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

किशोर ने परिजनों को बताई आपबीती
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घटना के बाद से ही किशोर काफी आहत हुआ था। घबराए किशोर ने आखिरकार अपने परिजनों को आप बीती बात ही दी।
 किशोर जैसे तैसे घर पहुंचा और कई दिनों को अपनी जुबान नही खोली । लेकिन बाद में आरोपी को उसके अंजाम तक पहुचाने उसने परिजनों के साथ कोतवाली थाने जाकर पूरा वृतांत सुनाया।पीढित की शिकायत पर पुलिस ने बीडी सोनकर पर 377,506,342 के साथ पास्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।

बाल यौन शोषण के प्रकार

बच्चों का यौन शोषण कई तरीकों से किया जा असकता है जो प्रत्यक्ष रूप से नज़र नहीं आता. यौन उत्पीडन को समझने और रोकने के लिए, पहले यह जानना आवश्यक है कि यौन शोषण के अतर्गत क्या कुछ कृत आते हैं:

बच्चे के निजी अंगों (लिंग, योनि, गुदा, नितंबों, जीभ, छाती, निपल्स) को छूना, चाहे वह बच्चा कपड़े पहने हो या नहीं.

बच्चे के कपड़े उतरवाना और / या हस्तमैथुन सहित यौन कृत्य करना

बच्चों की लैंगिक छवियां लेना, डाउनलोड करना और / या देखना

बच्चे से वेबकैम के सामने लैंगिक कृत्य करवाना

बच्चे के सामने यौन कृत्यों का प्रदर्शन करना

बच्चे को अश्लील साहित्य दिखाना

बच्चे के साथ विषम यौन गतिविधि करना

बाल यौन शोषण के विरुद्ध कानून

बाल अधिकारों की रक्षा के लिये ‘संयुक्त राष्ट्र का बाल अधिकार कन्वेंशन (CRC)’ एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है, जो सदस्य देशों को कानूनी रूप से बाल अधिकारों की रक्षा के लिये बाध्य करता है।

भारत में बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार के खि़लाफ सबसे प्रमुख कानून 2012 में पारित यौन अपराध के खि़लाफ बच्चों का संरक्षण कानून (POCSO) है। इसमें अपराधों को चिह्नित कर उनके लिये सख्त सजा निर्धारित की गई है। साथ ही त्वरित सुनवाई के लिये स्पेशल कोर्ट का भी प्रावधान है।

यह कानून बाल यौन शोषण के इरादों को भी अपराध के रूप में चिह्नित करता है तथा ऐसे किसी अपराध के संदर्भ में पुलिस, मीडिया एवं डॉक्टर को भी दिशानिर्देश देता है।

वैसे भारतीय दंड संहिता की धारा 375 (बलात्कार), 372 (वेशयावृत्ति के लिये लड़कियों की बिक्री), 373 (वेश्यावृत्ति के लिये लड़कियों की खरीद) तथा 377 (अप्राकृतिक कृत्य) के अंतर्गत यौन अपराधों पर अंकुश लगाने हेतु सख्त कानून का प्रावधान है।

बाल यौन शोषण के विरुद्ध वैधानिक प्रावधानों की सीमाएँ

धारा 375 में बलात्कार को आपराधिक कृत्यों के अंतर्गत परिभाषित किया गया है। किंतु इस धारा के कुछ प्रावधान व व्याख्या संकीर्ण है। इसमें छेड़-छाड़, गलत तरीकों से छूना, देर तक घूरना तथा उत्पीड़न आदि के संदर्भ में स्पष्ट प्रावधानों की कमी नजर आती है। जबकि इस प्रकार के कृत्यों पीडि़त को मानसिक तथा भावनात्मक रूप से गहरे आघात पहुँचाते हैं।

भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अंतर्गत ऐसे संबंध जिनमें यदि व्यक्ति 15 वर्षीय पत्नी के साथ यौन संबंध बनाता है तो उसे अपराध के दायरे से बाहर रखा गया है, जबकि हमारा कानून (बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006) बाल विवाह का प्रतिषेध करता है।


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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार

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