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सोमवार, 13 जुलाई 2020

स्वास्थ्य विभाग में बेधड़क.. संदिग्धों की एंट्री... आखिर किसके इशारे पे हो रहा खेल....

स्वास्थ्य विभाग में बेधड़क..
संदिग्धों की एंट्री...
आखिर किसके इशारे पे हो रहा खेल....

चहेतों की चाहत जो न करवाये वो कम है। यही कारण है कि अधिकारी के बदलते ही विभाग में नए चेहरों की आमद कुछ ज्यादा ही हो जाती है। लेकिन क्या हो जब कोई ऐसा व्यकित एंट्री मार जाय जो संन्दिग्ध हो...और जांच के दायरे में हो..कहीं ऐसा तो नही की विशेष जांच को प्रभावित करने के उद्देश्य से संन्दिग्ध ने एंट्री मारी हो...
लेकिन जिम्मेदारों को क्या...
जब कभी बात उठेगी.... तो हम साफ मुकर जाएंगे।


कहाँ का है मामला..क्या है कहानी..

मामला मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले का है। जहां इन दिनों जिला अस्पताल विक्टोरिया में सेवा निवृत्त हो चुके पूर्व CMHO डॉ.मुरली अग्रवाल की आमद कुछ ज्यादा ही हो रही है। सूत्रों की माने तो वे बाकायदा स्वास्थ्य विभाग के हर मामलों में दखल दे रहे है। साथ ही चिकित्सकों की बैठक भी उन्ही के समक्ष ली जा रही है।

अगर आप सोच रहे है कि उनको किसी जिम्मेदार अधिकारी ने इसके लिए नियुक्त किया है...तो आप गलत है....
क्योंकि जिम्मेदारों के हिसाब से तो उन्हें यहां होना ही नही चाहिए.....

डॉ. मुरली अग्रवाल के खिलाफ EOW में दर्ज है शिकायत...

आपको बतादें की डॉ मुरली अग्रवाल पर आरोप है कि उनके द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के पद में रहते हुए। अपने पद का दुरुपयोग कर शासन को अच्छे खासे राजस्व की क्षति पहुंचाई गई है। जिनमे कई योजनाओं के तहत अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर खरीदी करना एवं व्यवस्थाओं को तोड़मरोड़ कर खुद को लाभान्वित करने के आरोप है।ऐसे कई आरोपों सहित

मुरली अग्रवाल 30.09.19  को सेवा निवृत्त हो गए है।  सेवा निवृत्ति के 11 माह बाद विक्टोरिया जिला चिकित्सालय में बिना किसी आधिकारिक आदेश के प्रगट होकर कोविड का मोर्चा संभाल लिया है
विभाग में चर्चा है की डॉ मुरली अग्रवाल अपनी EOW की जांच प्रभावित करने अपने दस्तावेज गायब करवाने आ रहे है।

जांच के चलते EOW ने विभाग से मांगे दस्तावेज..

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ द्वारा शिकायत पर संज्ञान लेते हुए वर्तमान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दिनांक 26/05/2020 को एक पत्र लिखकर जांच से संबंधित कुछ दस्तावेजों की मांग की गई है। ताकि जांच को आगे बढ़ाकर उसकी अग्रिम कार्यवाही की जा सके।
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पत्र के विषय मे जिम्मेदारों को कोई भी जानकारी नहीं है। अब ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि अक्सर जरूरी कागज़ात किसके इशारे पर दबाए जा रहे है।

क्या कहते है वर्तमान CMHO कुरारिया

इस मामले में जब विकास की कलम ने वर्तमान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रत्नेश कुरारिया से बातचीत की तो उन्होंने दो टूक शब्दों में मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उनके द्वारा न तो डॉ अग्रवाल को किसी जगह नियुक्त किया गया है और न ही कोई अधिकार दिए गए है।

विकास की कलम ने जब साक्ष्यों के आधार पर CMHO से जबाब मंगा की आखिर किस अधिकार के चलते डॉ अग्रवाल विभाग के कार्यालयों में घुसबैठ कर रहे है। अथवा विशेष मीटिंगों में बैठ रहे है।
सवालों का जबाब देते हुए CMHO कुरारिया ने बताया कि शुरुवात में अन्य चिकित्सकों के मार्गदर्दर्शन के लिए उन्हें कुछ दिनों का समय दिया गया था। लेकिन अब उनका कहीं भी हस्तक्षेप नहीं है।

संदिग्धों का हस्तक्षेप कर सकता है जांच प्रभावित

जानकारों की माने तो यदि विभाग के कार्यालयों में संन्दिग्ध व्यकित की घुसपैठ होती है। तो ऐसा माना जा सकता है, कि दस्तावेजों में हेरफेर कर या फ़िर साक्ष्यों को नष्ट कर जांच प्रभावित भी की जा सकती है।

प्रवीण सोनी की जांच भी ठंडे बस्ते में

ठीक इसी तरह आशा कार्यकर्ता भर्ती घोटाले में प्रारंभिक तौर पर दोषी पाए गए प्रवीण सोनी की जांच को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।अभी कुछ  हफ्तों पहले की ही बात है कि उपरोक्त व्यक्ति को बाकायदा बिना जांच के क्लीन चिट देते हुए प्रमोशन कर DPM तक बनवाने की तैयारियां हो चुकी थी। जिसमे जिला कलेक्टर को भी अंधेरे में रखते हुए पूरा खेल खेला गया था।
लेकिन विकास की कलम के खुलासे के बाद प्रमोशन को निरस्त कर जिला कलेक्टर द्वारा जांच कर रिपोर्ट पेश किए जाने की बात कही गयी थी।
आदेश को आये हफ्तों बीत गए....लेकिन जांच का कोई भी अता-पता नहीं है।
लेकिन किसी ने ठीक ही कहा है....

जब सैयां भये कोतवाल...तो अब डर काहे का....

कलेक्टर के आदेशों को भी दिखा दिया ठेंगा...

गौरतलब हो कि आपसी साँठगाँठ कर पिछली बार भी मुख्य दस्तावेज दबा लिए गए। और संदिग्धों को ही प्रमोशन दिलवाले का आदेश पारित करवा लिया गया था।
लेकिन जैसे ही विकास की कलम ने जिला कलेक्टर भरत यादव को प्रवीण सोनी के  पूरे मामले के विषय मे जानकारी दी तो कलेक्टर महोदय ने अपना आदेश निरस्त कर जांच के आदेश पारित कर दिए थे।
लेकिन कई हफ्तों बीत जाने के बावजूत न तो जांच हुई ...और न ही दस्तावेज प्रस्तुत किये गए। और आज भी संन्दिग्ध व्यक्ति कलेक्टर के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए डंके की चोट पर अपना काम कर रहा है।

नोट-विकास की कलम अपने पाठकों से अनुरोध करती है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें..

ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें। साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए।

विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार




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