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गुरुवार, 23 जुलाई 2020

राज्यसभा में दिखे रामजोहार के... क्या है मायने...??? ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिग्विजय सिंह को किया नमस्कार

राज्यसभा में दिखे रामजोहार के...
क्या है मायने...???
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिग्विजय सिंह को किया नमस्कार 

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सियासी मंचों से एक दूसरे के खिलाफ ज़हर उगलने वाले जब भी एक दूसरे से मिलते है। तो उस समय आडंबर और संस्कारों का अनूठा संगम देखने को मिलता है।ऐसा ही अद्भुत नजारा इस बार मध्यप्रदेश की राज्यसभा में दिखाई दिया। जहां भाजपा के सांसद श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सदन के अंदर कांग्रेस के सांसद दिग्विजय सिंह को नमस्कार किया और दिग्विजय सिंह ने उतनी ही विनम्रता के साथ जवाब भी दिया। और अब इस दृश्य को देखने वाले अपनी अपनी सूझबूझ के हिसाब से अपने अपने मायने निकाल रहे है। कुछ इसे सियासी संस्कार से जोड़ते है तो कुछ इसे ओपचारिकता का आडंबर बता रहे है।

बुधवार को राज्यसभा में नए सांसदों का शपथ ग्रहण समारोह था. सिंधिया बीजेपी की ओर से राज्यसभा में सांसद चुने गए हैं. ऐसे में समारोह के दौरान उनका पुराने साथी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह से सामना हो गया.
दरअसल बुधवार को राज्यसभा में नए सांसदों का शपथ ग्रहण समारोह था. सिंधिया बीजेपी की ओर से राज्यसभा में सांसद चुने गए हैं. ऐसे में समारोह के दौरान उनका पुराने साथी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह से सामना हो गया. दोनों नेताओं की एक तस्वीर सामने आई है, जिसमें वो सदन में एक दूसरे के सामने हाथ जोड़कर एक दूसरे का अभिवादन कर रहे हैं. दोनों ने ही मास्क लगा रखा है. दोनों के अभिवादन में पिछले महीनों में आई कड़वाहट कहीं छिप गई है. 
सोशल मीडिया पर इस तस्वीर की काफी चर्चा हुई है. 

सिंधिया की फेहरिस्त में सबसे अव्वल दुश्मन है दिग्विजय सिंह 

राजनीतिक जानकारों की माने तो
प्रदेश की राजनीति में ज्योतिरादित्य सिंधिया का यदि कोई कट्टर शत्रु है तो वह दिग्विजय सिंह है। और वो भी खानदानी।
इतना तो सब जानते हैं कि वो दिग्विजय ही थे जिन के कारण मुख्यमंत्री कमलनाथ
और सिंधिया के बीच अक्सर दूरियां रही। दिग्गी राजा के कारण ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस पार्टी में हमेशा पीछे की तरफ धकेला गया। प्रभावशाली व्यक्तित्व होने के बावजूत प्रदेश अध्यक्ष का पद तो दूर की बात एक सरकारी बंगला तक नहीं दिया। दिग्विजय सिंह के कारण ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस पार्टी से ही निराश हो गए और उन्होंने भाजपा में जाने का फैसला किया।

ये राजनीति है जनाब ...यहां होता कुछ और है...और दिखता कुछ और

पूरे भारत के केंद्र में बसे मध्य प्रदेश की राजनीति में ना तो उत्तर के जातिवाद का असर पड़ता है ना ही दक्षिण के क्षेत्रवाद का। यहां का राजा गुस्से में आकर नए हेलीकॉप्टर खरीदता है, मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर को टक्कर मारकर तोड़ता नहीं है। बात चाहे शिवराज सिंह की हो, कमलनाथ की, दिग्विजय सिंह की या फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया की या इन सबके अलावा शेष किसी भी नेता की हो, सभी अपने अवसर को लपकने की राजनीति करते हैं। इसके लिए ना तो अपने विरोधी को नुकसान पहुंचाया जाता है और ना ही जनता को। इंदौर के कैलाश विजयवर्गीय भी पश्चिम बंगाल का पॉलिटिकल पैटर्न कोलकाता में छोड़कर इंदौर आते हैं।

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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार




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