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रविवार, 26 जुलाई 2020

कोरोना इफेक्ट.. पत्नी का पेटीकोट बना मास्क.. पति का बचाया 100 रु का चालान..

कोरोना इफेक्ट..
पत्नी का पेटीकोट बना मास्क..
पति का बचाया 100 रु का चालान..

कोरोना को लेकर कहीं जप तप व्रत चल रहे है। तो कहीं यज्ञ और अनुष्ठान....
लेकिन आमजन के मानस पटल पर कोरोना की दहशत एक अलग ही छाप छोड़ चुकी है।
लेकिन यह दहशत कोरोना संक्रमण को लेकर नहीं है.....
बल्कि इस दौरान सड़कों पर चल रहे चालानी कार्यवाही को लेकर है।
सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लगेगा लेकिन यह सच है...
आजकल लोगों को कोरोना से कम और उससे होने वाले चालान से ज्यादा डर लग रहा है....
यही कारण है कि जब एक दंपति को रास्ते मे पुलिस ने रोका तो उसने तत्काल पत्नी के पेटी कोट से मुँह ढाँक कर चालान से बचने की जुगत अपनाई...

कहाँ का है पूरा मामला...क्या है कहानी..

विकास की कलम अपने पाठकों को आज जो किस्सा बताने जा रही है। वह मजेदार तो है लेकिन सिस्टम के उपर एक करारा व्यंग भी है...
मामला मध्य प्रदेश के दमोह जिले का है।जहां टोटल लॉकडाउन के प्रतिबंधों के बीच पत्नी के साथ बाइक पर जा रहे युवक ने चालानी कार्यवाही से बचने के लिए, अपने मुंह पर पत्नी का पेटीकोट ही बांध लिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार
युवक बाइक से कहीं जा रहा था। और वह घर से निकलते समय मास्क बांधना भूल गया था। गाड़ी में बैठी पत्नी से पारिवारिक चर्चाओं के साथ मोटरसाइकिल भी सरपट दौड़ रही थी।
तभी रास्ते में बांदकपुर पहुंचते ही उन्हें पुलिस की चेक पोस्ट दिखाई दी। चूंकि पति ने मास्क नही लागये था।लिहाजा
 पत्नी ने सौ रुपये के चालान से बचने के लिए अपने साथ रखे बेग से साड़ी का पेटीकोट निकाला और पति के मुंह पर बांध दिया।

चेक पोस्ट में लगे..हंसी के ठहाके...

पति पत्नी के इस कारनामे को देख
चेकिंग करने वाले पुलिसकर्मी भी अपनी हसीं नहीं रोक पाये। इस नज़ारे को जिसने भी देखा या सुना वो पेट पकड़कर हसने पर मजबूर हो गया।इतना ही नहीं घटना के घंटो बाद भी उनकी हंसी रोके नही रुक रही थी।
जिसका वीडियो अब जमकर वायरल हो रहा है।

पति ने कहा..पेटीकोट भी कोरोना से बचाता है..
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व्यक्ति का कहना था कि मास्क नहीं था और चालान से बचना भी था तो यह बांध लिया। फिलहाल मास्क से बढ़कर तो है ही, तो मास्क के स्थान पर पत्नी का पेटीकोट भी कोरोना से बचाता है और यह सुरक्षित भी है। भले ही यह व्यक्ति हंसी का पात्र जरूर बना लेकिन पुलिस ने उसे जाने दिया और उसकी पत्नी की सूझ-बूझ पर सभी तारीफ कर रहे थे।

क्या घटना वाकई हंसी के लायक है...

घटना तो घट गई। चालान से बच भी गए।लेकिन एक सवाल जहां में अभी भी ताज़ा है। क्या 10 रुपये के मास्क के लिए 100 रुपये का चालान लाज़मी है। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि किसी समाजसेवी संस्था से बड़ी संख्या में निशुल्क मास्क लेकर चेक पोस्ट पर तैनात अधिकारियों को दे दिए जाएं।और फिर बिना मास्क के व्यकित को 10 रुपये लेकर मास्क पहनाकर उससे नियमों का पालन करवाया जाए।
हकीकत तो यह है कि कोरोना संक्रमण ने लोगों की जेबों पर सबसे गहरा असर डाला है। आज 100 रुपये भी बहुत कीमती लगने लगे है।
यही कारण है कि चंद पैसे बचाने की जुगत में ऐसे नज़ारे देखने को मिल रहे है।

बहरहाल आप ठहाके लगाकर हंसिये और घटना का लुत्फ उठाइये लेकिन इस ख़बर को पढ़ने के बाद विकास की कलम के इस सुझाव पर सोचिएगा जरूर..

आखिर कोरोना से ज्यादा चालान का डर क्यों..???

नोट-विकास की कलम अपने पाठकों से अनुरोध करती है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें..

ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें। साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए।

विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार

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