मुर्दों को जिंदा कर देता है.. नगर निगम जबलपुर.. जानिए क्या है..?? मामला.. - VIKAS KI KALAM,Breaking news jabalpur,news updates,hindi news,daily news,विकास,कलम,ख़बर,समाचार,blog

Breaking

मुर्दों को जिंदा कर देता है.. नगर निगम जबलपुर.. जानिए क्या है..?? मामला..

मुर्दों को जिंदा कर देता है..
नगर निगम जबलपुर..
जानिए क्या है..?? मामला..

सरकारी काम मे लापरवाही बरती जाना आम बात है। लेकिन लापरवाहियों की भी एक सीमा होती है। जैसे नाम का गलत लिख जाना....तारीख में गड़बड़ी...वगैरह... वगैरह...
लेकिन आज हम एक ऐसे किस्से की बात करने जा रहे है। जिसमे जिम्मेदार कुर्सी पर बैठे अधिकारी की हद दर्जे की लापरवाही का खुलासा हुआ है।यहाँ इन अधिकारियों ने एक मृत व्यकित के परिजनों को उसी का जन्म प्रमाण-पत्र थमाते हुए शासकीय कार्यों के प्रति अपनी जिम्मेदारी की मिसाल पेश की है।

क्या है पूरा मामला..

यह पूरा कारनामा मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले का है। जहां पर नगर निगम मुख्यालय ने 27 जून 2020 को मृत हुए हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता का मृत्यु प्रमाण जारी करने  की जगह जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिया। मृतक के परिजनों
 ने जब यह प्रमाण पत्र देखा तो वे भी चौन्क गए। आखिरकार इतनी बड़ी लापरवाही हो कैसे सकती है।
लेकिन मृत्यु की जगह जन्म प्रमाण पत्र जारी करने का यह कारनामा तीनपत्ती नगर निगम मुख्यालय 13 नंबर जोन कार्यालय का है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री ने दी जानकारी

प्राप्त जानकारी के अनुसार
वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री गीता शरद तिवारी के राइट टाउन निवासी रिश्तेदार सत्यनारायण मिश्र जी का 82 वर्ष की उम्र में 27 जून को निधन हो गया था। उनका अंतिम संस्कार रानीताल मुक्तिधाम में किया गया। अंत्येष्ठि के बाद मुक्तिधाम से निधन सर्टिफिकेट भी दिया गया। और इसी के आधार पर नगर निगम से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।

नगर निगम के 13 नंबर जोन कार्यालय से सत्यनारायाण मिश्र के मृत्यु प्रमाण पत्र की जगह जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। जिसमें बकायदा उपरजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु के हस्ताक्षर व सील साइन किए गए हैं। स्व.सत्यनारायण मिश्र हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता थे।


इसके पहले भी सामने आ चुके फर्जीवाड़ा

जन्म मृत्यु शाखा में फर्जीवाड़ा किये जाने की लंबी समय से शिकायतें आ रही थी। और यह कोई पहला मामला नहीं है। बल्कि ऐसे कई मामले है..जिनमे कई बार जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के मामले सामने आ चुके हैं।

इस पूरे मामले में नगर निगम आयुक्त ने बताया कि यह एक बड़ी लापरवाही है। सबसे पहले जारी किए गए गलत प्रमाण पत्र में सुधार कराया जाएगा।साथ ही
मृत्यु प्रमाण की जगह जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
अनूप कुमार सिंह,निगमायुक्त

जिम्मेदार बता रहे है तकनीकी त्रुटि

13 नंबर जोन में पदस्थ अधिकारियों की माने तो जन्म की जगह मृत्यु प्रमाण पत्र का फॉर्मेट आ जाना एक तकनीकी त्रुटि वश हुआ है। अधिकारियों की माने तो अक्सर हो रही लिंक फेलियर की समस्या के चलते यह गलती हुई ही। अगर किसी भी प्रमाण पत्र जारी करने के  दौरान लिंक फैल हो जाये । तो सॉफ्टवेयर स्वतः ही पूरी प्रोसेस को पिछले फार्मेट से जोड़कर
प्रोसेस को पूरा करता है। आवेदक के मृत्यु प्रमाण पत्र के दौरान भी ऐसी ही स्थिति के बनने की बात कही जा रही है।

नोट-विकास की कलम अपने पाठकों से अनुरोध करती है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें..

ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें। साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए।

विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार