अब संवरेगी-चौसठ योगिनी मंदिर की तस्वीर...जाने कैसे... - VIKAS KI KALAM,Breaking news jabalpur,news updates,hindi news,daily news,विकास,कलम,ख़बर,समाचार,blog

Breaking

अब संवरेगी-चौसठ योगिनी मंदिर की तस्वीर...जाने कैसे...

अब संवरेगी-चौसठ योगिनी मंदिर
की तस्वीर...जाने कैसे...

संस्कारधानी जबलपुर अपने भीतर इतिहास की कई अमूल्य धरोहर संजोए हुए है। जिसमे संगमरमररीय वादियों के बीच बना कलचुरी कालीन चौसठ योगिनी मंदिर अपनी विशेष पहचान रखता है।चौंसठ योगिनी मंदिर जबलपुर स्थित एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। मंदिर का स्थापत्य बड़ा ही आकर्षक है। यहाँ देवी दुर्गा की 64 अनुषंगिकों की प्रतिमाएँ स्थापित हैं।

शहर की शान है..चौसठ योगिनी मंदिर..

जबलपुर का 'चौंसठ योगिनी मंदिर' सुप्रसिद्ध स्थल भेड़ाघाट व धुआंधार जलप्रपात के नजदीक एक ऊंची पहाड़ी के शिखर पर स्थापित है। यहि कारण है कि पहाड़ी के शिखर पर खड़े होकर पर्यटक यहां से काफ़ी बड़े भू-भाग के सौंदर्य एवं बलखाती नर्मदा नदी को घंटों निहारते है। चौंसठ योगिनी मंदिर को दसवीं शताब्दी में कलचुरी साम्राज्य के शासकों ने मां दुर्गा के रूप में स्थापित किया था। 

लोगों का मानना है कि यह स्थली महर्षि भृगु की जन्मस्थली है, जहां उनके प्रताप से प्रभावित होकर तत्कालीन कलचुरी साम्राज्य के शासकों ने इस मंदिर का निर्माण करवाया।इस मंदिर में देवी दुर्गा की 64 अनुषंगिकों (योगनियों)की प्रतिमा है। इस मंदिर की विषेशता इसके बीच में स्थापित भागवान शिव की प्रतिमा है, जो कि देवियों की प्रतिमा से घिरी हुई है। इस मंदिर का निर्माण सन 1000 के आसपास कलचुरी वंश के शासकों ने करवाया था।

करोड़ों की लागत से होगा जीर्णोद्धार

बीते दिन हुई राष्ट्रीय सांस्कृतिक निधि की 26वी कार्यकारी समिति की बैठक में,जबलपुर के चौसठ योगिनी मंदिर को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।बैठक में यह तय हुआ की संस्कृति मंत्रालय द्वारा 54.34 करोड़ की लागत से जबलपुर, भेड़ाघाट के चौसठ योगिनी मंदिर के संरक्षण और जीर्णोद्धार का कार्य करवाया जाएगा।  

बैठक में ये रहे उपस्थित

संस्कृति मंत्रालय के सचिव आनंद कुमार की अध्यक्षता में इस बैठक का आयोजन किया गया। इसमें संस्कृति मंत्रालय की सह सचिव सुजाक्ता मुद्गल, एएसआई की महानिदेशक वी विद्यावती, डॉ. भरत शर्मा, आइटीसी निदेशक नकुल आनंद, रिटायर आईएएस सुशीलचंद्र त्रिपाठी, एसएम गर्ग, फिक्की महासचिव दिलीप चेनॉय, शिपिंग मंत्रालय के निदेशक डॉ. डीके रॉय, निदेशक एनआरएलसी, आलमबजार मठ के सचिव स्वामी सरदातमनंदा, विनोद फोतेदार व राष्ट्रीय संस्कृति निधि के सदस्य सचिव अजय यादव व अन्य सदस्य मौजूद थे।

नोट-विकास की कलम अपने पाठकों से अनुरोध करती है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें..

ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें। साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए।


विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार