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चकाचौंध सोने की... चमक हुई धुंधली... नहीं रहे...गोल्डन बाबा..

चकाचौंध सोने की...
चमक हुई धुंधली...
नहीं रहे...गोल्डन बाबा..

गाजियाबाद(Uttar Pradesh). पूरे देश में गोल्डन बाबा के नाम से मशहूर संत सुधीर कुमार मक्कड़ का लम्बी बीमारी के बाद मंगलवार देर रात दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। वह लम्बे समय से बीमार चल रहे थे और एम्स में उनका इलाज चल रहा था। गोल्डन बाबा के निधन के बाद से उनके भक्तों में शोक की लहर दौड़ गई। गोल्डन बाबा का पूरा जीवन काफी चर्चा में रहा है। उन पर कई आपराधिक मामले में भी दर्ज थे।

मूलतः गाजियाबाद के रहवासी थे..गोल्डन बाबा..

पूर्वी दिल्ली स्थित गांधी नगर के रहने वाले सुधीर कुमार मक्कड़ उर्फ गोल्डन बाबा काफी चर्चित रहे हैं। वह मूल रूप से यूपी के गाजियाबाद के रहने वाले थे। बताया जाता है कि वह दिल्ली में रहकर कपड़े का व्यवसाय करते थे। गांधी नगर के अशोक गली में गोल्डन बाबा का आश्रम है।

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कैसे बने सुधीर मक्कड़...गोल्डन बाबा..

हरिद्वार में कई अखाड़ों से संबंधित रहे गोल्डन बाबा की काफी कहानियां प्रचलित हैं। कहा जाता है कि गोल्डन बाबा पहले कपड़ों के व्यापारी थे लेकिन फिर उन्हें लगा कि उन्हें अपने पापों का प्रायश्चित करना चाहिए। इसलिए सुधीर मक्कड़ एक आम इंसान से गोल्डन बाबा बन गए।उन्होंने संन्यास का रास्ता चुना, जिसके कारण वे आज संत समाज की सेवा कर रहे हैं। गोल्डन बाबा को 2013 में हरिद्वार में अपने गुरु चंदन गिरी जी महाराज ने सबसे पहले उन्हें ये नाम दिया और उन्हें गुरुदीक्षा दी।

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आखिर क्यों कहा जाता है..गोल्डन बाबा

उन्हें गोल्डन बाबा कहे जाने के पीछे भी खास वजह है। सुधीर मक्कड़ को सोना पहनने का बहुत शौक था, इसलिए वह अपने शरीर पर काफी मात्रा में सोना पहनते थे। उनसे जुड़े लोग बताते हैं कि सुधीर, सोने को अपना देवता मानते थे इसलिए वह हमेशा सोना पहने रहते थे।
उनके पास साढ़े तीन किलो वजन की सोने की एक जैकेट है। इसके अलावा 27 लाख रुपए की हीरे से जड़ी घड़ी, बाबा के दसों उंगलियों में सोने की अंगूठी, बाजूबंद, सोने का लॉकेट है।
इसी वजह से लोग उन्हें गोल्डन बाबा कहने लगे।

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सुधीर कुमार मक्कड़ उर्फ गोल्डन बाबा को 1972 से ही सोना पहनना पसंद था। बताया जाता है, कि वह सोने को अपना ईष्ट देवता मानते थे। बाबा हमेशा कई किलो सोना पहने रहते हैं। बाबा की दसों उंगलियों में सोने की अंगूठी, बाजुबंद, सोना का लॉकेट है। बाबा की सुरक्षा में हमेशा 25-30 गार्ड तैनात रहते थे।

अपराध जगत में भी रहा बोलबाला..

गोल्डन बाबा पूर्वी दिल्ली के पुराने हिस्ट्रीशीटर थे। हिस्ट्रीशीट का मतलब थाने में खोला गया बाबा के नाम का वो बही-खाता जिसमें उनके तमाम छोटे-बड़े गुनाहों का पूरा हिसाब-किताब दर्ज हैं। इन मुकदमों में अपहरण, फिरौती, जबरन वसूली, मारपीट, जान से मारने की धमकी जैसे तमाम छोटे-बड़े गुनाह शामिल हैं।

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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार