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शनिवार, 4 जुलाई 2020

मुर्दों को भी नहीं बख्श रहे... भू-माफिया.. 2 करोड़ में बिका 16 एकड़ का तालाब

मुर्दों को भी नहीं बख्श रहे...
भू-माफिया..
2 करोड़ में बिका 16 एकड़ का तालाब

भू-माफिया जो न करें वो कम है। आपने अक्सर सुना होगा कि फलाने की जमीन पर किसी रसूकदार भू-माफिया ने जबरन कब्जा कर लिया। और जीते जी उसी की आंख के सामने उसकी जमीन किसी और को बेच दी। अगर पुलिस थानों के रोजननामचों की बात की जाय तो ...भूमाफियाओं के कारनामो की फेहरिस्त काफी लंबी है। लेकिन आज हम उस अजीबोगरीब कारनामे की बात करेंगे जहां 200 सालों से मृत एक महिला को अचानक जिंदा कराते हुए...उसके 16 एकड़ के तालाब को 2 करोड़ रुपयों में बेच दिया गया।

कहाँ का है पूरा मामला...

यह अजीबोगरीब मामला मध्यप्रदेश के संस्कार-धानी कहे जाने वाले जिले जबलपुर की पनागर तहसील का है।
पनागर तहसील की ग्राम पंचायत बरखेड़ा में भू-माफिया ने सांठगांठ करते हुए एक अजीब कारनामा कर दिया है। भूमाफिया ने 200 साल पहले मर चुकी, महिला के नाम का 16 एकड़ का तालाब, दो करोड़ रुपए में बेच दिया । आश्चर्य की बात यह है, कि तालाब की रजिस्ट्री भी हो चुकी है।

दो दशक पहले ही मर चुकी थी भू-स्वामिनी...

गाँव वालों की माने तो यह तालाब हंसी बाई का था। जो तकरीबन 200 साल पहले ही मर चुकी थी। पुराने बुजुर्गों की माने तो...हंसा बाई अकेले रह करता थी
हंशी बाई का कोई उत्तराधिकारी नहीं था ।बीते कई पीढ़ियों से गाव वाले हंसा बाई के इस तालाब का उपयोग कर निस्तार कर रहे थे। लेकिन फिर अचानक किसी भू माफिया की नज़र इस तालाब में पड़ गयी।

बिना अधिकारियों की सांठगांठ के रजिस्ट्री होना नामुमकिन

भूमाफियाओं ने कुछ अधिकारियों से साठगाँठ कर फर्जी तरीके से रजिस्ट्री तो करवा ली पर मामले को तूल पकड़ता देख सभी अधिकारी अपना पल्ला झाड़ने में लगे हुए है। उनके अनुसार उन्हें इस प्रकरण के विषय मे कोई जानकारी नहीं है। अब सवाल यह पैदा होता है,की यदि किसी भी भूखंड की रजिस्ट्री कराई जाती है तो वह कई विभागीय अधिकारियों की टेबिल से होकर गुजरती है। तो ऐसे में ये कैसे संभव हो सकता है कि रजिस्ट्री हो जाये और अधिकारियों को भनक भी न लगे।

कैसे हुआ पूरे मामले का खुलासा

कहानी को पूरा करते हुए जैसे तैसे भू माफिया ने तालाब की रजिस्ट्री तो करवा ली लेकिन जैसे ही मामला नामांतरण के लिए तहसील कार्यालय पहुंचा तो रायता बगर गया। जानकारी के अनुसार जब उक्त तालाब के नामांतरण के लिए मामला  पनागर तहसील कार्यालय पहुंचा । तो लोगों को इस गड़बड़झाले की भनक लगी  और मामले ने तूल पकड़ लिया।

सैकड़ों की संख्या में पहुंचे गुस्साए ग्रामीण

गाँव के तालाब की रजिस्ट्री होने की बात जंगल की आग की तरह चारों ओर फैल गयी। नतीज़तन गांव के तालाब की रजिस्ट्री हो जाने की खबर मिलने के बाद गुस्साए गर्मिन सैकड़ों की संख्या में तहसील कार्यालय पहुंच गए। गाँव वालों ने पहले तो भृष्ट अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बाद में बड़े अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद गाँववालों का गुस्सा शांत हुआ।

ग्रामीणों ने आवेदन देकर..दोषियों पर FIR और रजिस्ट्री रद्द करने की मांग की

 तहसील कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि, तालाब हंसा बाई का था। हंसा बाई का कोई उत्तराधिकारी नहीं था । इसलिए तालाब के नाम पर कभी फौती ही नहीं उठी। चार पीढ़ियों के गांव के लोग ही तालाब का उपयोग कर रहे हैं। भूमाफिया ने गांव के तालाब का सौदा दो करोड़ में करते हुए रजिस्ट्री भी करा दी। रजिस्ट्री में किसी महिला को हंशी बाई का उत्तराधिकारी के रूप में खड़ा किया गया था। ग्रामीणों ने तहसील कार्यालय में आवेदन दिया है।साथ ही संपूर्ण मामले की जांच करते हुए, आरोपियों पर f.i.r. दर्ज करने तथा रजिस्ट्री को रद्द करने की मांग की है।

बहरहाल मामले के तूल पकड़ने के बाद जिम्मेदारों ने पूरे प्रकरण की विशेष जांच किये जाने की बात की है। लेकिन इतने बड़े कारनामे को अंजाम देने के पीछे कई अधिकारियों की संलिप्तता से भी इंकार नहीं किया जा सकता। अब देखना ये होगा कि गाँववालों को दिए अस्वासन के साथ ही मामले को ठंडे बस्ते में डाला जाएगा या फिर वाकई जांच करवाकर दोषियों को उनके किये की सजा मिलेगी



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ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें। साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए।

विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार


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