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खोखली साबित हो रही 108... भले निकले - मरीज का दम... समय पर नहीं - पहुचेंगे हम.

खोखली साबित हो रही 108
भले निकले - मरीज का दम
समय पर नहीं - पहुचेंगे हम..

लगभग तीन साल पहले प्रदेशवासियों के लिए आपातकाल में एकदम से एम्बुलेंस मिलना काफी मुश्किल हो जाता था, और तो और फ्री सेवा में मिलना तो लोगों के लिए केवल एक सपना ही था, लेकिन जब से एम्बुलेंस सेवा 108 सेवा ने इस सपने को हकीकत में बदल दिया है, तब से प्रदेश के लोगों को काफी राहत मिली है।लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया। इस सेवा को भी अफसरशाही की दीमक ने खोखला कर दिया। अब आलम ये है कि घंटों बीत जाने के बाद भी मदद नही पहुँचती। कई बार तो सड़क दुघर्टना की सूचना मिलने के 2 घंटे बाद 108 एम्बुलेंस पहुंची...लेकिन तब तक पीढित के प्राण निकल चुके थे। ऐसे एक दो नहीं बल्कि कई किस्से है...जहाँ 108 एम्बुलेंस की सेवा ने जनता को निराश किया है।

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जबलपुर में घटा ताज़ा किस्सा....

ताज़ा मामला जबलपुर जिले के माढ़ोताल  थानांतर्गत सूखा गांव के पास देखने को मिला है । जहां पर लोडिंग वाहन 407 एवं जबलपुर से आ रही मारुति वैन में जोरदार टक्कर हो गई जिसमें सवार एक युवक घायल हो गया।  घायल एक घंटे तक घटनास्थल पर ही  घायल पड़ा रहा ।
प्रत्यक्षदर्शियों ने एंबुलेंस  को  फोन लगाकर बुलाया  लेकिन 1 घंटे तक एंबुलेंस नहीं पहुंची ।

डायल 100 में अस्पताल पहुंचा घायल

दुर्घटना के घंटों बीत जाने के बाद भी 108 एम्बुलेंस का जब अता-पता नही लगा तो कुछ लोगों ने निकटवर्ती थाने में दुर्घटना की सूचना दी। सूचना के करीब 10 मिनट के भीतर डायल 100 मौके पर पहुंची।
 घटना स्थल का मुआयना कर पुलिस ने ही डायल हंड्रेड पर  घायल को बैठा कर अस्पताल पहुंचाया।

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घटना के बाद से राहगीरों में आक्रोश

राहगीरों का कहना है कि सड़क हादसे की सुचना दिए एक घंटे से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद 108 एम्बुलेंस का न पहुचने बेहद निंदनीय है। ऐसे में घायल घटनास्थल पर तड़प तड़प कर यदि दम तोड़ देता है तो इसमें किसकी जिम्मेदारी होगी।
ऐसे में यह कहना गलत ना होगा कि सरकार तो अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं आम जनता के लिए मुहैया करा रही है। लेकिन
अक्सर इसका सही लाभ आम जनता तक नही पहुंच पाता।

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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार