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शनिवार, 4 जुलाई 2020

शहर में खुलेआम लूट... आवश्यक वस्तुओं में नियम कानून.. मदिरा व्यवसाय में पूरी छूट... जबलपुर चेंबर ऑफ कॉमर्स से जताई आपत्ति

शहर में खुलेआम लूट
आवश्यक वस्तुओं में नियम कानून
मदिरा व्यवसाय में पूरी छूट...
जबलपुर चेंबर ऑफ कॉमर्स से जताई आपत्ति

न जाने इस शहर को किसकी नज़र लग गयी है। जो शासन-प्रशासन की नाक के नीचे खुले आम लूट का धंधा जारी है। लेकिन जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे है...
बात अगर मध्यप्रदेश की कीजाये तो..इन दिनों पूरी सरकार शराब कारोबारियों के सामने नतमस्तक सी नज़र आ रही है। उन्हें सर-आंखों पर बिठाते हुए उनके हर नखरों को सहा जा रहा है। और बहाना है राजस्व का.... अब सवाल यह है कि जिन राज्यों में शराब पूरी तरह से प्रतिबंधित है...क्या वो राज्य...भूखे मर रहे है....
खैर....माना कि शराब कारोबार से एक अच्छी खासी राजस्व की प्राप्ति होती है।पर क्या जनता और उनके अधिकारों का हनन करना जायज है। जबलपुर शहर की बात करें तो यहां सारे नियम कानून ताक पर रखकर...खुले आम लूट का कारोबार जारी है।
ना कोई रेट लिस्ट...न ही नियम कानून...लेना हो लो...वरना रस्ता नापों...

जबलपुर चेम्बर ने आपत्ति जताई,शराब कीमतों पर नियंत्रण रखे शासन-प्रशासन।

शराब की बेलगाम कीमतों पर जहाँ शासन व प्रशासन अंकुश लगाने विफल रहा है वहीं शराब कारोबारियों के द्वारा अधिकतम विक्रय मूल्य से अधिक दरों पर शराब विक्रय करने से न केवल कानून का उल्लंघन हो रहा है बल्कि ग्राहकों का भी दिन दहाडे शोषण हो रहा है, यह कथन है जबलपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री का।

ख़बर ये भी...शहर के हर गली कूचे में सक्रिय है...शराब माफिया....

विकास की कलम ने की जबलपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारियों से मुलाकात..

 विकास की कलम से चर्चा के दौरान जबलपुर चेम्बर के चेयरमैन प्रेम दुबे ने बताया कि ग्राहकों की जानकारी व अधिकारों को ध्यान में रखते हुए हर वस्तु या सेवा का निश्चित मूल्य कम्पनियों द्वारा सरकार की जानकारी के बाद निर्धारित किया जाता है।
जिसके तहत् अधिकतम विक्रय मूल्य या एम आर पी से अधिक मूल्य पर विक्रय करना गैरकानूनी माना जाता है। इस नियम से बाजार में अनुशासन रहता है तथा ग्राहकों को किसी भी उत्पाद के मूल्य की जानकारी रहती है। एमआरपी हर पैक्ड उत्पाद पर इंगित की जाती है ताकि दुकानदार व ग्राहकों के बीच अनिश्चितता न रहे लेकिन देशी-विदेशी मदिरा के क्षेत्र में एमआरपी प्रावधानों का खुले आम उल्लघन हो रहा है।

जरूर पढ़ें...शहर में सबकुछ बन्द.. लेकिन शराब दुकान खुलना जरूरी है..

कड़ी कार्यवाही करे सरकार-ताकि शहर में बंद हो लूट-खसौट

वहीं विकास की कलम से मुलाकात के दौरान जबलपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हिमाँशु खरे ने बताया कि मदिरा छोड़कर किसी भी अन्य उत्पाद जिस पर एम आर पी दर्ज होती है उस पर यदि दुकानदार गलती से भी एमआरपी से अधिक मूल्य लेता है तो ग्राहक की शिकायत पर नाप-तौल विभाग, जी एस टी व अन्य विभाग उस दुकानदार पर कड़ी कार्यवाही करते हैं।
उन्होंने बताया कि मदिरा की दुकानों पर ग्राहकों को विक्रय का बिल भी नही दिया जाता है तथा एमआरपी से अधिक वसूला जाता है जो कि असंवैधानिक एवं अपराध की श्रेणी में आता है। हिमाँशु खरे ने बताया कि आबकारी विभाग के संरक्षण में मदिरा के व्यवसायी अराजक माहौल निर्मित कर रहे हैं, जिस पर अकुश लगाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि 2019-20 के वित्तीय वर्ष में मध्य प्रदेश में 1130 लाख प्रूफ लीटर देशी मदिरा एवं 1683 लाख प्रूफ लीटर विदेशी मदिरा की खपत हुई है जिस पर मदिरा कारोबारियों ने एमआरपी से अधिक दर पर विक्रय कर ग्राहकों को लूटा है।

जबलपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स ने जिला कलेक्टर को भेजा पत्र...

इस अवसर पर जबलपुर चेम्बर सचिव नरिंदर पाधे रजनीश त्रिवेदी, घनश्याम गुप्ता, अजय बख्तावर, मनोज सेठ, अमरप्रीत छाबड़ा, शशिकांत पांडेय आदि ने बताया कि जबलपुर चेम्बर द्वारा मदिरा के व्यवसाय में व्याप्त अराजकता को लेकर जबलपुर कलेक्टर को पत्र दिया दिया गया है। जिस पर ग्राहकों को विक्रय का बिल देने व एमआरपी से अधिक विक्रय न करने देने माँग की गयी है।

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उत्तर प्रदेश में कानून बन सकता है तो एमपी में क्यों नही....

जबलपुर चेम्बर के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने एमआरपी यानि अधिकतम विक्रय मूल्य से अधिक दर पर मदिरा विक्रय की पहली शिकायत पर 75000 रुपये का जुर्माना, द्वितीय शिकायत पर डेढ लाख रुपये एवं तृतीय शिकायत पर उक्त ठेका दुकान का लायसेंस निरस्त करने का कानून बनाया है। मध्य प्रदेश में भी इस तरह के कानून एवं प्रावधान लाने की आवश्यकता है।

बंद हो ग्राहकों का शोषण -वरना न्यायालय की लेंगे शरण...

जबलपुर चेम्बर ने प्रशासन से मांग की है कि मदिरा ठेका दुकानों के द्वारा ग्राहकों का शोषण बंद होना चाहिए। यदि शासन ने इस ओर कोई सार्थक पहल नहीं की तो जबलपुर चेम्बर न्यायालय की शरण में जाने विवश होगा।

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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार

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