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गुरुवार, 25 जून 2020

मृग की तृष्णा... घंटों सम्मोहित होकर निहारते रहे लोग

मृग की तृष्णा...
घंटों सम्मोहित होकर निहारते रहे लोग

त्रेता युग से लेकर कलयुग तक मृग की तृष्णा
अपना कमाल दिखाती आ रही है। फिर चाहे वह देव हो... दानव हो... या मानव सभी इसके आकर्षण का शिकार हो ही जाते है। और अपनी सुधबुध खोकर अनायास ही मृग की ओर आकर्षित हो जाते है। मनुष्य की यही तृष्णा(प्यास/आस) मृग को पाने की लालसा करने लगती है।

कहाँ का है पूरा मामला..

मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले से सटे बरगी तहसील के ग्राम मंगेला सुकरी के ग्रामीण जन एक ऐसे ही मृग के सौंदर्य को देखकर इतने बेसुध हो गए कि उन्होंने मृग को बंधक बनाकर उसके चारों ओर जमावड़ा लगा लिया। और घंटो उसे निहारते रहे।

कैसे आया चीतल (मृग) गाँव मे..??

वैसे तो जानवर अपनी सरहद को भली भांति पहचानता है। और वह कभी भी भीड़भाड़ या इंसानी रहवासी इलाकों में नही जाता। लेकित प्राप्त जानकारी के अनुसार यह अनुमान लगाया जा रहा है। कि एक नर चीतल जब उत्तर बरेली पठार के जंगलों में विचरण कर रहा था तभी अचानक जंगली कुत्तों की फौज ने आक्रमण किया होगा... भगदड़ के दौरान अकेले पड जाने के चलते नर चीतल ने रहवासी इलाके का रुख किया होगा।

चीतल के घुसने पर गाँव मे मचा हड़कंप

गाँव वालों की माने तो कुत्तों के खदेड़े जाने पर अपनी जान बचाकर भागते हुए चीतल ने गांव का रुख किया। गाँव मे घुसते ही वह सुरक्षित जगह की तलाश में इधर उधर कूद फांद करने लगा। प्राणी विशेषग्यों की माने तो चीतल(मृग) इंसानों को देख कर घबरा गया होगा। और इसी घबराहट के दौरान चीतल (मृग) ने गांव के अंदर काफी उत्पात मचाया। जिससे लोगों के घरों में काफी टूट-फूट हुई है।

काफी मसक्कत के बाद ग्रामीणों ने चीतल को किया काबू

घंटों चले उत्पात के बाद आखिरकार ग्राम वासियों ने नर चीतल (मृग) को सुरक्षित पकड़ लिया। और फिर उसके बाद ग्रामीण जनों ने इस पूरे मसले की सूचना फोन करके वन विभाग के डिप्टी रेंजर ओमप्रकाश शुक्ला को दी।

सूचना पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों ने किया मुआयना

ग्रामीणों की सूचना पर त्वरित कारवाही करते हुए डिप्टी रेंजर ने बरेली पठार बीट गार्ड शुभम सोनी एवम मंगेला सुकरी बीट गार्ड अनिल सेंगर  को मौके में भेजा। जिन्होंने मोंके में पहुंचकर पूर्ण घटना का मुआयना किया। जिसके बाद उन्होंने ग्रामीणजनो की सहायता से नर चीतल को जंगल में सुरक्षित छोड़ा। वन विभाग के अधिकारियों ने  ग्रामीणजनों के इस साहसिय सहयोग की सरायना की एवम सम्पूर्ण घटना का पंचनामा बनाया ।

घंटों चला सेल्फ़ी का दौर

नर चीतल (मृग)को सुरक्षित पकड़ने के बाद गाँव के युवा बुजुर्ग और बच्चे घंटों नर चीतल (मृग)को निहारते रहे। और मृग के सौंदर्य के वशीभूत होकर सम्मोहित से रह गए। इस दौरान युवाओ में सेल्फी का दौर भी काफी जमकर चला । हर एक व्यकित अनुपम सौदर्य से भरे इस मृग के साथ बिताए गए पल को मोबाइल कैमरे में कैद करने आतुर था। बहरहाल गाँववालों ने नर चीतल (मृग)को तो जंगल मे छोड़ दिया। लेकिन उसका आभासी प्रतिबिंब (सेल्फ़ी)लंबे समय तक इस नर चीतल (मृग) के होने का अहसास कराती रहेगी।

नोट-मृग तृष्णा एक आभासी परिकल्पना होती है। लेकिन यहां मृग की तृष्णा का जिक्र किया जा रहा है। अर्थात मृग को पाने की आस या यूं कहें मृग की छबि को अपनी यादों में संजोने की चाहत। यही कारण है कि इस कहानी का शीर्षक मृग की तृष्णा दिया गया है। आशा करते है कि हमारे समर्पित पाठक गण संपादक की इस परिकल्पना का सम्मान करेंगे।

नोट-विकास की कलम अपने पाठकों से अनुरोध करती है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें..

ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें। साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए।

विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार

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