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आखिर..कर क्या रहा है ?? आबकारी विभाग.. दुकान से लेकर..गली-कूचों तक सक्रिय है..शराब माफिया...


आखिर..कर क्या रहा है ?? आबकारी विभाग..
दुकान से लेकर..गली-कूचों तक
सक्रिय है..शराब माफिया...

लॉक डाउन की सख्ती से लेकर आज दिनांक तक जहां नजर डाली जाए वहां शराब माफिया सक्रिय हैं । जानकारों की माने तो शायद ही ऐसी कोई गली या कूचा होगा। जहां पर शराब माफिया के गुर्गे सक्रिय ना हो। अब सवाल यह पैदा होता है कि इतनी सख्ती होने के बावजूद आखिरकार किसके इशारे पर शहर में शराब की नदियां बहाई जा रही है।
शहर में कोरोना क्या आया..अवैध शराब बेचने वालों के लिए मानो भगवान खुद अवतार लेकर आ गये। संक्रमण को लेकर जितनी सख्ती थी। उतनी ही शराब की डिमांड....
सिर्फ लॉक डाउन की ही बात करें तो शहर के तमाम थाना क्षेत्रों में सैकड़ों अवैध शराब के केस पकड़े गए। लेकिन हर बार मुख्य सरगना पुलिस की पकड़ से दूर ही रहा। जिसने कुछ दिनों बाद ठीहा और काम का अंदाज बदलकर फिर से काम शुरू कर दिया।

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कागजों में छोड़ा ठेका..हक़ीक़त कुछ और ही...

गौरलतब हो कि अभी कुछ दिनों पूर्व ही शराब ठेकेदारों की मांग को लेकर सरकार और शराब ठेकेदारों के बीच सामंजस्य नही बन पाया। लिहाजा शराब ठेकेदारों ने दुकाने सरेंडर कर दी। प्रशासन का फैसला आया कि आबकारी विभाग ही दुकानों का संचालन करेगा। इस फैसले के बाद जनता ने सोचा कि
 अब...ओवर रेटिंग और कालाबाजारी पर रोक लगेगी...
लेकिन मुख्य खेल तो अब शुरू हुआ .......

कहने को तो आबकारी विभाग शराब दुकानों का संचालन कर रहा है...लेकिन विकास की कलम ने जब ग्राउंड जीरो से इसका जायजा लिया तो पाया कि...
हर दुकानों में पहले से ही शराब ठेकेदार के गुर्गे सक्रिय है। जहां विभाग के लोगों के सामने ही...बिना रेट लिस्ट लगाए...डंके की चोट पर...65 का सामान 90-100 रुपयों में बेचा जा रहा है।
साथ ही नियमों को ताक पर रखकर शराब की खेप भी चहेतों तक पहुचाने की बात सामने आई है।

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प्रतिदिन कमा रहे लाखों...कहाँ जाता है पैसा...

एक सर्वे की बात करें तो शहर में 66 शराब दुकान संचालित है। जहां छोटे आकड़े की बात करें तो..प्रतिव्यकित प्रति पाव...40 रुपये ऊपरी कमाई है...यदि दुकान से दिनभर में 1000 पाव बिकते है तो ...सीधे-सीधे...40 हजार रुपये प्रतिदिन की ऊपरी कमाई है।और यदि इस कमाई को 66 दुकानो से जोड़े तो 2 लाख रुपयों से अधिक की  ऊपरी कमाई प्रतिदिन की है। यह तो सिर्फ अंदाजन आंकड़ा है हकीकत में इससे भी कहीं ज्यादा की ऊपरी कमाई प्रतिदिन की जा रही है।

अब सवाल यह पैदा होता है कि शराब ठेकेदार यदि ओवर रेटिंग करे तो इसकी शिकायत आबकारी विभाग के जिम्मेदारों से की जा सकती है। लेकिन वर्तमान में तो खुद आबकारी विभाग शराब दुकान चला रहा है। अब इसकी शिकायत करें तो करें किससे.....

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जिम्मेदारों की खामोशी ...ही बयान कर रही सब कुछ......

ऐसा नही है कि इस पूरे खेल से आबकारी विभाग के जिम्मेदार अनभिज्ञ हों....
उन्हें हर एक बात बखूबी पता है। शहर के तमाम न्यूज़ चैनल...और अखबार इस खुलासे को चीख चीख कर बयान कर रहे है। लेकिन जिम्मेदारों के कान में जूं तक नही रेंगती। हर बार कारवाही किये जाने की बात कहकर पूरे मामले को ठंडा करने का प्रयास किया जा रहा है। या यूं कहें कि इस शानदार अवसर में अधिक से अधिक लाभ कमाने के चक्कर मे कार्यवाही नही की जा रही।
और कारवाही करें भी तो किस पर....
आखिर दोषी है कौन...???

अब समय आ गया है कि जिला कलेक्टर इस पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए...जिम्मेदारों को जबाब तलब करें। आखिर बात शहर की है।

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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार