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रविवार, 14 जून 2020

आसमान से रुपया बरसाने के जुगाड़ में तांत्रिक के साथ वनरक्षकों ने की अमानत में खयानत...

आसमान से रुपया बरसाने के जुगाड़ में
तांत्रिक के साथ वनरक्षकों ने की
अमानत में खयानत...

(अमित श्रीवास्तव-सिवनी)
बरसेगा...रुपया....होंगे मालामाल...
कुछ ऐसी ही मंशा के साथ..कुछ जिम्मेदारों ने अमानत में खयानत कर डाली..जिसकी कीमत एक बेजुबान को अपनी जान से चुकानी पड़ी..कहने को तो हम आधुनिक युग मे जी रहे है।लेकिन 
भारत देश के कई कोनों में आज भी अंधविश्वास चरम पर है । यही वजह है कि इस आधुनिक युग मे भी बलि प्रथा, काला जादू और टोने-टोटके के चलते बेजुबान जानवरो को मौत के घाट उतारा जाता रहा है।

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मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में हुई..धनवर्षा पूजा...

यह पूरी घटना मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में घटित हुई है।जहां आसमान से नोटों की बारिश कराने के उद्देश्य से बाघ के दांत, नाखून व मूंछ के बाल से  धनवर्षा की पूजा कराई जा रही थी। इस तांत्रिक कर्म के चलते एक मंदिर में धनवर्षा के उद्देश्य से बाघ के दांत, नाखून व मूंछ के बालों के साथ पूजा करते तीन लोगों सहित एक वनरक्षक पाया गया। बताया जाता है कि पूजा में शामिल वनरक्षक को निलंबित किया गया है तो पूजा में शामिल वनरक्षक व अन्य 3 लोगों को भी गिरफ्तार किया गया था।

कब की है घटना...कौन कौन थे शामिल

प्राप्त जानकारी के अनुसार वनरक्षकों की सांठगांठ के चलते ये तांत्रिक कर्म कराया जा रहा था। जिसमे पूजा का मुख्य समान ..जैसे बाघ का नाखून , दांत आवर मूछ के बाल इत्यादि इन्ही वनरक्षकों ने तांत्रिक को मुहैय्या कराए थे। गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों को 5 जून की शाम माननीय न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया गया है।
दक्षिण सामान्य वनमंडल के वन मंडल अधिकारी पीपी टिटारे ने बताया कि खवासा परिक्षेत्र की पुलपुला बीट में पदस्थ वनरक्षक सुनील मर्सकोले को बीते दिवस 4 जून 2020 को एक मंदिर में धनवर्षा कराने के उद्देश्य से तांत्रिक पूजा आयोजित किये जाने के दौरान पकडा गया था। विभागीय कार्यवाही के बाद उक्त वनरक्षक को निलंबित किए जाने के आदेश 5 जून को जारी किए गए थे। तथा वनरक्षक के विरूद्ध विभागीय जांच प्रारंभ कर दी गई है।

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अंधविश्वास पर भरोसा करना पड़ा महंगा

तंत्र मंत्र...और तांत्रिक पूजा  से धन वर्षा होने का अंधविश्वास... खवासा वन परिक्षेत्र के पिंडरई व सिल्लारी गांव के ग्रामीणों व वन विभाग में पदस्थ वनरक्षक के लिए घातक साबित हुआ है। सिल्लारी गांव निवासी खेमराज सलामे, रामकिशोर सलामे, पिंडरई निवासी राजू बरकड़े के साथ मिलकर वनरक्षक सुनील मर्सकोले ने धनवर्षा के लिए झड़ती पूजा कराने की योजना बनाई थी।

क्या होती है झड़ती पूजा...

तांत्रिक मान्यताओं की माने तो कुछ विशेष परिस्थितियों में विशेष जानवरों के अंगों की पूजा कर पारलौकिक शक्तियों के माध्यम से अविश्विनीय कार्य किये जा सकते है। हालांकि यह पूजा सफल होती है इसकी पुष्टि आज तक नही हुई है। लिहाजा यह एक कपोल कल्पना ही है।
कुछ लोग खुद को पराभौतिक शक्ति का स्वामी बताकर अक्सर चमत्कार करने का दावा करते है। छोटे मोटे जादूगरी के पैतरे दिखाकर ये लोगों का विश्वास जीतते है। फिर उनके सहयोग से ऐसे कई तांत्रिक पूजाओं का आयोजन किया जाता है। 
ऐसी ही एक तांत्रिक पूजा को झाड़ती पूजा के नाम से भी जाना जाता है जहां पर यह विश्वास किया जाता है कि यदि योग्य पंडा विशेष पूजा सामग्री के साथ मंत्रों का उच्चारण और हवन करें तो पारलौकिक शक्तियां खुश होकर आसमान के रास्ते से रुपयों की बरसात कर देती हैं और फिर उन रुपयों के माध्यम से पूजा में उपस्थित लोग अपनी जिंदगी को सुखमय बना सकते हैं यही कारण है कि रुपयों से मालामाल होने की लालच कहीं ना कहीं पढ़े लिखे लोगों को भी इस अंधविश्वास की ओर खींच लाती है।

नोट-यह जानकारी कुछ ग्रामीणों और पंडों के माध्यम से एकत्र की गई है। ध्यान रहे विकास की कलम किसी भी तंत्र-मंत्र के होने का दावा नही करती..लेकिन वह  लोगों की धार्मिक भावनाओं और आस्था का भी पूरा सम्मान करती है।

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बालाघाट कटंगी से बुलाया गया था पंडा

बताया जाता है कि पूजा के लिए चारों व्यकितयों ने बालाघाट कटंगी से पंडा भी बुलाया था। लेकिन 4 जून को पूजा पूरी होने से पहले ही सतर्क वन अमले ने आरोपितों को बाघ के दांत, नाखून व बालों व पूजन सामग्री सहित धर दबोचा। जानकारी के अनुसार यह पूजा रिड्डी टेक से पीपरवानी मार्ग पर स्थित नदी किनारे करीब तीन किमी अंदर घने जंगल में स्थित एक मंदिर में की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान पंडा मौके से फरार हो गया है जिसकी तलाश जारी है। जिसकी सरगर्मी से तलाश की जा रही है

काना.... फूसी....

घटना का खुलासा होने और वनरक्षकों के रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद..के तरह की काना-फूसी सामने आ रही है। कुछ जानकारी यह भी सामने आई है कि। पिण्डरई के राजस्व क्षेत्र में वनरक्षक को किसी ने बाघ के मृत होने की सूचना दी थी। जिस पर वनरक्षक अपने साथियों के साथमौके पर पहुंचा। और बाघ के कुछ अंग पूजा के लिए निकाल कर अन्यत्र शव को जला दिया।
महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि बाघ मृत मिला या मारा गया।
बाघ की खाल कहाँ है।
क्या शिकारियों से साठगांठ कर महंगे दामों पर खाल पहले ही बेच दी गयी।
बहरहाल ये सभी सवालों के जबाब शेष है।
जिनका खुलासा जांच के बाद ही हो पायेगा...
कुछ जगह तो ये भी कानाफूसी चल रही है कि ... हो सकता है कि इस पूरे खेल में कोई बड़ा चेहरा हो..जो खुलासा होने ही न दे।
अब ये तो समय ही बताएगा.....की जांच में क्या निकल के सामने आएगा।

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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार

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