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मंगलवार, 16 जून 2020

प्रेमी से शादी न हो पाने पर... नाबालिका ने किया आत्महत्या का प्रयास

प्रेमी से शादी न हो पाने पर...
नाबालिका ने किया आत्महत्या का प्रयास


रुपहले परदे की चकाचौंध से चमत्कृत होकर आजकल हर कोई प्यार मोहब्बत में सराबोर हो चुका है।इनका सबसे ज्यादा असर कम उम्र के युवाओ पर होता है। जिस तरीके से फ़िल्म डायरेक्टर प्रेम संबंधों की पटकथा लिखते है।उसके हिसाब लगभग हर प्रेम कहानी की...हैप्पी एंडिंग होती ही है। 
लेकिन वास्तविक जिंदगी ऐसी नही होती ..जहां हर कुछ फिल्मों जैसा हो...
और फिर प्रेम में विफलता के चलते बच्चे अक्सर आत्मघाती कदम उठाने से बी बाज नही आते....

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कहाँ का है मामला.....

आज की कहानी मध्यप्रदेश के हृदय स्थल जबलपुर जिले की है। जहां प्रेम में विफलता के आसार दिखने पर एक नाबालिका नए अपनी जीवन लीला समाप्त करने का फैसला किया। और आत्महत्या करने जबलपुर के तिलवारा पुल पर जा पहुंची।

क्षेत्रीयजनों की जागरूकता से बची जान

तिलवारा पुल पर संदिग्ध हालातों में खड़ी युवती को अकेला देख कर क्षेत्रीयजनों को संदेह हुआ। और फिर लोगों ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखी। इसी दौरान नजदीकी तिलवारा थाने में भी इसकी सूचना दी गयी। इससे पहले की नाबालिका कोई गलत कदम उठा पाती।
समय रहते ही नाबालिका के पास पुलिस पहुंच गई। और उसे थाने ले आयी।

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12वीं का पेपर देकर सीधे पहुंची आत्महत्या करने...



तिलवारा थाना प्रभारी रीना पांडे ने जानकारी देते हुए बताया की नाबालिका को समझा बुझा कर थाने ले आया गया था। और तत्काल ही उसके परिजनों को इसकी सूचना भी पहुंचा दी थी। बताया जा रहा है कि नाबालिका संस्कार नगर अधारताल की रहने वाली है और सोमवार को उसका 12वी का पेपर देने वो घर से निकली थी। पेपर देने के बाद वो घर पर नही पहुँची थी। परिजनों ने इसकी सूचना संबंधित थाने में दी थी और उसकी तलाश कर रहे थे। 

प्रेम में विफलता के चलते उठाया कदम

 तिलवारा पुलिस ने नाबालिका के  परिजनों को युवती के बारे जानकारी दी और युवती को उनके सुपुर्द किया।पुलिस का कहना है कि नाबालिका का किसी युवक से अफेयर चल रहा है और वो उसके साथ शादी करना चाहती है लेकिन उसके परिजन इस रिश्ते को लेकर  नाराज थे जिससे दुखी होकर वो तिलवारा में आत्महत्या करने के उद्देश्य से आई थी।

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विकास की कलम की अपील

सही काउंसलिंग न होने के कारण अक्सर युवा वर्ग हताश होकर आत्महत्या का कदम उठाते है। विकास की कलम अपने पाठकों से अनुरोध करती है। कि उम्र की एक दहलीज पर पहुंचकर अक्सर युवा भटक जाते है।ऐसे में उन्हें लगता है कि उनकी भावनाएं कोई समझ ही नही रहा। अविभावकों को चाहिए कि इस जटिल अवस्था मे आने के पहले ही वे बच्चों से खुलकर संवाद करने का प्रयास करें। उन्हें दबाए नही बल्कि एक मित्रवत होकर उन्हें उनके विचारों को समझने के बाद...अच्छे बुरे दौनो हालातों से अवगत कराएं। ताकि क्रोध या दुख में आकर कोई भी युवा गलत कदम न उठाएं।

नोट-विकास की कलम अपने पाठकों से अनुरोध करती है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें..

ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें। साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए।


विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार

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