VIKAS KI KALAM,Breaking news, news updates, hindi news, daily news, all news

It is our endeavor that we can reach you every breaking news current affairs related to the world political news, government schemes, sports news, local news, Taza khabar, hindi news, job search news, Fitness News, Astrology News, Entertainment News, regional news, national news, international news, specialty news, wide news, sensational news, important news, stock market news etc. can reach you first.

Breaking

सोमवार, 4 मई 2020

शराब के आगे बेबस... कोरोना और सरकार..

शराब के आगे बेबस...
कोरोना और सरकार..



क्या शराब के सामने.. कोरोना ने घुटने टेक दिए...
 आज का सबसे बड़ा सवाल यही है गौर करने वाली बात है कि कोरोना संक्रमण से बचने के लिए अब तक अरबों खरबों रुपए खर्च किए जा चुके हैं। कई समाजसेवियों ने अपने कोषागार के खजाने खोल दीए है। और यह सब सिर्फ इसलिए की आम जनों को कोरोनावायरस संक्रमण से बचाया जा सके । लेकिन इस बीच सत्ता धारियों का शराब ठेके खोले जाने का निर्णय इस बात की गवाही देता है कि शराब की तलब संक्रमण के डर से भी बड़ी है। और शहर में ठेके खुलने के बाद जो नजारे सामने आए हैं। उनसे एक बात साफ है की शराब के सामने खुद कोरोनावायरस ने अपने घुटने टेक दिए।

यहां पढ़ें :- लॉक डाउन में शराब माफिया सक्रिय-एम्बुलेंस में कर रहे शराब तस्करी..

क्या सही है..सरकार का फैसला..

महानगरों के साथ-साथ छोटे राज्यों ने भी शराब दुकानों को खोलने के फरमान जारी कर दिए गए है और दिखावे के लिए इस बात की चेतावनी भी दी गयी है। की सोशल डिस्टेंसिंग को देखते हुए ही शराब दुकान का संचालन किया जाएगा। पर गौर करने वाली बात यह है कि जब इस देश में राशन लेने जाने वालों को भी सड़कों पर घूमने की अनुमति नहीं दी गई तो ऐसे में वाइन शॉप के सामने लगी भीड़ को सरकार कैसे नियंत्रण करेगी । क्या वाकई शराब दुकानों को इतनी जल्दी खोलना देशहित का फैसला है या फिर बड़े बड़े पूंजीपतियों के दबाव में आकर सरकार ने यह फैसला दिया है।

सिर्फ शराब व्यवसायियों पर क्यो रहमत..



यदि वाकई में देश ने कोरोना पर काबू पा लिया है और अभी ज्यादा संक्रमण फैलने का खतरा नहीं है तो सबसे पहले सरकार को चाहिए था, कि वह मध्यम उद्योगों को या यूं कहें छोटे स्तर पर चलने वाली दुकानों , व्यवसायों को शुरू करने की अनुमति देनी चाहिए थी क्योंकि पिछले 40 दिनों के दौरान उनके बंद हुए कारोबार से ना केवल उनके परिवार बल्कि उनसे जुड़े कई परिवारों के भूखे मरने की नौबत आ चुकी है। कुछ कर्ज के बोझ के तले दबे जा रहे हैं तो कुछ दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गए हैं।

आगे पढ़ें :- लॉक डाउन में घर घर बन रही कच्ची शराब...

क्या नशे की हालत में हो सकेगा-सोशल डिस्टेंस का पालन..??



भारत देश में बीते दिनों जगह-जगह से सोशल डिस्टेंस और लॉक डाउन का उल्लंघन करने की सैकड़ों वारदातें सामने आई है ऐसे में शराब ठेके शुरू होने के बाद इस बात की क्या गारंटी है कि जो होशो हवास में लॉक डाउन तोड़ने से बाज नहीं आते थे। वह नशे की हालत में लॉक डाउन और सोशल डिस्टेंस  का पालन कर पाएंगे??

ऐसी स्थिति में बढ़ सकती है घरेलू हिंसा



एक सर्वे के अनुसार सबसे ज्यादा घरेलू कलह और हिंसा शराब के कारण ही होती है ऐसे में जब चारों ओर लॉग डाउन लगा हो और परिवार का एक सदस्य शराब के नशे में धुत होकर घर पहुंचे तो फिर घर में होने वाली हिंसा और आपराधिक घटनाओं का जिम्मेदार कौन होगा..???

शराब के पैसों की जुगत में बढ़ सकता है अपराध...



इस भारत देश में जहां लोग बीते 40 दिनों से घरों के अंदर कैद है। जिनके खाने के लाले पड़े हुए हैं। ऐसे समय में शराब की दुकानों को खोलने पर बहुत ही अजीबोगरीब स्थिति का निर्माण होगा। क्योंकि शराब की तलब के चलते व्यक्ति मजबूर हो जाएगा शराब दुकान तक पहुंचने को। और जेब में पैसे ना हुए तो वह शराब पीने की ललक में या तो घर के सामान को बेचेगा या फिर किसी न किसी अपराध की ओर अग्रेषित होगा ।
क्या इस बात की जिम्मेदारी शराब ठेके को खुलवाने वाले लोग अपने कंधों पर ले सकेंगे..???

यहाँ पढें :- पुलिस महकमे में कैसे दी.... कोरोना ने दस्तक...

कुछ जानकारों की माने तो इस फैसले से देश की वित्तीय व्यवस्था का सुधार होगा। क्योंकि सिर्फ आपकारी विभाग से देश को बड़ी मात्रा में राजस्व की प्राप्ति होती है। बात तो सही है पर...
जनता का क्या...
उसकी वित्तीय स्थिति का क्या..
एक बात तो साफ है कि आने वाले समय मे केंद्र और राज्य सरकार टेक्स में वृद्धि कर अपनी स्थिति सुधार ही लेगी।
लेकिन आम जनता का क्या..
या तो वह ब्याज पर पैसे लेकर पूनः व्यवसाय शुरू करेगा या फिर सड़कों पर उतरेगा। 

विकास की कलम का सवाल

सरकार ने लॉक डाउन खत्म होने का इन्तजार क्यो नही किया..??
आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि शराब ठेकों को खोलने का निर्णय लिया गया..??
देश की पुलिस पहले से ही गली कूचों पर तैनात है..अब शराब दुकानों के लिए एक्स्ट्रा पुलिसिंग कैसे होगी..??
बीमारी के बाद भी हफ्ते भर का परहेज होता है..क्या कुछ दिन और इंतज़ार नही हो सकता था..??
गरीब जिसके पास खाने को भी पैसे नही है..अगर शराब पीने के लिए अपराध का रास्ता चुनता है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा..??
यदि इस फैसले के बाद कोरोना संक्रमण का ग्राफ बढ़ता है तो जिम्मेदारी कौन लेगा..??

विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

If you want to give any suggestion related to this blog, then you must send your suggestion.

नोट-विकास की कलम अपने पाठकों से अनुरोध करती है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें..



ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें। साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए।


विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार