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शुक्रवार, 8 मई 2020

पटरी पर बिखरी लाशें और रोटियाँ कर रही सवाल..हमारा गुनाह क्या था..??

पटरी पर बिखरी लाशें और रोटियाँ
कर रही सवाल..
हमारा गुनाह क्या था..??

aurangabad train accident,

वह चले थे इसलिए कि खुद को और अपने परिवार को कोरोना से बचाकर...
अपने गांव पहुंच जाएंगे और शायद अपनी जान बचा लेंगे। इस विश्वास के साथ मध्य प्रदेश के शहडोल में रहने वाले मजदूरों ने साधन ना मिलने पर पैदल ही अपने गांव पहुंचने का फैसला लिया । इस दौरान उन्होंने रेलवे ट्रैक के सीधे-सीधे रास्ते को सहज समझते हुए। अपनी मंजिल तक पहुंचने का फैसला किया ।एक तो मौसम की मार ऊपर से कोरोना का कहर.. फिर भी पैदल चलते चलते मजदूरों  ने जैसे तैसे अपना सफर तय किया और कई किलोमीटर पैदल चलने के बाद थक कर वे पटरियों में ही सो गए। कुछ ही घंटों बाद वहां से गुजरने वाली मालगाड़ी उन मजदूरों को रौंदती हुई निकल गई। कुछ तो समय रहते भाग निकले और कुछ मौत के गाल में समा गए और पटरिया पर बचा मजदूरों का क्षत-विक्षत शव...

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कहां पर हुआ यह भीषण हादसा...


महाराष्ट्र में औरंगाबाद के पास करनाड स्टेशन रेलवे ट्रैक पर  16 प्रवासी मजदूरों की मालगाड़ी की चपेट में आने से मौत हो गई।सभी मजदूर मध्य प्रदेश जा रहे थे। हादसा औरंगाबाद में करमाड स्टेशन के पास हुआ। घटना सुबह 5:00 बजे की है ।जब मजदूर रेलवे ट्रैक पर सो रहे थे। 5 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। 

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर जताया दुख.. मुआवजे का ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद हृदय विदारक है। वहीं मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार ने भी घटना पर शोक संवेदना प्रकट करते हुए  मृतकों के परिजन को 5-5 लाख रु. की सहायता देने का ऐलान किया है।

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रेल मंत्रालय ने दिए घटना की जांच के आदेश

रेल मंत्रालय ने बताया कि घटना बदनापुर और करनाड स्टेशन के बीच की है। यह इलाका रेलवे के परभणी-मनमाड़ सेक्शन में आता है।शुक्रवार तड़के मजदूर रेलवे ट्रैक पर सो रहे थे। मालगाड़ी के ड्राइवर ने उन्हें देख लिया था, बचाने की कोशिश भी की, पर हादसा हो गया। मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

विकास की कलम का सवाल
आखिर कौन है घटना का जिम्मेदार


पटरियों पर बिखरे हुए 16 मजदूरों के शव खून से सनी हुई पोटलिया रेलवे ट्रैक पर बिक्री हुई रोटियां आटा और चावल इस दृश्य को जिसने भी देखा उसका दिल फूट-फूट कर रोया लेकिन घटना अपने पीछे कई अहम सवाल छोड़ गई है...

रेलवे ट्रैक पर सोने वाले मजदूरों को समय रहते क्यों नहीं रोका गया..
इतनी बड़ी संख्या में यदि मजदूर रेलवे ट्रैक पर थे तो मालगाड़ी को क्लीयरलाइन कैसे दे दी गई...
सरकार की उन घोषणाओ का क्या.. जो  मजदूरों को निशुल्क उनके घरों तक पहुंचाने का दावा कर रही है.....
आखिर क्या कारण था जो सरकार की निशुल्क सेवा को ठुकरा कर इतनी यातनाएं सहते हुए पैदल ही निकल गए मजदूर.....

विकास की कलम से मृतक मजदूरों को श्रद्धांजलि

यह मौत मजदूरों की नहीं बल्कि सिस्टम के उन ढकोसले और बेबुनियाद वादों की है जिन की भेंट अक्सर गरीब आदमी चढ़ ही जाता है..
इस घटना ने समाज और सरकार की अफसरशाही के चेहरे पर ऐसा थूंक... थूंका है... जिसके निशान तो शायद मिट भी जाए लेकिन एहसास लंबे समय तक कायम रहेंगे।
विकास की कलम की ओर से सभी मृतक मज़दूरों को भावपूर्ण  श्रद्धांजलि । 

विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार



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चीफ एडिटर
विकास सोनी
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