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सोमवार, 25 मई 2020

ग्रेडरों का खेल.. खराब गेहूँ पास-अच्छा गेहूँ फेल.. यहां..कमीशन देकर बेचा जा सकता है घटिया गेंहूँ...


ग्रेडरों का खेल..
खराब गेहूँ पास-अच्छा गेहूँ फेल..
यहां..कमीशन देकर बेचा जा सकता है घटिया गेंहूँ...



मामला मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले की तहसील पनागर का है। जहां जिला सहकारी केंद्रीय बैंक पनागर के अंतर्गत सेवा सहकारी समिति नूनीयकला केंद्र क्रमांक 1 एवं 2 , सेवा सहकारी समिति पनागर एवं सेवा सहकारी समिति कालाडूमर केंद्र में गेंहू तुलाई में हो रही धांधली का मामला सामने आया है। इन केंद्रों में ग्रेडरों ने कुछ पैसों की लालच के चलते शासन के तय किये गए नियमों की धज्जियां उड़ाकर अमानक गेंहुओं को मानक बताकर उनकी तुलाई करवा दी है, अब जब वही गेंहू किसी अन्य वेयरहाउस हाउसों में जा रहा है । तो वही खाद्यान्न अमानक बताकर वापस केंद्र भेजा जा रहा है। जिसके चलते गेंहू उपार्जन केंद्र नुनिया कला 2 के राज वेयर हाउस परिसर में 2350 क्विंटल ओर केंद्र क्रमांक 1 नूनीयकला केंद्र में 1800 कट्टी गेंहू एवं पनागर केंद्र में 300 क्विंटल गेंहू अमानक गेहूं खरीदी होना दर्शाया गया है।

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खेल ग्रेडर(सर्वेयर) का...नपे समिति प्रबंधक..

प्रशासनिक अधिकारियों द्वारस इसकी गाज अब केंद्र प्रभारियों ओर समिति प्रबंधकों पर गिराई जा रही है, जिसके चलते पनागर सेवा सहकारी समिति प्रबंधक किसोर जायसवाल को निलंबन की कार्यवाही कर उन्हें हटा दिया गया है, ओर न जाने कितने केंद्र प्रभारी हैं जिन पर गाज गिरनी बाकी है। ये तो आने वाले समय मे ही पता चलेगा। जबकि इस पर असली दोषी ग्रेडरों पर कोई कार्यवाही नही की जाती है।

क्या है मानक, अमानक का खेल

गेंहू खरीदी में चल रही अनिमितताओं को रोकने जिला प्रशासन द्वारा ग्रेडरों (सर्वेयरों)की नियुक्तियां की जाती है, जिसके चलते केंद्रों में होने वाली तुलाई पल्लेदारों द्वारा तब तक नही की जाती है जब तक ग्रेडर (सर्वेयर) उसकी शासन द्वारा तय किये मानक (एफ ए क्यू) आधार पर उसे पास न करे, जिसके बाद ग्रेडर अपनी आईडी में इस किसान का गेंहू पोर्टल में ऑनलाइन करता है, ओर यहीं से शुरू होता है ग्रेडर ओर किसानों के बीच लेनदेन का खेल, खरीदी के दौरान ही साईं वेयर हाउस के मालिक द्वारा भी खरीदी के समय ही केंद्र में चल रहे अमानक ओर मानक खेल की लिखित शिकायत अधिकारियों से की गई थी, पर स पर किसी अधिकारियों द्वारा कोई कार्यवाही नही की गई। जिसके चलते ग्रेडरों द्वारा खुले आम अपना खेल खेला गया, जिसका भुगतान अब केंद्र प्रभारी ओर प्रबंधकों पर निलंबिन जैसी कार्यवाही से चुकाना पड़ रहा है।

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       अधिकतर किसानों द्वारा हरवेस्टरों से कटाई कराई जाती है जिसमे कुछ मात्रा मिट्टी की होती है जिस पर ग्रेडरों द्वारा किसानों से लेनदेन की बात तय होने पर उनका खाद्यान्न पास कर दिया जाता है।

केंद्र में पंहुची 500 क्विंटल, पास हो गई 1121 क्विंटल

सिमरिया स्थित श्री साईं वेयरहाउस जहां कालाडूमर खरीदी की जा रही थी, उक्त केंद्र के अंतर्गत किसान विजय सिंह पिता गोपाल सिंग जिसका कुल गेंहू 1121 क्विंटल था पर तुलाई केंद्र में सिर्फ उसका सिर्फ 500 क्विंटल गेंहू ही पंहुचा था, जिसकी ग्रेडर द्वारा उक्त किसान से सांठ गांठ होने के कारण उसका नियम विरुद्ध पूरी 1121 क्विंटल गेंहू बिना खरीदी केंद्र लाये मानक कर दिया गया, जिसका विरोध केंद्र में ड्यूटी में पदस्थ पटवारी एवं वेयरहाउस मालिक द्वारा पंचनामा एवं शिकायत बनाकर अधिकारियों के समक्ष पेश किया गया जिसकी कोई सुनवाई नही की गई।



गेहूं खरीदी केंद्रों में इन दिनों ग्रेडर और कुछ किसानों की मिलीभगत के चलते अमानक गेहूं की खरीदी मनमाने तरीके से की जा रही है पूरे मामले में मुख्य भूमिका ग्रेडर की ही होती है जिसमें तुलाई के पूर्व जब तक ग्रेडर अपनी आईडी से उस गेहूं को पास नहीं कर देता है तब तक कंप्यूटर पोर्टल में उस किसान का रजिस्ट्रेशन और उसका नाम शो नहीं करता है लेकिन ग्रेडर से हुई सांठगांठ के चलते ग्रेडर के द्वारा अमानक गेहूं पास कर दिया गया ग्रेडरों की ऐसी हरकतों का खामियाजा अब समिति को भुगतना पड़ता है
जिसका नतीजा यह निकलता है कि जब उक्त माल या उक्त खाद्यान्न किसी अन्य जिलों के वेयरहाउस में भेजा जाता है तो उसका एक तरफ से पूरा खाद्यान्न अमानक घोषित कर कर उसे वापस भेज दिया जाता है जिसका खामियाजा समिति को भुगतना पड़ता है ग्रेडर द्वारा की जा रही लापरवाही की सजा समिति प्रबंधकों को भुगतना पड़ रहा है।

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इनका कहना है.....

आशु कुमार पटेल, आपरेटर नूनीयकला केंद्र , पनागर

जब तक सर्वेयर किसी किसान का टोकन जनरेट नही कर देते तब तक ओपरेटर उसकी एंट्री कर ही नही सकता है, मानक ओर अमानक करने का कार्य सर्वेयर का होता है, उसमे समिति या केंद्र प्रभारी का कोई दखल नही होता है -


गोकुल पटेल, अध्यक्ष सेवा सहकारी समिति नूनीयकला

हमारे केंद्र में 1800 कट्टी गेंहू वापस आया है, जबकि पास करने का कार्य ग्रेडर का है पोर्टल पर उन्ही की आईडी से किसान की आईडी जनरेट किया जाता है, उन्होंने क्या देखकर मानक किया अब इसका जबाब वही दे पाएंगे, अब परेसानी हम लोगों की है 1800 कट्टी अमानक होकर वापस केंद्र आ गया है, जिसका भुगतान ओर कार्यवाही बेवजह केंद्र को भुगतनी पड़ रही है -

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ग्रेडरों ने किसानों से सांठगांठ कर अमानक गेंहू को किया मानक, अब निलंबित हो रहे अधिकारी

अन्य जिलों में भेजा जाने वाला सेंकडो क्विंटल गेहूं वापस आ रहा केंद्रों में

ग्रेडर को छोड़कर समिति प्रबंधकों, केंद्र प्रभारियों पर की जा रही निलंबन की कार्यवाही


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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार

1 टिप्पणी:

  1. ग्रेडरो का यह खेल आज का नहीं है बल्कि काफी लंबे समय से पूरी सांठगांठ कर या खेल खेला जा रहा है और हर बार यह ग्रेडर किसानों से उनके अमानक गेहूं को पास कराने के नाम पर रुपयों का लेनदेन करते हैं इस पूरे प्रकरण में मुख्य बात यह है की जिस ग्रेडर द्वारा यह पूरा खेल खेला गया उसकी नियुक्ति पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं हमने जब जिम्मेदारों से उक्त ग्रेडर की नियुक्ति के विषय में पूछताछ की तो पता चला की ग्रेडर की नियुक्ति ही संदेह में है अब ऐसे में आप समझ सकते हैं की सिस्टम के निचले अधिकारी से लेकर आला अधिकारियों तक हद दर्जे की लापरवाही बरती जा रही है

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