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शनिवार, 16 मई 2020

यह कैसी करतूत... देशभर के मजदूरों के मुंह पर पोती कालिख...

यह कैसी करतूत... देशभर के मजदूरों के मुंह पर पोती कालिख...



देशभर में इन दिनों मजदूर और असहाय लोगों की स्थिति को लेकर देश का हर एक नागरिक उनके प्रति सहानुभूति व्यक्त कर रहा है। सरकार और समाजसेवी संस्थाओं ने भी मजदूरों की मजबूरी को ध्यान में रखते हुए जगह-जगह मदद करने के लिए भोजन पानी और राशन की व्यवस्थाएं शुरू कर दी थी। लेकिन कुछ मौकापरस्तो ने मजदूरों की एक ऐसी छवि प्रस्तुत की जिससे मदद करने वालों के मन में घृणा पैदा हो गई है। और अब इसका खामियाजा जरूरतमंद व्यक्ति भी चुका रहे हैं।

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जी हां.... हम बात कर रहे हैं उस निंदनीय घटना की, जिसमें ट्रेन में सवार कुछ लड़कों ने स्टेशन पहुंचते ही प्लेटफॉर्म पर
लगी ऑटोमेटिक फूड वेंडिंग मशीन, जिसमें खाने पीने का सामान रखा रहता है। उस पर धावा बोल दिया और देखते ही देखते इन शरारती तत्वों ने मशीन का कांच तोड़कर उसमें रखी कोल्ड्रिंक्स, चिप्स और बिस्किट्स लूट ली। यही नजारा प्लेटफार्म पर लगी सभी एबीएम मशीनों में देखने को मिला और उसके बाद देखते ही देखते हुए शरारती लड़के श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन में जा बैठे और फिर ट्रेन रवाना हो गई....
 ट्रेन तो चली गई लेकिन मजदूर श्रमिकों और जरूरतमंदों के लिए आगे आने वाले मददगारों के जहन में एक नफरत का विश घोलकर चली गई.....

क्या है पूरी घटना...कहाँ का है मामला



मामला मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले का है। आपको बता दें कि लॉक डाउन के समय के दौरान सभी जगहों पर काम धंधे ठप हो चुके जिसके चलते मजदूर पैदल ही अपने-अपने गांव की ओर रवाना हो रहे थे ।सरकार ने मजदूरों की मजबूरी को समझते हुए श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलवाई है। जिसमें सवार होकर श्रमिक वर्ग बिना किसी तकलीफ के अपने गंतव्य स्थान की ओर जा सकता है। इतना ही नहीं प्रत्येक पड़ाव पर सरकारी एवं समाजसेवी संस्थाओं द्वारा श्रमिक ट्रेन में सवार होकर आने वाले मजदूरों के लिए पर्याप्त भोजन एवं पानी की व्यवस्था भी की जा रही है।

लेकिन बेंगलुरु से श्रमिक मुसाफिरों को लेकर हाजीपुर जाने वाली गाड़ी... जैसे ही जबलपुर स्टेशन पर कुछ समय के लिए रुकी..
उसमें सवार श्रमिक मुसाफिरों के एक दल ने प्लेटफार्म पर लगी ऑटोमेटिक फूड मशीन पर लूट की नीयत से हमला कर दिया बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से पहले फूड वेंडिंग मशीन के कांच फोड़े गए और फिर उसमें रखा लाखों का सामान लूटते हुए, श्रमिक ट्रेन की मुसाफिरों की भीड़ के बीच गायब हो गए।
जानकारों की माने तो इस कृत्य को योजनाबद्ध तरीके से संचालित किया गया है। क्योंकि प्लेटफार्म पर लगी हुई समस्त ऑटोमेटिक फूड मशीन पर एक साथ ही धावा बोला गया और सभी फूड मशीनों को नुकसान पहुंचाते हुए उसमें रखी खाद्य सामग्री को लूट लिया गया।

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घटना के बाद जागा रेल प्रशासन अब जांच का दे रहा हवाला....

घटना की खबर लगते ही आरपीएफ और जीआरपी के जवान... जो कि थकान मिटाने यहां वहां दुबक कर बैठे हुए थे आनन-फानन में एक्टिव हो गए और फिर प्लेटफॉर्म के चारों ओर मार्च करते नजर आए ।लेकिन क्या फायदा अब तक तो ट्रेन वहां से जा चुकी थी। रेलवे प्रशासन की ओर से अभी तक इस घटना को लेकर कोई भी सख्त कदम नहीं उठाए गए हैं।

श्रमिकों की इस करतूत से हुई लाखों की क्षति

घटना की सूचना लगने पर फूड वेंडिंग मशीन के कर्मचारी विमल रैकवार ने प्लेटफॉर्म पर पहुंचकर मशीनों का जायजा लिया। विमल रैकवार ने जानकारी देते हुए बताया कि प्लेटफार्म क्रमांक 5 पर उनकी गोयल एंड गोयल कंपनी की 10 ऑटोमेटिक फूड वेंडिंग मशीन लगी हुई थी। प्रत्येक मशीन पर तकरीबन 20 से 25 हजार का सामान लोड था। मुसाफिरों द्वारा 9 मशीनों को तोड़कर उनमें से लाखों रुपए का सामान लूट लिया गया। वही इस लूट के दौरान मशीनों को भी काफी क्षति पहुंचाई गयी है। जिसकी भरपाई की अनुमानित कीमत 2 लाख से भी अधिक होगी।

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वेंडर मशीन कर्मचारी की शिकायत पर दर्ज हुई रिपोर्ट

वेंडिंग मशीन के कर्मचारी ने जीआरपी थाने में शिकायत कर नुकसान की भरपाई करवाने की मांग की है।वेंडर मशीन कर्मचारी का कहना है कि दो दिन पहले हुई इस तोड़फोड़ में उसकी कंपनी का 2 लाख रुपए का नुकसान हुआ है,
ही जीआरपी ने वेंडर मशीन कर्मचारी की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है,जीआरपी पुलिस का कहना है कि वह मामले की जांच करेगी और उसके बाद दोषियों के खिलाफ कार्यवाई की जाएगी।

कहीं इस पूरे कृत्य के पीछे कोई साजिश तो नहीं...???
आखिर कैसे मजदूरों में आई इतनी हिम्मत...???

एक ओर जहां मजदूर पैदल चलकर हजारों किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं और इस दौरान किसी भी सरकारी संपत्ति को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचाया गया। मजदूर भूखा रह गया लेकिन उसने कहीं पर भी तोड़फोड़ नहीं की, बल्कि भूखे प्यासे रहकर चुपचाप अपने घर की ओर चलता चला गया।
लेकिन जिस तरीके के नजारे जबलपुर जंक्शन के प्लेटफार्म क्रमांक 5 पर देखने को मिले । उससे एक बात तो साफ है कि यह मजदूर भूख के कारण नहीं बल्कि किसी सोची समझी रणनीति के तहत इस तरीके का कृत्य कर रहे हैं और इससे यह साबित कर रहे हैं की भूख से परेशान होकर उनके द्वारा खाने की बेंडिंग मशीन को तोड़कर लूटपाट की गई।
अगर इस कहानी में इंच मात्र की सच्चाई भी होती तो अब तक देशभर में कई स्थानों पर भूख से व्याकुल हुए मजदूरों के द्वारा राशन मिठाई और जनरल स्टोर के बंद दुकानों की शटर का ताला तोड़कर भी लूटपाट की गई होती। लेकिन कहीं से भी इस बात की पुष्टि नहीं हुई।
गौर करने वाली बात यह है....
जब मजदूर के पैर में छाले पड़ गए.... जब मजदूर पैदल चलते चलते बेहाल होकर बेहोश होने लगे......
जब मजदूर ट्रेन की पटरियों के बीच चलते चलते थक कर सो गए....
तब तक तो मजदूरों ने कहीं लूटपाट नहीं की.....
 लेकिन जब सर्व सुविधा युक्त ट्रेन में बैठकर उन्हें उनके घर तक पहुंचाया जा रहा है। तो ऐसे में लूट होना एक बहुत बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा है।

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जिम्मेदारों से विकास की कलम की अपील

जिम्मेदारों को चाहिए कि इस पूरी घटना की विशेष जांच की जाए । बेगलुरु से चलने के बाद गाड़ी कहां कहां रुकी और किन-किन जगहों पर इन्हें भोजन की व्यवस्था कराई गई। खासतौर पर वीडियो में दिखाई दे रहे साक्ष्यों के आधार पर प्रॉपर मॉनिटरिंग करते हुए। इस घटना के मुख्य घटकों तक पहुंचना चाहिए और फिर मौका परस्तों को बेनकाब कर ,जनता के सामने लाना चाहिए ।अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह दिन दूर नहीं जब मानवता की सेवा के लिए बढ़ने वाले हाथ इन करतूतों के कारण थम जाएंगे ।और अगर ऐसा हुआ तो जो  वाकई जरूरतमंद है। उन तक भी मदद नही पहुंच पाएगी।

नोट-विकास की कलम अपने पाठकों से अनुरोध करती है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें..
ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें। साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए।

विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार

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