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मामा.. जी.. कोरोना में स्कूल फीस.. माफ करोना....

मामा.. जी..
कोरोना में स्कूल फीस..
माफ करोना....
School fees issue in MP

इधर कोरोनावायरस के संक्रमण से  पूरा देश हलाकान है  और उधर घर में बैठे परिवार के मुखिया को लॉकडाउन के बीच बच्चों की पढ़ाई की चिंता सता रही है। कामकाज बंद है सभी अपने घरों में बैठे हैं.... ना सैलरी है ना व्यापार....... और इन सब के बीच अभिभावकों को अप्रैल से जून तक की फीस भरने के लिए संदेश पहुंचने लगे हैं। कुछ स्कूलों ने स्कूल बंद होने के बावजूद ऑनलाइन पढ़ाने का हवाला देकर फीस की मांग की है। जबकि ज्यादातर अभिभावक लॉकडाउन में आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, ऐसे में स्कूलों की मनमानी के आगे बेबस हैं। इधर, प्रदेश सरकार भी स्कूलों के लिए कोई नीति तय नहीं कर रही है। जिस वजह से उनके हौसले बुलंद हैं। वहीं देश के कई राज्यों में मौजूदा हालात को देखते हुए स्कूल फीस पर रोक लग चुकी है।

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आधा दर्जन राज्यों में मिली राहत की ख़बर

यह एक व्यापक समस्या है जिससे देश मे रहने वाला हर मध्यम वर्गीय परिवार जूझ रहा है। जिसे राहत के नाम पर महज अस्वासन ही मिल रहा है। इसी बीच एक राहत भरी ख़बर यह है कि..
 देश में गुजरात, ओडिशा, झारखंड, दिल्ली, उत्तराखंड में अभिभावकों को राहत भरे आदेश जारी हो चुके हैं। इन राज्यों ने स्कूल फीस लेने पर रोक लगा दी है।कुछ  संस्थानों ने स्कूल बंद होने तक फीस की मांग भी नहीं करने के साफ निर्देश जारी किए हैं। 

मामा के राज में नहीं कोई राहत..


बात यदि मध्य प्रदेश की की जाय तो..खुले तौर पर अभी कोई भी राहत की ख़बर नही आई है।प्राप्त आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में दो करोड़ अभिभावकों को अभी तक फीस से राहत नहीं मिली है। सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अभी तक इस दिशा में कोई राहत भरा कदम नहीं उठाया है । कोरोना महामारी की वजह से लगभग दो माह से रोज कमाने-खाने वाले लोगों के पास आर्थिक तंगी है। और उस पर स्कूल प्रबंधकों के रोजाना अल्टीमेटम से मध्यम वर्गीय परिवारों में चिंता का माहौल बन व्य है।

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सोशल मीडिया से अविभावक भेज रहे पत्र

एक ओर देश कोरोना से जूझ रहा है तो दूसरी ओर स्कूल प्रबंधन व्हाट्सएप और मेसेजेस के जरिये फीस जमा करने की डिमांड कर रहा है। ऐसे में परेशान अविभावकों ने सोशल मीडिया के माध्यम से राज्यपाल, मुख्यमंत्री और सीबीएसई बोर्ड तक चिट्ठी लिखकर फीस माफी की मांग की है।

मध्यम वर्गीय परिवारों से उठते सवाल..


लॉक डाउन की मार झेल रहे परिवारों में इनदिनों सरकार की नीतियों के खिलाफ कई सवाल उमड़ रहे है। अविभावकों का कहना है कि जब स्कूलों में लॉकडाउन लागू है, तो फिर फीस क्यों मांगी जा रही है। अप्रैल से जून माह की फीस स्कूल क्यों नहीं माफ कर रहे हैं। जबकि कई स्कूल संचालन में सरकार से मदद लेते हैं। -मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्कूल फीस माफी को लेकर राज्य को निर्णय लेने स्वत्रंत किया है - जब अन्य राज्यों ने अपने प्रदेश की जनता का हित देखते निर्णय लिया तो प्रदेश में क्यों देरी।

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जिला शिक्षा अधिकारी से..
विकास की कलम की मुलाकात।

इन सबके बीच जबलपुर जिले के शिक्षा अधिकारी सुनील कुमार नेमा से विकास की कलम ने मुलाकात कर। अविभावकों की समस्याओं को साझा किया। बातचीत के दौरान श्री नेम ने बताया कि..इस विषय पर  स्कूल शिक्षा विभाग से चर्चा की जा चुकी है, लेकिन अभी तक कोई भी संतोष जनक उत्तर नही मिला है। उपरोक्त विषयी पर शासन स्तर पर निर्णय लिया जाना है। उनके द्वारा पूनः उच्चाधिकारियों से चर्चा की जाएगी।

माफी तो नही पर.. किस्तों में जमा कर सकते है फीस..नही लगेगा विलंब शुल्क

निजी शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा बच्चों के अभिभावकों पर फीस जमा करने दबाव डालने की मिल रही शिकायतों को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी एस.के. नेमा ने स्पष्ट किया है कि शासन के निर्देशानुसार जो अभिभावक शैक्षणिक सत्र वर्ष 2019-20 की बकाया शुल्क जमा नहीं कर पाये हैं वो यह शुल्क 30 जून तक जमा कर सकेंगे लेकिन उनपर विलंब शुल्क प्रभारित नहीं किया जा सकेगा । 
      जिला शिक्षा अधिकाकरी के मुताबिक निजी शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए भी आगामी आदेश तक शुल्क वृद्धि नहीं की जा सकेगी । इसके अलावा अभिभावकों को फीस की एकमुश्त अदायगी के लिए भी बाध्य नहीं किया जा सकेगा ।  निजी विद्यालय अभिभावकों की सुविधानुसार मासिक रूप से अथवा न्यूनतम चार किश्तों में फीस ले सकेंगे । फीस जमा न कर पाने के कारण निजी विद्यार्थी का नाम विद्यालय से नहीं काटा जायेगा । 

      जिला शिक्षा अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन अशासकीय विद्यालयों द्वारा वर्तमान में ऑनलाइन अध्यापन गतिविधियां प्रारंभ की गई हैं वे इसके लिए भी कोई अतिरिक्त फीस प्रभारित नहीं कर सकेंगे ।  स्कूल प्रबंधन को विद्यालय में कार्यरत शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक स्टॉफ को नियमित रूप से वेतन का भुगतान भी करना होगा ।  जिला शिक्षा अधिकारी ने शासन के इन सभी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश निजी शैक्षणिक संस्थाओं को दिये हैं ।

उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने दी सरकार को चेतावनी..

उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के संयोजक पीजी  नाजपाण्डेय ने अब अविभावकों की ओर से सरकार के खिलाफ खड़े होने का मन बना लिया।विकास की कलम से चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि देश भर के कई राज्यों में जब अभिभावकों को फीस माफी की राहत दी जा रही है । तो ऐसे वक्त में मप्र सरकार की टालमटोली करना चिता का विषय है। लॉक डाउन के दौरान पूरा देश बन्द है। सभी जगह आर्थिक परेशानियों का दौर चल रहा है।ऐसे में अविभावक स्कूल  फीस कैसे जमा करेंगे। इसलिए स्कूल प्रबंधन की ओर से फीस माफ होनी चाहिए। ऐसा नहीं हुआ तो नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच न्यायालय की शरण मे जाएगा।

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विकास की कलमल
चीफ एडिटर 
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार