मजदूरी न मिलने पर.. अधिकारियों को बनाया बंधक.. - VIKAS KI KALAM,Breaking news jabalpur,news updates,hindi news,daily news,विकास,कलम,ख़बर,समाचार,blog

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मजदूरी न मिलने पर.. अधिकारियों को बनाया बंधक..

मजदूरी न मिलने पर..
अधिकारियों को बनाया बंधक..

गरीब आदमी अपने हर एक काम को पूरी लगन के साथ करता है। लेकिन क्या हो... जब गरीब आदमी का मेहनताना उसे ना मिले... बात साफ है जो व्यक्ति तपती धूप में पूरी ईमानदारी के साथ अपने काम को करता है। वह समय आने पर अपने महनताने के लिए किसी भी हद तक गुजर जाने को भी तैयार रहता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां पर मजदूरी न मिलने के कारण गुस्साए मजदूरों ने सर्वे करने आए अधिकारियों को ही महुआ के पेड़ से बांधकर अपना बंधक बना लिया, और उन्हें दो टूक शब्दों में कह डाला कि जब तक मजदूरी नहीं मिलेगी तब तक रिहाई भी नहीं मिलेगी।

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कहां का है यह मामला



मामला मध्यप्रदेश के मंडला जिले की निवास पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत भीकमपुर का है जहां एक बार फिर गरीब मजदूरों के सब्र का बांध टूट गया और फिर जो हुआ वह आने वाले समय में हर एक अधिकारी के रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है खास तौर पर उनके लिए जो कि कागजी कार्यवाही में हेरफेर कर अक्सर गरीब मजदूरों की मेहनत की कमाई पर डाका डालने से बाज नहीं आते।

आखिर क्या है पूरा मामला

मंडला जिले के निवास जनपद के अंतर्गत आने वाले भीकमपुर ग्राम पंचायत में पिछले कुछ समय से मेढ़ बंधान का काम चल रहा था। जिसमें गांव के मजदूर मजदूरी कर रहे थे । लेकिन उन्हें मेहनताने के नाम पर केवल और केवल आश्वासन ही मिल रहा था। एक तो लॉक डाउन की मार.. ऊपर से मजदूरी का हक भी ना मिलना। ऐसे में ग्रामीण मजदूरों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया ।उसी दौरान कार्य का सर्वे करने इंजीनियर अरविंद मिश्रा सरपंच और रोजगार सहायक के साथ पहुंचते हैं। जैसे ही मजदूरों ने इन्हें को देखा तो गुस्साए मजदूरों ने उन्हीं से अपने पैसों के भुगतान की मांग कर डाली। हालांकि इंजीनियर ने ग्रामीणों को समझाने की खूब कोशिश की लेकिन गुस्से से भरे ग्रामीण मजदूरों ने खेत में ही बने महुआ के पेड़ से इन तीनों अधिकारियों को बांध दिया और फिर मेहनताना ना मिलने तक बंधक बनाए रखने की घोषणा की...

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एसडीएम के आदेश पर पहुंचे थाना प्रभारी

जैसे ही इस घटना की जानकारी  जनपद निवास के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लगी। तो उन्होंने तत्काल एसडीएम को सूचित किया। वही एसडीएम ने भी आनन फ़ानन में थाना प्रभारी निवास को  मौके पर पहुँचाया। घटना स्थल पर पहुँच कर थाना प्रभारी ने मज़दूरी कर रहे लोंगो की समस्याओं को सुना और तत्काल निराकरण कर मजदूरों को अस्वासन दिया, कि शेष मजदूरी भुगतान जल्द से जल्द करा दिया जावेगा। थाना प्रभारी की बात मान कर ग्रामीण मजदूरों ने बंधक बनाए इन तीनो लोगो छोड़ दिया गया। 
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सोचने वाली बात...???


यह बात सच है कि ग्रामीणों ने जो कुछ भी किया.. वह गलत था...
लेकिन यह बात भी उतनी ही सच है..की अक्सर सरकारी कागजों पर हेर फेर कर इन मजदूरों का हक मार दिया जाता है..

यह बात सच है कि ग्रामीण मजदूरों को कानून हाथ मे नही लेना चाहिये था...
पर यह बात भी उतनी ही सच है..की अक्सर कानूनी दांव पेंच का सहारा लेकर कागजों के हेरफेर से लाखों के वारे-न्यारे किये जाते है।

एक मानवीयता के पहलू से देखा जाए तो इन ग्रामीण मजदूरों ने किसी को अगवा नही किया..जबरिया फिरौती नही मांगी..बल्कि कड़ी धूप में दिनरात खून पसीना एक कर जो काम किया था। उसकी मजदूरी ही मांगी थी।

विकास की कलम मजदूरों द्वारा किये गए कृत्य की निंदा करता है।
लेकिन अपने पाठकों के लिए एक सवाल जरूर छोड़ जाना चाहता है।
की आप अपने घरों में बैठकर ये विचार जरूर कीजियेगा की मजदूर जब दिन में मजदूरी करता है तब कहीं जाकर रात में घर पर चूल्हा जलता है।
और उनकी जितनी बुद्धि थी उस हिसाब से उन्होंने अपने हक को मांगने का प्रयास किया...
अब क्या गलत...क्या सही...फैसला आपका है....

अपने सुझाव जरूर दीजिएगा....
आपके इन्तेजार में...

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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार