मजदूर की मौत से अवैध उत्खनन का पर्दाफाश.. पुलिस पैट्रोलिंग पर भी उठे सवाल... - VIKAS KI KALAM,Breaking news jabalpur,news updates,hindi news,daily news,विकास,कलम,ख़बर,समाचार,blog

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मजदूर की मौत से अवैध उत्खनन का पर्दाफाश.. पुलिस पैट्रोलिंग पर भी उठे सवाल...

मजदूर की मौत से अवैध उत्खनन का पर्दाफाश..
पुलिस पैट्रोलिंग पर भी उठे सवाल...


अवैध रेत उत्खनन का मामला जबलपुर से जुड़े हुए क्षेत्रों के लिए कोई नई बात नहीं है । लेकिन जब कभी ऐसे स्थानों पर हादसे होते हैं तो मामला अपने आप उजागर होने लगता है। और फिर खुद की कलम बचाने के लिए जिम्मेदार विभाग ताबड़तोड़ कार्यवाही करने का दावा करते है। लेकिन मामला शांत होते ही फिर कहानी जस की तस पहुंच जाती है हम बात कर रहे हैं एक ऐसी मिलीभगत को उजागर करने वाली मौत की... जो अपने पीछे माइनिंग विभाग और पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर गई है।

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जबलपुर के खमरिया थाना क्षेत्र का मामला


जिले में लगे लॉक डाउन के बीच अवैध रेत खनन का काम जोरो पर है और बिना सांठगांठ के यह सब हो पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। यह बात हम नहीं कह रहे बल्कि हालात कुछ यही कहानी बयां कर रहे।
ताजा मामला वर्धाघाट ग्राम का है मटामर इलाके के चकरघटा घाट में अवैध खदान से रेत निकाल रहे एक युवक की खदान धंसने के कारण मौत हो गयी। और उसके बाद जो जानकारी सामने आई वह साफ-साफ विभागों की मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है।

कौन है मृतक मजदूर....
क्या कहना है मृतक के परिजनों का


मृतक मजदूर का नाम संजय चौधरी है ।जो कि मटामर गांव का रहने वाला था।
मृतक  के परिजनों ने बताया कि संतोष ( मृतक) संजु बर्मन का ट्रेक्टर चलाया करता था साथ ही लेबर का काम भी  किया करता था।गुरुवार की रात संजय मृतक के घर आकर उसे अपने साथ ले जाता है। बताया जा रहा है कि ट्रेक्टर मालिक संजु बर्मन रेत का अवैध काम किया करता था। जिसके लिए वो मृतक और कुछ अन्य मजदूरों को हिरण नदी के अवैध खदान में ले गया।

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जिस समय संतोष अवैध खदान से रेत निकाल रहा था तभी खदान अचानक ही भरभरा कर गिर गई। जिसकी चपेट में आने से संतोष दब गया।सूचना मिलने पर अवैध रेत खननकर्ता मौके पर पहुँचा और शव को लेकर रांझी स्थित सरकारी अस्पताल पहुँचा और ये बताया कि अचानक संतोष की तबियत खराब हो गई है।ईलाज के दौरान संतोष की मौत हो जाती है।

पुलिस पर परिजनों ने लगाए आरोप

मृतक के परिजनों का आरोप है कि जब इस हादसे की सूचना देने के लिए खमरिया थाने पहुँचे तो वहाँ पर उनकी एफआईआर दर्ज नही की गई। बाद में जब मामले की भनक पत्रकारों को लगी तो आनन फानन में पुलिस ने कार्यवाही करना शुरू किया।

लॉक डाउन में ट्राली भर भर कर ला रहे रेत......
पुलिस कह रही हमे नही पता...

मृतक की मौत अवैध खदान की गुत्थी को सुलझा गई लेकिन पुलिस प्रशासन के ऊपर एक बड़ा सवालिया निशान लगा गई । मृतक संतोष लॉक डाउन के दौरान भी रात में ट्रैक्टर मालिक के साथ अन्य लेवर लेकर अवैध खदान में जा रहा था और साफ़ बात है कि वहां से ट्राली में रेत भरकर लाता भी होगा। अब सवाल यह पैदा होता है की लॉक डाउन के दौरान किस तरीके की पुलिस गस्त हो रही थी ,कि पुलिस को इस खदान का और रात में उस में काम करने वाले आधा दर्जन से अधिक लोगों का पता ही नहीं चला। गौर करने वाली बात है कि रात के समय यदि अवैध उत्खनन होता है तो उन्हें प्रकाश की आवश्यकता पड़ती ही होगी लेकिन यदि पुलिस की माने तो उन्हें आज तक ना तो वहां से कोई आवाज सुनाई दी और ना ही कोई लाइट दिखाई दी मतलब साफ है कि.. पुलिस पेट्रोलिंग के नाम पर महज औपचारिकता कर रही थी।

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क्या कहता है माइनिंग विभाग

इस पूरी घटना के विषय में विकास की कलम ने माइनिंग विभाग के अधिकारियों से फोन पर संपर्क किया।बातचीत के दौरान शुरुआती तौर पर तो माइनिंग विभाग यह बताता रहा कि मीडिया के माध्यम से उन्हें खबर मिली है और उन्होंने माना कि वह अवैध खदान है इसलिए क्षेत्रीय थाना पुलिस के मदद से ही अग्रिम कार्यवाही की जाएगी। लेकिन जब विकास की कलम ने जिम्मेदारों से पूछा कि क्या आपने उस जगह का दौरा किया या वहां से कुछ स्टॉक की जब्ती बनाई तो अनायास ही जिम्मेदारों के मुंह से निकल गया कि वहां पर किसी भी तरीके का कोई स्टॉक नहीं है । जिम्मेदारों ने यह कहकर तो अपना पल्ला झाड़ लिया लेकिन विकास की कलम के पाठक समझदार तो है ही.....



बहरहाल शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा गया है साथ ही पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम की जांच में भी जुट गई है। पुलिस की माने तो वह ट्रेक्टर मालिक संजू बर्मन से सघन पूछताछ कर जल्द ही इस मामले का खुलासा करेगी।

विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार