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क्या हुआ बिलपुरा में..? क्यों सड़कों में उमड़ी भीड़..?? कौन है घटना का जिम्मेदार..???

क्या हुआ बिलपुरा में..?
क्यों सड़कों में उमड़ी भीड़..??
कौन है घटना का जिम्मेदार..???


Lock down break

जिम्मेदार 24 घंटे सोशल डिस्टेंसिंग से लेकर कोरोना संक्रमण से बचाव का गाना गा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जनता सैकड़ों की संख्या में सड़कों पर उत्तर आई खास बात तो यह है कि इस दौरान ना तो कोई जिम्मेदार अधिकारी पहुंचा और ना ही कोई पुलिस वाला और देखते ही देखते जबलपुर की गलियों में सोशल डिस्टेंस की जमकर धज्जियां उड़ाई गई। वह भी ऐसे समय जब कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

क्या है पूरा मामला.... क्यों उमड़ी भीड़


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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि संस्कारधानी जबलपुर में अचानक बढ़े कोरोना पॉजिटिवों की संख्या को देखते हुए जिला कलेक्टर भारत यादव ने 24 से 27 अप्रेल तक टोटल लॉक डाउन लगा दिया था। जिसमें आवश्यक विभागों और वस्तुओं की आपूर्ति को छोड़कर अन्य सभी संस्थानों को सख्ती से बंद करने के आदेश दे दिए गए थे। लेकिन 3 दिन बाद जैसे ही जबलपुर में सख़्ती कम हुई तो देखते ही देखते बाजारों में हजारों की भीड़ उम्र पड़ी

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आखिर कहां का है यह पूरा मामला

यह पूरी घटना जबलपुर के रांझी क्षेत्र में आने वाले बिलपुरा और गंगा मैया इलाके की है। जहां राशन दुकानों के सामने लोग  इतनी बड़ी तादाद में जुटे की सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की धज्जियां उड़ गई। 

आखिर किस कारण उमड़ी जनता की भीड़..
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दरअसल सरकार ने गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को 3 माह के मुफ्त राशन देने की घोषणा की है। ऐसी सूरत में जिन परिवारों ने अब तक राशन नहीं लिया है वे राशन पाने दुकानों के सामने डेरा डाल लिया। आखिरकार जिंदा रहने के लिए पेट तो भरना ही है और फिर भूखे पेट घरों में रहकर कितने दिन लॉक डाउन का पालन करते। लिहाजा ढील मिलते ही बस्ती से सैकड़ों की संख्या में लोग राशन दुकान पहुंचे और अपने हिस्से का राशन लेने की कवायद में जुट गए।

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क्या..? घटनास्थल पर नदारद थे जिम्मेदार

कैमरे में कैद हुई तस्वीरों को देखकर यह साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि राशन पाने की होड़ में भीड़ इतनी बेकभु हो गयी कि उसे नियमों की कोई परवाह नही रही। सिस्टम की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हजारों की तादाद में जुटी इस भीड़ को काबू में करने और उन्हें नियमों की जानकारी देने के लिए पुलिस का एक भी जवान मौके पर मौजूद नहीं था। 

विकास की कलम ने की जनता से बात
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कोरोना में लॉक डाउन के दौरान देश का प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी बखूबी समझता है। और वह जानता है की लॉक डाउन को तोड़ने का अंजाम, उन्हें संक्रमित होकर चुकाना पड़ेगा। वह यह भी जानता है कि यह बीमारी काफी खतरनाक है। बावजूद इसके ऐसा क्या कारण था ,जो गरीब जन इतनी बड़ी संख्या में पहुंच गए।
 इस पूरे मसले को लेकर विकास की कलम ने जनता से बातचीत की

क्या कहती है जनता कौन है जिम्मेदार

हितग्राही अविनाश कश्यप ने बताया कि यहां लंबे समय से राशन वितरण के लिए आम जनता को भटकाया है जा रहा है। इस बात की शिकायत कई बार क्षेत्रीय विधायक और पार्षद से की गई लेकिन शिकायतें होने के बावजूद भी राशन दुकान संचालक अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है

हितग्राही सरस्वती चौधरी ने हमें जानकारी देते हुए बताया कि लिस्ट में नाम होने के बावजूद भी पिछले 2 हफ्ते से उसे दर-दर भटकाया जा रहा है। हर बार राशन लेने आने पर सुबह से शाम हो जाती है। लेकिन राशन नहीं मिलता इसलिए आज वह तड़के सुबह से राशन दुकान के सामने खड़ी हो गई । इस आस में कि शायद आज उसे राशन मिल जाए।

वहीं राशन दुकान के सामने बैठी दिव्यांग हितग्राही हीरा पासी ने जानकारी देते हुए कहा कि पार्षद अपने चहेतों का नाम लिस्ट में डलवा कर ।उन्हें राशन उपलब्ध करवा रहा है वही हम विकलांगों को हर बार यह कह कर भगा दिया जाता है कि हमारा लिस्ट में नाम नहीं है इसकी शिकायत जब पार्षद से की गई तो उसने भी हमें यह कहकर भगा दिया कि जब तुम्हारा लिस्ट में नाम आएगा तो तुम्हें बुलवा लिया जाएगा।

घंटों बाद पहुंची नायाब तहसीलदार


राशन दुकान में बेकाबू होती हुई भीड़ को देखते हुए आसपास के लोगों ने जिम्मेदारों को फोन लगाया। सूचना मिलने पर नायाब तहसीलदार रूपेश्वरी कुंजाम घटनास्थल पर पहुंची और हालातों का जायजा लिया। यहां बेकाबू भीड़ अपने हक का राशन लेने के लिए काफी परेशान थी उन्होंने नया तहसीलदार से राशन वितरण करने वालों की शिकायत भी की जिस पर नायाब तहसीलदार ने जनता को भरोसा दिलाते हुए कहा कि यदि राशन वितरण में किसी भी तरीके की अनियमितता बरती जा रही होगी तो तत्काल ही संबंधित अधिकारी पर कार्यवाही की जाएगी उनके आश्वासन के बाद भीड़ शांत हुई और जनता ने अपने घरों की रवानगी ली।

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अब आप ही फैसला करें कौन है जिम्मेदार

राशन लेने आए कार्ड धारियों का कहना था कि राशन दुकानदार की मनमानी के चलते क्षेत्रवासी खासे परेशान हैं। लोगों का आरोप है कि पात्रता रखने के बावजूद भी राशन दुकानदार कार्ड धारियों को राशन न देकर बेवजह भटका रहा है। इन सबके बीच क्षेत्रीय पार्षद विधायक उनकी एक नहीं सुन रहे और सिर्फ अपने चहेतों को राशन दिलवाकर गरीबों के साथ अन्याय कर रहे हैं । 
महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार आए दिन गरीब जनता को लाभ पहुंचाने के नाम पर नित नई घोषणाएं कर रही है। लेकिन जमीनी हकीकत एक बहुत बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रही है। ऐसे में प्रदेश के मुखिया को चाहिए कि वह जनता की आवाज सुने। अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब जनता अपना फैसला सुनाएगी और कुर्सियां डगमगा जाएगी।

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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार