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सोमवार, 16 मार्च 2020

मिट्टी को तरसता कुम्हार-क्या खत्म हो जाएगी...कुम्भकारी??

 मिट्टी को तरसता कुम्हार-क्या खत्म हो जाएगी...कुम्भकारी??


(अमित श्रीवास्तव-सिवनी)

सिवनी जिले के आदिवासी विकासखंड कुरई के ग्राम पचधार में निवास करने वाले मिट्टी कलाकार इन दिनों मिट्टी के संकट से जूझ रहे है,मनचाही मिट्टी की कमीं के चलते,देश विदेश में अपनी अलग पहचान रखने वाली सिवनी की ये अनोखी कला... अब संकट में है..

यहां हर घर मे रहता है..कुम्भकारी का कलाकार.....


जिले का आदिवासी बाहुल्य विकासखंड कुरई,जहाँ स्थित है विश्व प्रसिद्ध पेंच टाइगर रिजर्व,और इसी से लगा है छोटा सा गांव पचधार, जिसकी लगभग पूरी आबादी मुख्य रूप से मिट्टी की कलाकृतियों को आकार देने का काम करती है,गीली मिट्टी को तरह तरह का आकार देते ये सधे हाथ..
 तरह तरह के बर्तन और खिलौनो के साथ साथ आदिवासी संस्कृति से जुडी कृति को ग़ढ़ते दिखाई देते है,इस अनोखे गांव में लगभग हर घर के सामने आप मिट्टी का ढेर और मिट्टी को आकार देने की क्षमता समेटे एक कुम्हारी चक्र देख सकते है।

पूरा परिवार तराशता है.. मिट्टी की कलाकृति.....


क्या बूढ़े,क्या जवान, बच्चे, माताएं बहिने सभी मिट्टी को अपनी अपनी परिकल्पना से नित नए आकार देने में माहिर है,बच्चे बड़े होकर अपने पिता की तरह माहिर कलाकार बनना चाहते है तो बेटियां शादी के बाद भी ससुराल में काम जारी रखना चाहती है,वहीं बहुएं अपने मायके में सिर्फ घड़े बनाना जानती थी तो यहां आकर गाँव की मिट्टी को अपनी कल्पना से नया आकार दे रहीं है,वे अपने बच्चों को भी इसी व्यवसाय में माहिर बनाना चाहती है।

विश्व भर में प्रसिद्ध है ये कलाकारी



 मिट्टी के ये अनोखे कलाकार इन बर्तन ,मटको, खिलौनों से होने वाली आमदनी से अपने को संतुष्ट बताते है,वे अब बोतल,थरमस,रोटी पकाने के तबे जैसे नए नए बर्तन भी निर्मित कर रहे है,वे बताते है कि उनकी निर्माण सामग्रियों की बड़े शहरों में अलग पहचान है,वे पेंच टाइगर रिजर्व के पर्यटकों से भी अच्छा व्यवसाय पा जाते हैं इस बात की सच्चाई जो भी हो पर इस व्यवसाय से संतोष के भाव उनके चेहरे पर अलग ही दिखाई देता है,तो उनकी आँखें रिजर्व फारेस्ट से मिट्टी नहीं मिल सकने के चलते अपने व्यवसाय का भविष्य खतरे में देखती निराश ही दिखाई देती है,*

मिट्टी ही नही तो कैसे चलेगा काम..

 मिट्टी के इन कलाकारों ने बताया कि वे पहले जंगल से मिट्टी लाकर निर्माण करते थे जो अब वन विभाग की सख्ती के चलते अब पूरी तरह बंद है,वे अब खेतों की मिट्टी को घर के बाहर एक गड्ढा करके सहेज कर रख लेते है और उपयोग के अनुसार निकाल कर निर्माण करते हैं, उन्हें अब पता है कि जंगल से मिट्टी लाना कानूनन जुर्म है,पर खेतों की मिट्टी रेतीली ओर पथरीली होने से उन्हें निर्माण करने में परेशानी जाती है, इसलिए इन कारीगरों को अपने व्यवसाय को आस्तित्व में बनाये रखने और रोजी रोटी की चिंता सता रही है,वे शासन से जल्द ही कोई उचित व्यवस्था की बाट जोह रहे हैं।*

विकास की कलम ने की जिम्मेदारों से बात...

क्षेत्र की संस्कृति को विश्व भर में पहचान दिलवाने वाले यह कुम्हार आज खुद के अस्तित्व को बचाने में जुटे हैं।
 हमने मिट्टी के इन कलाकारों की तकलीफ को जब ग्राउंड ज़ीरो से जाना । और फिर उनकी आवाज को जिम्मेदारों तक पहुंचाया।

खुद के नियमों से मजबूर है वन विभाग


पचधार के कुम्हारों की इस दशा के विषय में हमने वन क्षेत्राधिकारी से मुलाकात कर उन्हें पूरे प्रकरण से अवगत कराया। जिम्मेदारों ने पहले तो कुंभ कारों की इस स्थिति के प्रति खेद जताया और बाद में जब हम मामले की तह तक पहुंचे तो हमें जानकारी मिली की वन विभाग खुद के बनाये नियमों के चलते बाध्य है ,और किसी भी स्थिति में जंगल की मिट्टी कलाकारों को नहीं उपलब्ध करा सकते है।
 पी.पी.टीटारे DFO दक्षिण वन क्षेत्र सिवनी

कलेक्टर ने दिया आस्वासन- मामले में करेंगे शासन से बात


हमने जिला के कलेक्टर प्रवीण सिंह से बात की तो उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से इन कुंभकारों को मिट्टी के लिए गांव के पास लीज पर जमीन दी गयी है बावजूद इसके उन्हें हमसे जो इनपुट मिला है कि कलाकारों को वर्तमान में माटी को लेकर परेशानी है तो जल्द ही इसके निराकरण के लिए शासन को लिखा जाएगा,और ठोस व्यवस्था बनाई जाएगी।
श्री प्रवीण सिंह अढ़ायच कलेक्टर सिवनी

आस्वासन की आग में भस्म न हो जाये कला..

पचधार के कुम्हार ना तो ज्यादा पढ़े लिखे हैं और ना ही उन्हें कोई और काम आता है वे तो बस पुश्तैनी विरासत में कुंभ कारी का काम सीखते आ रहे लेकिन मिट्टी के संकट में अधिकतर युवा अपनी संस्कृति की विरासत को छोड़कर मजदूरी की काम की तलाश में गांव छोड़कर शहर की ओर दौड़ लगा रहे हैं और यदि यह सिलसिला यूं ही जारी रहा तो वह दिन दूर नहीं जब किससे और कहानियों में कुम्हार का चाक और मिट्टी के बर्तन सीमित हो जाएंगे।
अब देखना होगा कि शासन इन मिट्टी के कलाकारों की समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और उनके इस मिट्टी के संकट को कितने जल्दी दूर करता है।


विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
(लेखक विचारक पत्रकार)

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