पोस्टर लगावे पैसा है-दक्षिणा देवे नई.. नर्मदा गौ कुम्भ में बिफरे साधु संत... - VIKAS KI KALAM,Breaking news jabalpur,news updates,hindi news,daily news,विकास,कलम,ख़बर,समाचार,blog

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पोस्टर लगावे पैसा है-दक्षिणा देवे नई.. नर्मदा गौ कुम्भ में बिफरे साधु संत...

पोस्टर लगावे पैसा है-दक्षिणा देवे नई..
नर्मदा गौ कुम्भ में बिफरे साधु संत...


बात चाहे किसी बड़े आयोजन की हो या फिर घर में होने वाले छोटे पूजा पाठ की सभी का प्रयास होता है कि आयोजन में उपस्थित हुआ संत या पुजारी क्रोधित ना हो। यही कारण है कि हम अक्सर अच्छी दान दक्षिणा देकर संत समाज और ब्राह्मण देवता को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं क्योंकि एक मान्यता है कि यदि संत समाज या ब्राम्हण नाराज हो जाए तो आयोजन विफल माना जाता है।
यदि ब्राह्मण को स्वादिष्ट भोजन कराकर वस्त्र और दान दक्षिणा दी जाती है तो वह प्रसन्न होकर दोनों हाथों से आशीर्वाद देता हुआ खुश होकर जाता है। इतनी समझ तो समाज के हर तबके में होती है



लेकिन जबलपुर में 24 फरवरी से आयोजित नर्मदा गौ कुंभ.. नामक भव्य आयोजन में छठवें दिन साधु संतों के अचानक क्रोधित होने से एक नई कहानी सामने आ गई। संतों की मानें तो उन्हें एक नियत दक्षिणा तय कर इस आयोजन में बुलाया गया था। लेकिन उसके बाद उन्हें दक्षिणा देने के नाम पर आनाकानी की जा रही थी। जिससे नाराज कुछ साधुओं ने हंगामा शुरू कर दिया।


आयोजकों से नाराज संतों ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें एक नियत राशि के तहत आयोजन में बुलवाया गया है लेकिन जब उक्त राशि जिसे दक्षिणा का नाम दिया गया नहीं मिली , तो संत बिफर गए और उन्होंने आयोजन स्थल पर ही हंगामा करना शुरू कर दिया। वह बार-बार दो टूक शब्दों में आयोजकों द्वारा किए जा रहे शोषण की कहानी बखान करते रहे। कुछ संतो ने तो यह तक कह डाला की यदि पहले पता होता कि इतनी समस्याएं होंगी तो वे इस आयोजन में शामिल ही नहीं होते।

कौन डकारना चाहता है संतों की दक्षिणा

जिला कलेक्टर के अनुसार नर्मदा गौ कुंभ एक सरकारी आयोजन है तो स्वाभाविक है सरकार द्वारा एक विशेष पैकेज संतो के लिए आया होगा। उसके साथ ही संतो के रहने खाने एवं आवागमन की संपूर्ण व्यवस्था के लिए भी एक विशेष वित्त निर्धारित किया गया होगा। लेकिन आयोजन स्थल पर संतो के बिखर जाने से एक बात तो साफ हो गई है कि कहीं ना कहीं संतों की दक्षिणा को भी डकारने का पूरा पूरा प्रयास किया गया है।

बीते दिन व्यवस्था ना होने से भड़क गए थे नागा साधु

नर्मदा गौ कुंभ में बुधवार की सुबह 11:00 बजे के लगभग व्यवस्था ना होने पर कुछ नागा साधु भड़क गए। दरअसल एक नागा साधु ने अपनी धूनी प्रवेश द्वार के पास लगा ली। जिस पर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई इसके बात पर विवाद बढ़ गया ।

इसी दौरान वहां राजस्थान के महामंडलेश्वर सरजू दास महाराज निकले और उन्होंने नागा साधुओं को समझाइश दी।
 इससे मामला और बिगड़ गया। नागा साधु के पक्ष में खड़े श्वरी बाबा आ गए और कहने लगे कि 2 दिन से आए हैं यहां संतो के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है अगर व्यवस्था नहीं करनी थी तो हमें बुलाया क्यों अन्य साधुओं के समझाने के बाद खंडेश्वरी बाबा का गुस्सा शांत हुआ

पहले पैसे देकर बुलाया अब कहते हैं दिक्कत है तो चले जाओ


दक्षिणा ना मिलने से साधुओं की एक टोली इतनी नाराज हुई कि उन्होंने अपनी भड़ास आज मीडिया के सामने ही निकाल ली ।साधु-संतों ने अपना विरोध प्रदर्शन प्रगट किया और उन्होंने इस तरह की व्यवस्था के खिलाफ कहां की व्यवस्थापक झूठे है, झूठे आश्वासन देकर हमें बुला लिया है,
पहले बोला पहुंचते ही दक्षिणा मिलेगी
फिर बोले 1 दिन बाद दे देंगे
और अब कहते हैं आखिरी दिन दक्षिणा दी जाएगी
ज्यादा समस्या हो तो चले जाओ,
इसलिए साधु-संतों ने निर्णय लिया है कि वह वापस चले जाएंगे।


संतों की लड़ाई से आयोजन की छवि धूमिल

नर्मदा को कुंभ में शामिल होने देश के कोने कोने से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं,मन में आस्था का सैलाब लिए श्रद्धालु संतों का दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का विश्वास लेकर आयोजन स्थल पहुंच रहे हैं। लेकिन जब आयोजन स्थल पर श्रद्धालु संतो को नाराज और झगड़ते हुए देखते हैं तो कहीं ना कहीं उनके मन में इस आयोजन के प्रति कुछ और ही छवि निर्मित हो रही है । जिस संत का आशीर्वाद लेने उन्होंने अपना धन और समय नष्ट किया यदि आयोजन स्थल पर वही नाराज मिला तो फिर कुंभ नहाने और संत दर्शन का क्या फायदा??

पानी की तरह बह रहा पैसा फिर भी दक्षिणा में कमी क्यों

संतो को महज छोटी सी दक्षिणा के लिए नाराज होते देख गौ कुंभ में आए अनेकों श्रद्धालुओं के मन में बस एक ही बात घर कर रही है। चारों ओर जहां भी नजर जाती है बड़े-बड़े भव्य बैनर और पोस्टर जबलपुर को घेरे हुए हैं कई नामी-गिरामी हस्तियों ने अपने भंडार के कोष भी खोल दिए हैं। इतना ही नहीं बड़े-बड़े कलाकारों को भी पैसे देकर इस नर्मदा को कुंभ की शोभा बढ़ाने के लिए प्रस्तुतियां देने बुलाया है। इन सबके बीच यदि ब्राह्मण देवता की दक्षिणा पर डाका डालने की बात आती है तो बात अटपटी लगेगी ही क्योंकि यदि इतना पैसा खर्च किया गया है तो फिर दक्षिणा देने में आनाकानी करेगा कौन??

कहीं बिचौलिए तो नहीं करवा रहे हंगामा

इस पूरे प्रकरण में एक बात और सामने आई है जहां पर एक संत नाराज होते हुए यह कह रहे थे कि उन्हें फला फला पैसे तय करके लाया गया था और उसी दक्षिणा के चलते उन्होंने अपने साथ अन्य साधु संतों की फौज भी जुटाई अब सवाल यह होता है की इन साधु संतों का मुख्य मुखिया कौन है जो इन्हें दिनदहाड़ी  पर तय कर यहां तक लाया है और आखिरकार कितने पैसे में ठेका तय हुआ और यदि तय भी हुआ तो फिर पैसे दिए क्यों नहीं गए। आयोजकों ने संत समाज को कितने पैसों की दक्षिणा लेकर बुलाया और हकीकत में संतों तक कितनी दक्षिणा पहुंची यह वाकई में जांच का विषय है क्योंकि नर्मदा के पावन तट से यदि इतने बड़े आयोजन में कोई संत नाराज होकर जाता है तो उसकी भरपाई संस्कारधानी की जनता को आगे करनी होगी।

विकास की कलम

चीफ एडिटर
विकास सोनी
(लेखक विचारक पत्रकार)