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रविवार, 16 फ़रवरी 2020

काय.. अब तीरथ ने कराहों का..??? राजनैतिक प्रतिद्वंदिता में अटकी मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना।

काय.. अब तीरथ ने कराहों का..??? राजनैतिक प्रतिद्वंदिता में अटकी मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना।

कुछ साल पहले प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुजुर्गों को निशुल्क तीर्थ यात्रा कराने के लिए मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना की शुरुआत की थी। अपनी उम्र के पड़ाव में 60 सावन देख चुके बुजुर्गों ने इस योजना को काफी सराहा ।हर धर्म और संप्रदाय के बुजुर्गों को धार्मिक स्थानों पर ले जाकर उन्हें तीर्थ कराने का फैसला आम जनता के बीच काफी सराहनीय रहा ।जिसे लेकर ना केवल बुजुर्ग बल्कि हर तबके का इंसान काफी उत्साहित था लेकिन केंद्र हो या फिर राज्य.... सरकार बदलने के साथ-साथ बदल जाते हैं नियम,कानून योजनाएं और जनता की आशाए। नई सरकार का नया बजट होता है और नए बजट के हिसाब से नई सरकार नई योजनाओं को चलाती है और इसमें अक्सर पुरानी योजनाएं या तो बंद कर दी जाती हैं या फिर उन्हें बदल कर नई सरकार के हिसाब से पेश किया जाता है। और इन सबके बीच लाभान्वित हो रही जनता एक बार फिर राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता का शिकार हो जाती है। कुछ ऐसे ही हाल इन दिनों मध्य प्रदेश की जनता के हैं। जिन्होंने पूर्व भाजपा सरकार की योजनाओं का लाभ चखा ही था, कि अचानक आए सत्ता परिवर्तन से सारी योजनाएं ठप हो गई और अब प्रदेश की जनता एक बार फिर से राह निहार रही है, कि नई सरकार किस तरीके से जनता को लाभान्वित करवाएगी।

क्या है मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना


मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना प्रदेश के 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को उनके जीवन काल में एक बार प्रदेश के बाहर के निर्धारित तीर्थ-स्थानों में से किसी एक स्थान की यात्रा के लिए राज्य सरकार सहायता देती है। प्रथमतः आई.आर.सी.टी.सी. (रेलवे) के पैकेज के अनुसार यात्रियों को भेजा जाएगा। योजना 3 सितम्बर 2012 को रामेश्वरम् की यात्रा के साथ प्रारंभ हुई।
तीर्थ दर्शन योजना में राज्य शासन ने वर्तमान में श्री बद्रीनाथ, श्री केदारनाथ, श्री जगन्नाथपुरी, श्री द्वारकापुरी, हरिद्वार, अमरनाथ, वैष्णोदेवी, शिरडी, तिरूपति, अजमेर शरीफ, काशी, गया, अमृतसर, रामेश्वरम, सम्मेद शिखर, श्रवण बेलगोला और बेलांगणी चर्च, नागापट्टनम तीर्थ को शामिल किया है।

नई सरकार के नए बजट में फिट नहीं बैठी तीर्थ दर्शन योजना

वित्तीय संकट से निपटने और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं को अमली जामा पहनाने को लेकर खर्चों में कटौती करने के लिए चल रही कवायद के बीच मध्यप्रदेश सरकार ने करीब 4,000 बुजुर्गों की तीर्थयात्रा पर रोक लगा दी है। ये सभी प्रदेश सरकार के तहत चलाए जा रहे 'मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना' के अंतर्गत 15 फरवरी से शुरू होने वाली पांच ट्रेनों में वैष्णो देवी, काशी, द्वारका और रामेश्वरम जाने वाले थे। 
प्रदेश सरकार के संबंधित विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया, "मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत चलने वाले 'पांच तीर्थ दर्शन ट्रेन' कार्यक्रम जो कि 15 फरवरी से शुरू होकर 2 मार्च तक चलना था, को अनिवार्य कारणों से रद्द कर दिया गया है।"

इस आदेश की कॉपी 13 जिला कलेक्टरों के साथ ही आईआरसीटीसी को भी भेजी गई है। राज्य सरकार की तीर्थ योजना का लाभ उठाने के लिए इन तीर्थयात्रियों को भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और मालवा-निमाड़ के साथ ही प्रदेश के अन्य जिलों से चुना गया था। विभाग के हालिया आदेश के मुताबिक, पांच में से पहली ट्रेन 15 फरवरी को 800 तीर्थयात्रियों के साथ वैष्णो देवी के लिए भोपाल से रवाना होने वाली थी।

मंत्री गोविंद सिंह ने तीर्थ दर्शन योजना को बताया फिजूलखर्ची..

सहकारिता मंत्री गोविंद सिंह ने सरकार की तीर्थ दर्शन योजना को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने इस योजना को फिजूलखर्ची बताया। 
उन्होंने कहा-मेरा व्यक्तिगत मानना है कि धार्मिक आयोजन कराना सरकार का काम नहीं है। मैं सरकार के खर्च पर तीर्थयात्रा के खिलाफ हूं। इसमें खर्च होने वाली राशि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर लगाया जाना चाहिए।
मंत्री सिंह ने कहा-तीर्थ दर्शनयोजना में लोग भक्ति भाव से नहीं, बल्कि घूमने-फिरने के लिए जाते हैं। उन्होंने लोगों को सलाह देते हुए कहा कि खुद केमेहनत के रुपयों से भगवान के दर पर जाएंगे तो उनके जीवन में खुशहाली आएगी। ऐसी योजनाएं विकास के बजाय सिर्फ वोटरों को लुभाने के लिए शुरू की गई हैं।अब उन्हें बंद किया जाना चाहिए।

गोविंद सिंह के बयान पर शिवराज का पलटवार



प्रदेश के सहकारिता मंत्री गोविंद सिंह के इस बयान 
पर शिवराज ने पलटवार किया है। शिवराज ने कहा कि कांग्रेस सरकार क्या भावनाओं को समझेगी।
हर अच्छे काम को बंद कर रही कमलनाथ सरकार पर
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीर्थ दर्शन योजनाके तहत ट्रेन निरस्त होने पर कड़ी अपत्ति जताई।पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा- ये भावनात्मक संबंधों को क्या समझेंगे। जो सक्षम और समर्थ नहीं हैं, उन बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा करवाना पवित्र कार्य है। उन्हें (कांग्रेस सरकार) तो हर अच्छे कामों को बंद करना है, वे यही कर रहे हैं।


मंत्री गोविंद सिंह के बचाव में उतरे मंत्रियों के बयान

सामाजिक न्यायमंत्री लखन घनघोरिया ने योजना को सुचारू रूप से जारी रखने का पक्ष लिया।
 
केबिनेट मंत्री लखन घनघोरिया ने कहा कि किस संदर्भ में उन्होंने कहा वे नहीं जानते लेकिन वे अनुभवी मंत्री हैं, जमीन से जुड़े नेता हैं। यदि वे कह रहे हैं तो विषय गंभीर है उनका आशय यह है कि इसमें जो भ्रष्टाचार और पक्षपात होता है उसको बंद करने का है। तीर्थदर्शन कोई बंद नहीं कर सकता इसमें हमारी आस्था है। जिस प्रकार से इसमें लोगों को चिन्हित करके ले जाया जाता था उसका गोविंद सिंह ने विरोध किया होगा।

राज्य सभा संसद विवेक कृष्ण तंखा का बयान

 सहकारिता मंत्री डॉ गोविंद सिंह द्वारा दिये गए तीर्थ दर्शन योजना फिजूल खर्ची बयान को लेकर और उसे बंद किये जाने की बात पर सांसद विवेक तन्खा ने कहा कि ये उनकी सोच है वो किसी की आलोचना नही करते। उन्हें राजनीति का अच्छा अनुभव है उन्होंने किसी खास बिंदु को ध्यान रखते हुए यह बात बोली होगी। यदि व्यक्तिगत बात की जाय तो सभी बुर्जगों की आखरी तम्मना होती है कि वह तीर्थ करने जाए,,औऱ किसी को खुसी पहुचाने में मुझे दर्द नही होगा।

प्रदेश के पर्यटन मंत्री ने कहा-मुख्यमंत्री से  करूँगा चर्चा

निजी कार्यक्रम में जबलपुर पहुँचे मध्यप्रदेश सरकार के पर्यटन मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल ने तीर्थ दर्शन योजना बन्द किये जाने के बयान से  मचे घमाशान को लेकर गर्म हुई राजनीति पर मीडिया से बात करते हुए कहा की  कि इस संबंध में मुख्यमंत्री कमलनाथ से चर्चा की जाएगी।उसके बाद ही निर्णय लिया जाएगा। उपरोक्त बयानों को लेकर गोविंद सिंह जी की क्या मंशा है इस पर भी चर्चा की जाएगी।

महिला बाल विकास मंत्री ने की तीर्थ दर्शन योजना की पैरवी


महिला बाल विकास मंत्री इमरती देवी का कहना है कि तीर्थ दर्शन योजना अच्छी योजना जिसे बन्द न किया जाए।उन्होंने ये भी कहा की गरीब तबके के वो लोग जो कि जो कि अपने माता-पिता को तीर्थ नही करवा सकते थे वो इस योजना के तहत तीर्थ करवा रहे है।और ये एक अच्छी योजना है।

कहानी में ट्विस्ट..जनता के जहन के सवाल

एक ओर कमलनाथ सरकार के सहकारिता मंत्री डॉक्टर गोविंद सिंह फिजूलखर्ची का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना को बंद कराने की बात कह रहे हैं। वही कमलनाथ सरकार द्वारा कराए जा रहे आईफा अवार्ड को प्रदेश के लिए हितकारी कदम बता रहे हैं।
आईफा अवार्ड पर खर्च होने वाली राशि को लेकर मंत्री गोविंद सिंह ने कहा है कि इसके जरिए प्रदेश के पर्यटन स्थलों को एक अलग पहचान मिलेगी और हजारों लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे. इसलिए आईफा अवार्ड प्रदेश के विकास के लिए जरूरी है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है, की यदि प्रदेश के अंदर आईफा अवार्ड जैसे आयोजनों के लिए करोड़ों रुपए का बजट है तो आम जनता दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए शुरू की गई तीर्थ दर्शन योजना फिजूलखर्ची कैसे हो गई। तीर्थ दर्शन की चाह रख रहे बुजुर्गों के मन में यह बात भी गूंज रही है कि कहीं ऐसा तो नहीं की तीर्थ दर्शन योजना में आने वाले खर्च को आइफा अवॉर्ड में लगाकर बॉलीवुड की हस्तियों की आवभगत की जाएगी।

अब सभी की नजरें प्रदेश के मुखिया कमलनाथ के आगामी आदेश पर टिकी है। और सभी आस लगाए बैठे हैं , कि उन्होंने जिस कमलनाथ को अपने विश्वास और अमूल्य मत से बहुमत देकर गद्दी पर बैठाया है। कम से कम वह तो उनके बुढ़ापे का सहारा बनेंगे और जीवन के अंतिम पड़ाव में तीर्थ दर्शन कराने का पुण्य लाभ लेंगे।

विकास की कलम

चीफ एडिटर 
विकास सोनी 
(लेखक विचारक पत्रकार)

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