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शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2020

समझो निपटई गई (पार्ट 2) और कितनी जांच करवाओगे ...साहब...

समझो निपटई गई (पार्ट 2) और कितनी जांच करवाओगे ..साहब....


देहातों में एक कहावत बहुत प्रचलित है चित भी मेरी... पट भी मेरा............. अंटा मेरे...... का

यानी... जांच भी मेरी, जांच करने वाले भी मेरे और दोषी तो मैं हूं ही.....
कुछ इसी अंदाज में एनएचएम के महा घोटाले की जांच चल रही है.... या यूं कहें सरक सरक कर समय काट रही है। और दोषी पूरी शानो शौकत के साथ अपनी गद्दी पर बैठ कर चाटुकारिता के चद्दर से अपने गुनाहों को ढांकने का प्रयास कर रहे हैं। और हो भी क्यों ना क्योंकि दोषी कोई और नहीं बल्कि विभाग के सबसे आला अधिकारी की पैरवी पर एक बड़े पद पर आसीन हैं क्या मजाल छोटे अधिकारी की जो एक शब्द बोल जाए। और इन सब के बीच आम जनता इंतजार कर रही है कि कब जांच पूरी हो और कब दोषियों को सजा प्राप्त हो।

लेकिन विकास की कलम इनके मंसूबों पर पूरी नजर रखे हुए हैं

कहानी फ्लैशबैक की

विकास की कलम में हमने अपने पाठकों को पिछली बार बताया कि कैसे पद का दुरुपयोग करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एनएचएम की ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ रंजना गुप्ता और  जिला कोऑर्डिनेटर रीता बहरानी की सांठगांठ के चलते

20 लाख रूपयों का घोटाला किया गया। इस पूरे प्रकरण में जानबूझकर गरीब बच्चों की जांच बिना सरकारी डॉक्टरों के अभिमत लिए डॉ रंजना गुप्ता के बेटे और बहू के चिकित्सालय में उनका उपचार कराया गया और फिर पूरी सेटिंग के साथ 20 लाख रूपयों का बिल लगाते हुए उसका भुगतान भी करवा लिया गया।


विकास की कलम से नहीं बच पाएंगे घपलेबाज


घपले बाजों ने बड़े ही शातिर तरीके से अपने कारनामों को अंजाम तो दे दिया लेकिन वह भूल गए कि झूठ कितने ही रफ्तार से क्यों न भागे आखिरकार वह पकड़ा ही जाता है, ठीक वैसा ही हुआ जैसे ही  यह मामला विकास की कलम के संज्ञान में आया वैसे ही घपले बाजों के खेमे में हलचल मच गई।
मामले की तफ्तीश करते हुए विकास की कलम ने बाल की खाल नोचना शुरु कर दिया और कहानी के एक-एक किरदारों से मुलाकात शुरू कर दी। शुरुआती दौर पर इन शातिरों ने मामले को घुमाने का बेहद प्रयास किया लेकिन आखिरकार विकास की कलम के धारदार सवालों के आगे इनकी एक ना चली और पूरे मामले का खुलासा हो गया।

आखिर कब तक लिया जाएगा जांच का सहारा

इस खुलासे के बाद से ही जांच के दौर शुरू हो गए हैं ...कभी इसकी जांच कभी उसकी जांच और इस जांच की आड़ में सिर्फ और सिर्फ समय को काटा जा रहा है । शुरुआती तौर पर जब हंगामा मचा तो पहले तो निजी स्तर पर पूरे मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया गया।


विकास की कलम ने स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट से मुलाकात कर इस पूरे मामले को उनके संज्ञान में लाया। तब लगा कि शायद अब दोषियों पर कार्यवाही होगी लेकिन कहां साहब... यह तो शुरुआत थी । इसके तत्काल बाद सीएमएचओ जबलपुर से जांच रिपोर्ट मांगी गई 1 सप्ताह के बाद सीएमएचओ जबलपुर में अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जोकि कलेक्टर कार्यालय जाकर खामोश सी हो गई।  उसके बाद डीएम लेवल पर भी जांच शुरू कराई गई फिर वह जांच ठंडे बस्ते में चली गई। और अब भोपाल से आरबीएसके की टीम जांच करने आई है।

उसके बाद

भोपाल तक पहुंचा पूरा मामला

जबलपुर में हंगामे का हल्ला मचते ही खबर जंगल में आग की तरह फैल गई और चारों ओर से इस महा घोटाले के खिलाफ आवाज बुलंद होने लगी। मामला स्वास्थ्य मंत्री के संज्ञान में आते ही भोपाल के गलियारों में भी इस घोटाले की कानाफूसी शुरू हो गई आपको बता दें कि इस पूरे गड़बड़ झाले में एनएचएम की डॉ रंजना गुप्ता के ऊपर अपने ही लड़के और बहू के अस्पताल में मरीजों का इलाज करवा कर भुगतान प्राप्त करवाने का आरोप है क्योंकि डॉ रंजना गुप्ता एक बेहद प्रतिष्ठित पद पर आसीन है लिहाजा कोई भी छोटा अधिकारी इस मामले में अपनी कलम फसाने से बच रहा है।

भोपाल से जांच करने आई एडिशनल डायरेक्टर

मामले की अब तक चली जांच के ऊपर भी उस जांच की जांच को....जांचने परखने  भोपाल से  आरबीएसके की एडिशनल डायरेक्टर सलोनी सिडाना बुधवार को जबलपुर पहुंची। उन्होंने विक्टोरिया अस्पताल स्थित आरबीएसके कार्यालय पहुंचकर आरबीएसके के मामले और दस्तावेज की छानबीन की । इस दौरान उन्होंने जबलपुर टीम के कई जिम्मेदारों के साथ पूछताछ की और सभी से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया।

एडिशनल डायरेक्टर से विकास की कलम ने की मुलाकात

उपरोक्त मामले की जांच करने भोपाल से आई एडिशनल डायरेक्टर सलोनी सीडाना से विकास की कलम ने खुलकर बातचीत की इस दौरान आरबीएसके की एडिशनल डायरेक्टर सलोनी सिडाना ने बताया की उनके द्वारा दोनों पक्षों से बातचीत और पूछताछ की गई है इसके साथ ही उन्होंने पूरे मामले में सीएमएचओ की जांच रिपोर्ट को भी देखा है प्रथम दृष्टया उनके अनुसार भी पद का दुरुपयोग कर वित्तीय अनियमितता करने की बात स्वीकार की गई इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया की जिनका उपचार जिला अस्पताल में हो सकता था उन्हें जानबूझकर बाहरी केंद्रों में भेजा गया। दोषियों पर कार्यवाही होने के सवाल पर एडिशनल डायरेक्टर ने विश्वास दिलाया कि जल्द ही दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।

घपलेबाजों की कानाफूसी

विकास की कलम के सूत्र बताते हैं कि मामले के उजागर होने के बाद से ही शहर से लेकर भोपाल तक के कई रसूखदार इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने की पैरवी की है। इतना ही नहीं अपने पद का इस्तेमाल करते हुए कई बार पूरे मामले की जांच को प्रभावित करने का भी काम किया है। लेकिन इनके मंसूबे कामयाब ना हो सके। बहरहाल जांच जारी है अब देखना यह होगा की मामले की जांच पर चल रही जांच किसी निर्णायक मोड़ पर पहुंचती है या फिर इस जांच की जांच के ऊपर एक और जांच बिठाकर दोषियों को और राहत पहुंचाई जाएगी।

विकास की कलम

चीफ एडिटर
विकास सोनी 
(लेखक विचारक पत्रकार)


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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार