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बुधवार, 5 फ़रवरी 2020

गुंडाभाई... MBBS..घर जाके धमका रए.....मरीजन खें....

गुंडाभाई... MBBS..घर जाके धमका रए.....मरीजन खें....


डॉक्टरी का पेशा काफी संवेदनशील समझा जाता है, जहां पर डॉक्टर को विनम्र रहकर पीड़ित मरीज और उसके परिजनों के साथ मानवीयता का परिचय देना होता है। चिकित्सकीय जगत में आने से पहले ही डॉक्टरों को एक विशेष शपथ दिलाई जाती है जिसे लोग डॉक्टर-ओथ  के रूप में जानते है।
चिकित्सा का क्षेत्र मानवता से जुड़ा होता है। लेकिन डॉक्टर इसे भूलते जा रहे हैं। डॉक्टरों को ईश्वर ने मानवता की सेवा के लिए चुना है। ईमानदारी से ड्यूटी उनकी जिम्मेदारी है। 
डॉक्टर न सिर्फ मानवता की सेवा कर सकता है, बल्कि अपने जीवन ऋण से भी मुक्त हो सकता है। उन्हें सदैव अपने पेशे की चुनौतियों को स्वीकार करनी चाहिए तथा डॉक्टरी पेशे की गरिमा को बनाए रखना चाहिए,क्योंकि मानवता की सेवा का अवसर सबको नहीं मिलता। डॉक्टरी का पेशा सिर्फ पैसा कमाने के लिए नहीं है। यह व्यवसाय मानवीय मूल्यों पर आधारित है। 
कहते है कि....मरीज को पीड़ा से मुक्त होने पर जो सुख मिलता है, उससे भी अधिक खुशी डॉक्टर को होती है। 
लेकिन ये सब बातें अब किस्से कहानियों में दर्ज हो कर ही रह गयी है।

 सोचिए..?? क्या हो जब... डॉक्टर अपने व्यवहार से कुछ ऐसा दिखा जाए कि लोग कहने पर मजबूर हो जाए की यह
 डॉक्टर है... या.... गुंडा भाई MBBS

क्या है मामला..गुंडा भाई MBBS..का

मामला कुछ महीने पुराना है जहां कटनी जिले के स्लीमनाबाद में रहने वाले मोहम्मद गुलफाम ने जबलपुर के एक डॉक्टर का ऐसा रूप भी देखा की अब वह डॉक्टर नाम से भी नफरत करने लगा है।
दरअसल मोहम्मद गुलफाम ने 28 दिसंबर को जबलपुर के नोदरा ब्रिज स्थित डॉ.अंकित अग्रवाल के अस्पताल इन्फनीटी हार्ट इंस्टीट्यूट में अपने परिजन को हार्ट के ईलाज हेतु भर्ती करवाया था।मरीज के पास आयुष्मान  योजना कार्ड होने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने उनसे 50 हजार रु ले लिए। इलाज के बाद जब आयुष्मान योजना से संबंधित अधिकारियों का फोन मरीज के परिजनों के पास आया तब उन्हें अपने साथ हुए धोखाधड़ी का अंदाजा हुआ । अधिकारियों ने बताया की इलाज पूर्णता निशुल्क है और आयुष्मान योजना के तहत उन्हें अस्पताल में किसी भी राशि का भुगतान नहीं करना है। अपने साथ हुई ठगी की शिकायत मोहम्मद गुलफाम ने ओमती थाना में की है।

शिकायत के बाद से ही समझौते में लगा गुंडाभाई..MBBSS

पीड़ित परिजनों की तरफ से मोहम्मद गुलफाम ने धोखाधड़ी की शिकायत  जबलपुर के ओमती थाने में कर दी ।पुलिस में हुई शिकायत के चलते डॉ अंकित अग्रवाल बेहद घबरा गए और उनके कारनामे मीडिया में न उछल जाए। इस बात के डर के चलते उन्होंने अपने चाचा  पप्पू अग्रवाल को समझौता करने के लिए मोहम्मद गुलफाम के घर भेजा और ये कहा कि हमसे गलती हो गई है और हम आपके 50 हजार रु वापस कर देंगे। इस बात को यहीं खत्म कर दो....

समझौता करने पहुंचे व्यक्ति का परिजनों ने बनाया वीडियो

पुलिस में हुई शिकायत के बाद से ही अपनी कारगुजारीओ को छुपाने के लिए डॉक्टर अंकित अग्रवाल द्वारा पीड़ित परिजनों से लगातार संपर्क किया जा रहा था और एक दिन तयशुदा समय पर डॉक्टर की तरफ से पैरवी करने पप्पू अग्रवाल पीड़ित परिजन के घर पहुंच गए 
एहतियातन तौर पर पीड़ित परिजनों के साथ दोबारा धोखा ना हो इसके चलते पीड़ित परिजनों ने डॉक्टर का प्रतिनिधित्व करने आए पप्पू अग्रवाल का पूरा वीडियो बना दिया। जिसमें यह साफ समझ में आ रहा है कि किस तरह से पप्पू अग्रवाल डॉक्टर अंकित अग्रवाल की पैरवी करते हुए आयुष्मान योजना के नाम पर लिए गए ₹50000 को वापस करने की बात कह रहे हैं।


पैसे देने की बात कहकर मुकरा.. गुंडा भाई-MBBS

धोखाधड़ी के विश्वविद्यालय में पीएचडी कर चुके डॉक्टर ने आखिर वही किया जिसका अंदेशा पीड़ित के परिजनों को पहले से ही था। पुलिस द्वारा शिकायत पर कार्यवाही की बात होने पर पहले तो
 डॉक्टर अंकित अग्रवाल ने पैसे देने की बात कही, लेकिन बाद में वह ना नुकुर करने लगा और बात को टालते हुए दिन पर दिन व्यतीत करने लगा। यहां मध्यमवर्गीय परिवार से संबंधित गुलफाम और उसके परिजनों ने अब तक दगाबाज डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्यवाही करवाने का मन बना लिया था । इस बीच एक बार फिर से डॉक्टर ने अपना असली रूप दिखाया और जहां पहले पीड़ित के परिजनों को प्यार से पैसे लौटाने की बात कही जा रही थी वहीं अब पीड़ित के परिजनों को धमकियां मिलने लगी।

पूरे साक्ष्यों के साथ एसपी ऑफिस पहुंचे पीड़ित के परिजन


जबलपुर शहर के इंफिनिटी हार्ट इंस्टीट्यूट की कारगुजारी को सबके सामने लाने और अस्पताल संचालक के द्वारा मरीज के परिजनों को उनके घर जाकर धमकाने की शिकायत लेकर पीड़ित के परिजनों ने पुलिस अधीक्षक महोदय से न्याय की गुहार लगाई है। 

उपरोक्त शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एडिशनल एसपी डॉ संजीव उईके ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और मामले की विशेष जांच करने के लिए ओमति थाना प्रभारी को निर्देशित किया।

पहले भी आ चुके है कई कारनामे

यह पहला मामला नही है जिसमे डॉ. अंकित अग्रवाल सुर्खियों में है इससे पहले भी कई बार इनकी कार गुजारी शहर की जनता के सामने आ चुकी है। आपको बता दे कि बीते वर्ष मार्च 2019 में इंफिनिटी हार्ट इंस्टीट्यूट में एंजियोप्लास्टी के बाद मरीज की हालत बिगड़ गई थी। चिकित्सक ने उपचार करने से हाथ खड़े कर दिए जिससे परिजन भड़क उठे और हंगामा कर दिया। काफी देर तक चले हंगामे के बाद परिजन मरीज को लेकर नागपुर चले गए। परिजन के आरोप हैं कि चिकित्सक ने पैसों की खातिर मरीज को हायर सेंटर में जाने से रोका जिससे हालत और बिगड़ गई।


परिजनों ने आरोप लगाया कि जब पिता को अस्पताल में भर्ती कराया गया, तब उनका ब्लड शुगर लेवल 400 था। शुगर को कंट्रोल न कर पैसों की लालच में चिकित्सक ने एन्जियोप्लास्टी कर दी। डॉ. अग्रवाल ने 4 लाख रुपए से ज्यादा का बिल थमाते हुए कहा कि वे अब कुछ नहीं कर सकते मरीज को कहीं और ले जाना होगा।

आयुष्मान योजना आते ही सक्रिय हुए ये धोखेबाज..

गौरतलब है कि पूरे प्रदेश में इन दिनों आयुष्मान कार्ड योजना के नाम पर निजी अस्पतालो के द्वारा ठगने का मामला सामने आ रहा है।जहां सरकारी योजनाओं के चलते एक तरफ तो इलाज का पूरा पैसा अस्पताल प्रबंधन सरकार से ले ही लेता है वहीं मरीज के परिजनों से भी पैसे का भुकतान करवाया जाता है। इस पूरे गोरखधंधे में कई दलाल भी सक्रिय है..जो बाकायदा अपना कमीशन काट कर अस्पतालों तक मरीजों को पहुंचाने का काम कर रहे है। इन्ही सभी शिकायतों को ध्यान रखते हुए जबलपुर कलेक्टर भरत यादव ने भी दोषी अस्पतालों पर कार्यवाही हेतु आयुष्मान योजना कार्यलय को पत्र लिखा था।

आरक्षण का दंश भी है जिम्मेदार

देश का यही दुर्भाग्य है कि डॉक्टरी जैसी लाइन में जहां पढ़ने वाले छात्रों पर आगे चलकर मरीज़ों की जान बचाने की जिम्मेदारी रहेगी, वहां पर भी प्रतिभा के स्थान पर आरक्षण को वरीयता मिलती आ रही है तो देश की स्वास्थ्य सुविधाओं और मरीजों का कैसे भला हो सकता है? कहने को देश हर जिले, तहसील में सरकारी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जहां मुफ्त में सबका इलाज किया जाता है, लेकिन जब वहां इलाज करने वाले डॉक्टरों की काबिलियत ही शक के घेरे में है तो कोई भी सक्षम इंसान क्यों उनसे इलाज करवाकर अपनी जान की बाज़ी लगाएगा?

एक नजर इधर भी

निजी अस्पतालों मे महंगा इलाज कोई शौक से नहीं करवाता, लेकिन अपनों की चिंता और उनके अच्छे इलाज की चाहत परिजन को यहां खींच लाती है। कई बार यह भी देखा गया है कि कुछ डॉक्टर जो सरकारी अस्पताल में नौकरी करते हैं, वे पता नहीं क्यों मरीजों के साथ इतने रूखेपन और लापरवाही से व्यवहार करते
हैं कि मजबूरन बेहतर इलाज के लिए मरीज को उनके निजी क्लिनिक पर 300 रुपए की फीस जमा करवाने के लिए जाना पड़ता है। निजी क्लिनिक पर वे ही डॉक्टर बड़ी शालीनता से मरीज़ों से बात करते हैं।

हो सकता है कि इस आर्टिकल के बाद से कई डॉक्टर मित्र मुझसे खफा हो जाय। उनका गुस्सा जायज़ भी है,  जो आवाज़ बेईमान डॉक्टरों के खिलाफ उठाई जा रही है, उस आवाज़ में अच्छे, ईमानदार  डॉक्टरों को भी शामिल होना चाहिए।ईमानदार डॉक्टरों का फर्ज बनता है कि वे लोगों को जागरूक करें, 

किसी ने सही ही कहा है , कि समाज को दुर्जनों की बुराई से इतनी हानि नहीं पहुंचती है, जितना सज्जनों का मौन पहुंचाता है।

विकास की कलम

चीफ एडिटर
विकास सोनी
(लेखक विचारक पत्रकार)

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