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शुक्रवार, 17 जनवरी 2020

आखिर ताप लओ तेंदुआ..न पकड़ई पाए और ना बचा पाए..कौन लेहे जिम्मेदारी....


टॉप खबर :- जानवर अगर बोल पाता तो चीख चीख कर बताता कि किस तरीके से उसकी जिंदगी लापरवाहों की भेंट चढ़ गई।
 जी हां.. विकास की कलम में आज हम आपको बताएंगे कि किस तरीके से गाहे-बगाहे जब कोई बड़ा काम इन अधिकारियों के हाथ में आता है तो इनकी दक्षता और कार्यप्रणाली सबके सामने खुलकर आ जाती है। मोटी मोटी तनख्वाह लेने वाले यह अधिकारी कला कौशल में कितने दक्ष हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगा लीजिए ...कि ना तो तेंदुआ ही पकड़ पाए और किसी और के जाल में फंसे तेंदुए की जान भी ना बचा पाए । ऐसे में वन विभाग की कार्यप्रणाली रेस्क्यू टीम और तेंदुए के उपचार पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।


पूरा घटनाक्रम

 ग्वारीघाट के छेवला गांव से लगे आर्मी एरिया में शिकारियों द्वारा बिछाए गए तार के फंदे में फंस कर घायल हुआ और 3 दिन से मौत से संघर्ष कर रहा तेंदुआ ने गुरुवार की शाम 5:30 बजे दम तोड़ दिया। 

स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ एंड फॉरेंसिक सेंटर के डॉक्टरों ने तेंदुए की मौत का प्रारंभिक कारण आंतरिक अंग ज्यादा क्षतिग्रस्त होने और इन्फेक्शन फैलना बताया है । हालांकि शुक्रवार को सुबह 10:00 बजे उसका पीएम किया जाएगा जिसके बाद ही मौत का वास्तविक कारण सामने आ सकेगा ।


पहले दिन से ही बरती जा रही थी लापरवाही

वन विभाग  और वाइल्डलाइफ सेंटर के डॉ अपने-अपने तर्क दे रहे हैं लेकिन जानकारों की माने तो इस मामले में शुरू से ही लापरवाही बरती गई थी ।जिसके कारण इस वन्यजीव की मौत हुई है 

गौरतलब हो कि 14 जनवरी को जब तेंदुआ तार के फंदों में फंसा हुआ मिला था तभी से उसके रेस्क्यू में देरी की गई थी इतना ही नहीं वन विभाग के अफसर घटना के बाद तेंदुए के मामूली रूप से घायल होने का दावा कर रहे थे। लेकिन जब उसे बेहोश करके मुक्त कराया गया तो पता चला कि उसकी चोट काफी गहरी और गंभीर थी।


यह है जिम्मेदारों के बयान


रविंद्र मणि त्रिपाठी डीएफओ :-  घायल तेंदुए की मौत गुरुवार की शाम 5:30 बजे अचानक हुई है शुक्रवार को 10:00 पीएम होगा उसके बाद ही मौत के कारणों का वास्तविक कारण पता चलेगा



डॉ मधु स्वामी डायरेक्टर स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ एंड फॉरेंसिक सेंटर :-  तेंदुए की सर्जिकल ड्रेसिंग की गई थी गहरे घाव थे और आंतरिक अंग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए थे जिसके कारण उसका ऑपरेशन नहीं हो सका शाम 5:30 बजे उसकी मौत हो गई प्राथमिक तौर पर गंभीर चोटों और इंफेक्शन फैलने के कारण उसकी मौत हो सकती है पूरी जानकारी पीएम के बाद ही सामने आएगी

बेहोशी की दवा का ओवरडोज हुआ घातक

सूत्रों के अनुसार वन्यजीवों को बेहोश करने की प्रक्रिया टंकुलाइज करते समय उन्हें केमिकल निश्चित मात्रा में दिया जाता है लेकिन इस घटना में तेंदुए को बेहोश करने के लिए चार बार प्रयास किया गया था जिसके कारण उसके शरीर में दवा का ओवरडोज पहुंच गया था। जानकारों के अनुसार सामान्य तरीके से दी जाने वाली बेहोशी की दवा का असर 48 से 72 घंटे तक रहता है। इसके बावजूद गुरुवार को सर्जरी के लिए तेंदुए को टंकुलाइज बेहोश किया गया। इसके बाद ही उसकी हालत तेजी से बिगड़ी और मौत हो गई हालांकि वन्य प्राणी विशेषज्ञ अभी पीएम रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं।

आखिर कौन था शिकारी और किसने बिछाये थे फंदे नहीं हुई जांच

मृत तेंदुआ शिकारियों के फैलाए गए तार के फंडों में फंसकर घायल हुआ था लेकिन 3 दिन बीत जाने के बाद भी वन विभाग है पता नहीं लगा सका कि कौन से कार्य थे जिन्होंने आर्मी एरिया में लगी फेंसिंग के पास फंदे लगाए थे।


विकास की कलम:- पत्रकार विकास सोनी

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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार