का.. कह रए साब... शौचालय भी खा गए का..?? (कब पूरी होगी ?? निगम टॉयलेट खरीदी घोटाला की जांच ) - Vikas ki kalam,जबलपुर न्यूज़,Taza Khabaryen,Breaking,news,hindi news,daily news,Latest Jabalpur News

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का.. कह रए साब... शौचालय भी खा गए का..?? (कब पूरी होगी ?? निगम टॉयलेट खरीदी घोटाला की जांच )

का.. कह रए साब... शौचालय भी खा गए  का..?? (कब पूरी होगी ?? निगम टॉयलेट खरीदी घोटाला की जांच )


देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी ने दिल्ली से बैठकर स्वच्छ भारत मिशन का एक अनूठा सपना देखा। जिसके तहत खुले में शौच से मुक्ति के लिए भारत सरकार ने शौचालय बनाने का निर्णय लिया और सरकारी खजाने के मुंह खोल दिए ऐसे में देशभर के अंदर शौचालय निर्माण का कार्य तेजी से शुरू हुआ।

और यहीं से शुरू होता है आपसी बंदरबांट का नया खेल । यह बात कोई पुरानी नहीं है क्योंकि जब जब किसी योजना के तहत सरकारी खजाने का मुंह खोला जाता है तब तब जिम्मेदार इस खजाने को देखकर अपनी लार टपकाने लगते हैं। नतीजतन नए-नए आइडियो के तहत कैसे आम जनता को चूना लगा कर अपना घर भर सके इसकी रणनीति तैयार होने लगती है , खुद की जरूरतों को पूरा करने की यही लालसा भ्रष्टाचार के अध्याय में एक अंक और जोड़ देती है। ऐसा ही कुछ नजारा देखने को मिला जबलपुर के नगर निगम कार्यालय में जहां शौचालय बनवाने की आड़ में करोड़ों रुपए डकार लिए गए।

स्वच्छता सर्वेक्षण के नाम पर जबलपुर स्मार्ट सिटी और नगर निगम के लगभग सभी प्रोजेक्ट सवालों के घेरे में हैं लेकिन इस बार नंबर वन का सपना दिखाते हुए, पब्लिक टॉयलेट बनाने के नाम पर ही बड़ा घोटाला कर दिया गया। इधर जबलपुर की जनता खुद को नंबर वन के पायदान में पहुंचाने का सपना देख रही थी और उधर जिम्मेदार नोटों की गड्डियां  अंदर करते जा रहे थे। माहौल कुछ ऐसा बनाया गया कि किसी को कानों कान खबर ना लगी। लेकिन निर्माण कार्य इतना घटिया था कि वह खुद-ब-खुद चीख चीख कर भ्रष्टाचार की कहानी बयां करने लगा।

कब तक चलेगी जांच- नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच....

जांच के नाम पर अक्सर अधिकारी लंबा समय खपा देते हैं और तब तक दोषियों को खुद के बचाव के लिए काफी समय मिल जाता है लेकिन कभी-कभी जांच ही ठंडे बस्ते में चली जाती है मामले की गंभीरता को देखते हुए जबलपुर के नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने शीघ्र जांच कर दोषियों पर कार्यवाही करने की मांग की है।
 नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच से मनीष शर्मा ने बताया कि घोटाला सबके सामने उजागर हो चुका है लेकिन अभी तक जांच के नाम पर महेश खानापूर्ति ही हुई है अगर जल्द ही जांच पूरी ना की गई, तो फिर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच माननीय न्यायालय की शरण में जाएगा।

क्या है पूरा मामला और क्या है आरोप..

मामला 2018 और 19 का है जहां जबलपुर स्मार्ट सिटी और नगर निगम की ओर से स्वच्छता अभियान के नाम पर बड़े पैमाने में टॉयलेट बनवाए गए। जिसमें हुए भ्रष्टाचार की जांच शुरू कर दी गई है निगम पर आरोप है 



कांग्रेस विधायक की जागरूकता से हुआ बड़ा खुलासा..

 कांग्रेस विधायक विनय सक्सेना की मांग पर नगरीय प्रशासन विभाग मामले की जांच करवा रहा है… विधायक विनय सक्सेना ने बीते दिनों विधानसभा में टॉयलेट घोटाले का मुद्दा उठाया था जिस पर नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह ने लिखित जवाब देते हुए मामले में जांच और कार्यवाई की बात की है…


 जबलपुर उत्तर से कांग्रेस विधायक विनय सक्सेना ने दावा किया है कि जांच पूरी होने के बाद इस घोटाले का दायरा बेहद बड़ा सामने आएगा…. वहीं जबलपुर के प्रभारी मंत्री प्रियव्रत सिंह ने भी नगरीय प्रशासन मंत्रालय द्वारा मामले की जांच करवाए जाने की बात की है….

कहां कहां खपाये गए सेकंड हैंड टॉयलेट..

 जबलपुर में स्वच्छता अभियान के तहत शहरी आवासों में 41 हज़ार जबकि 204 पब्लिक टॉयलेट्स और बायो टॉयलेट्स सहित 300 से ज्यादा यूरेनल्स स्थापित करवाए गए थे लेकिन आरोप है कि बाज़ार में इनके दाम 10 हज़ार से 40 हज़ार रुपए थे लेकिन स्मार्ट सिटी और नगर निगम की ओर से इनके लिए प्रतिनग 2 लाख 85 हज़ार रुपयों तक का भुगतान किया गया… ख़ासकर ऐसे पब्लिक टॉयलेट्स अब कहीं खराब होने या पानी और पाईप लाईन ना होने से इस्तेमाल करने लायक भी नहीं बचे….
आरोप लगा है कि जो घटिया किस्म के यूज्ड यानी सेकेंड हेंड टॉयलेट बाजार में 10 हजार के मिल जाते हैं, उसे 3 लाख रुपए तक ख़रीदा गया है।

नगरीय प्रशासन विभाग कर रहा है पूरी जांच...

उपरोक्त मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश सरकार द्वारा जबलपुर नगर निकाय को मामले की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। बता दें कि इस मामले को जबलपुर उत्तर विधानसभा के कांग्रेस विधायक विनय सक्सेना ने ध्यानाकर्षण में मामला उठाया था। उन्होंने स्पष्ट किया था  की स्वच्छता अभियान के दौरान जबलपुर में शौचालयों में बड़ी गड़बड़ी की गयी है। तो वहीं इस बात को नगरीय विकास मंत्री जयवर्धन सिंह ने भी माना है।

पूर्व कमिश्नर रहे वेदप्रकाश शर्मा के कार्यकाल की जांच हो..

विधायक विनय सक्सेना ने जबलपुर के पूर्व नगर निगम कमिश्नर वेदप्रकाश शर्मा के कार्यकाल की जांच करने की मांग की है बता दें कि मध्य प्रदेश में कमलनाथ की सरकार बनने के बाद इन्हें छिंदवाड़ा कलेक्टर पद से से हटा दिया गया था, लेकिन इनपर जांच करने का आश्वासन मंत्री ने नहीं दिया है।
जबलपुर नगर निगम में टॉयलेट खरीदी में भारी फर्जीवाड़ा सामने आया है। 

कौन सा टॉयलेट कितने में खरीदा


प्री-कॉस्ट बायोटॉयलेट : 1 लाख 4 हजार रुपए प्रति नग

प्री-फेब बायोटॉयलेट : 2 लाख 98 हजार रुपए प्रति नग

प्री-फेब टॉयलेट : 2 लाख 85 हजार रुपए प्रति नग

प्री-फेब टॉयलेट : 2 लाख 94 हजार रुपए प्रति नग

जनता का संदेश

कहानी पुरानी है पर इतनी भी नहीं कि उसे सरकारी किताबों में दबा दिया जाए विकास की कलम जब आम जनता के बीच पहुंची तो जानकर हैरानी हुई की जनता शुरू से ही इस पूरे प्रकरण को जानती थी लेकिन खामोश बैठ कर अपनी बारी का इंतजार कर रही थी। उसे पता था की बड़े-बड़े विज्ञापनों की आड़ में किस तरह से घटिया माल टीकाया जा रहा है । उसे यह भी पता था कि बड़े-बड़े मुशायरों और सेलिब्रिटयों को लाकर जबलपुर को नंबर वन बनाने का जो खेल चल रहा है। उसका एक एक रूपया आम जनता की गाढ़ी कमाई से खर्च किया जा रहा है।
इन बड़े आयोजनों की चकाचौंध से जनता का कोई सरोकार नहीं है, वह तो सिर्फ यह चाहती है की दो वक्त की रोटी और निस्तार की जगह मिल जाए ,अगर उस पर भी भ्रष्टाचारियों की नजर है तो फिर वह जवाब देना बखूबी जानती । अब जनता अपना जवाब किस तरह से देगी यह तो समय ही बताएगा।

विकास की कलम

चीफ एडिटर
विकास सोनी
(लेखक, विचारक, पत्रकार)

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