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बुधवार, 22 जनवरी 2020

जबलपुर की आए सारंग..कोई पूछे तो बता दईयो.. खमरिया में भओ है सारंग को सफल परीक्षण...

जबलपुर की आए सारंग..कोई पूछे तो बता दईयो.. खमरिया में भओ है सारंग को सफल परीक्षण...

संस्कारधानी जबलपुर का नाम मंगलवार को एक बार फिर से इतिहास के पन्नों में जुड़ गया मौका था देश की सबसे बड़ी गन सारंग के अपग्रेडेड वर्जन का परीक्षण। और इसके परीक्षण के साथ ही जबलपुर वह पहला शहर बन गया जहां सारंग गन बनाई और मॉडिफाई की जा सकेगी जबलपुर के खमरिया स्थित एलपीआर लॉन्ग प्रूफ रेंज मैं इसकी टेस्टिंग की गई आपको बता दें कि एस हाई कैलीबर गन की मारक क्षमता 39 किलोमीटर है। जैसे ही गन की पहली फायरिंग हुई वहां मौजूद हर एक व्यक्ति का सर गर्व से ऊंचा हो गया और इसी के साथ देशभर के गौरव में जबलपुर का नाम भी शुमार हो गया


14 महीने की मेहनत रंग लाई अब बचेंगे 100 करोड़..

जबलपुर के जानकारों ने अधिकारियों के साथ मिलकर 14 महीने की कड़ी मेहनत के बाद एस हाई कैलिबर गन की टेस्टिंग की। सारंग गन को साढे 14 किलोमीटर लंबी एलपीआर लोंग प्रूफ रेंज में टेस्टिंग के लिए लाया गया जो कि मापदंडों पर खरी उतरी है इसके बाद इसे सेना को सौंप दिया जाएगा। जबलपुर में गन का परीक्षण होने से अब बाहर होने वाले 100 करोड़ से ज्यादा के खर्च पर लगाम लगेगी ।इससे पहले धनुष सहित सारंग गन की टेस्टिंग के लिए इटारसी या बालासोर जाना पड़ता था। जो कि काफी महंगा साबित होता था।

अंधेरी काली रात में भी देगी दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब..

जबलपुर में सारंग को कुछ इस तरीके से डिवेलप किया गया है कि वह दिन के उजाले के साथ साथ घने काले अंधेरे में भी दुश्मन के छक्के छुड़ा पाएगी। आपको बता दें कि इससे पहले सारंग गन का बैरल 130mm का होता था


 जिसे जबलपुर में अपग्रेड कर 155mm का किया गया है वही इसकी मारक क्षमता को भी 27 किलोमीटर से बढ़ाकर 39 किलोमीटर कर दिया गया है जोकि बेहद कम समय में ज्यादा लंबी दूरी तक मार कर सकती है और इसे विषम परिस्थितियों में भी इस्तेमाल कर दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया जा सकता है।

परीक्षण के वे खुशनुमा पल

 मध्य प्रदेश के जबलपुर में मंगलवार को पहली बार तोप का परीक्षण हुआ। खमरिया की फायरिंग रेंज में सारंग गन का परीक्षण किया गया। जैसे ही सारंग पहली बार गरजी तो इसके धमाके की आवाज से 500 मीटर का दायरा  कप कपा गया। सबसे विशेष बात यह रही कि एक के बाद एक परीक्षण में बारूद से भरा गोला एकदम सटीक जगह पर जाकर गिरा। 


सारंग गन की क्षमता 30 किमी से ज्यादा है, परीक्षण में 4 फायर किए गए, जिसमें 15 डिग्री, फिर 0 डिग्री, फिर 15 डिग्री पर फायर हुए। आपको बता दें कि  सारंग गन  हर तरीके से परीक्षण में सफल उतरी है  लिहाजा अब इस गन को सेना को सौंप दिया जाएगा। सेना के अधिकारियों ने बताया कि लांग प्रूफ रेंज (एलपीआर) खमरिया में अपग्रेड सारंग तोप का पहला परीक्षण किया गया है। एलपीआर कमांडेंट निश्चय राऊत के नेतृत्व में वीएफजे और जीसीएफ मे बनी सारंग तोप का परीक्षण किया। तोप की मारक क्षमता 27 किलोमीटर से बढ़कर 39 किलोमीटर की गई है।

अभी बनी है तीन.. जल्द ही शुरू होगा बड़े स्तर पर काम...

देश के रक्षा मंत्रालय की ओर से जबलपुर वीएफजे को सारंग तोपों को अपग्रेड करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद जबलपुर वीएफजे के गन शॉप के कर्मचारियों ने 3 सारंग तोपों को 15 दिन के अंदर ही अपग्रेड कर दिया था। आयुध निर्माण कानपुर से इसके लिए नए 155 एमएम बैरल मंगवाए गए और 130 एमएम बैरल को हटाया गया। सारंग तोप के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि अब इसे केवल दो लोग ही चला सकते हैं। इसकी मारक क्षमता भी और सटीक हो गई है। अब युद्ध में बिना सामने आए दुश्मन को निशाना बनाना आसान होगा।

विकास की कलम

चीफ एडिटर
विकास सोनी
(लेखक,विचारक,पत्रकार)







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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार