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शनिवार, 18 जनवरी 2020

ताप लओ तेंदुआ-पार्ट 2... पीएम रिपोर्ट भी आ गई..अब तो मान लो हमई हैं जिम्मेदार...



जबलपुर में तीन दिन पहले ग्वारीघाट के छेवला गाँव के पास शिकारियों के फंदे में फस कर घायल हुए तेंदुए की आखिरकार बीती शाम को मौत हो गई थी।
विकास की कलम के पिछ्ले भाग में आप ने जाना कि कैसे घोर लापरवाही के चलते घंटो तेंदुए को तमाशा बना कर रखा गया। जिस समय उसे त्वरित उपचार देना चाहिए था उस समय विभाग के लोग आपसी मंत्रणा में लगे रहे कि अब आगे क्या करना है। इस दौरान कुछ लोग तो सेल्फी फोटो लेने से  भी बाज नही आये..
खुद ही सर्वे सर्वा बन कर अपनी पीठ थपथपा रहे थे। वाइल्ड लाइफ को भी तत्काल नही बुलाया गया था। और फिर लापरवाही पूर्वक पोटली बनाकर तेंदुए को उठाया गया। और फिर सर्जरी के लिए  भी लंबा इंतजार हुआ। सवाल यह है कि जब सर्जरी से पहले तेंदुआ खुद से खड़ा हो पा रहा था तो सर्जरी के बाद इस क्या हुआ कि वह उठ भी न सका और दुनिया से उठ गया।
बहरहाल विकास की कलम के सवालों से बचते बचाते सभी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक बात को टाल दिया..



हो गया है, पोस्टमार्टम-अब क्या..?

मृत हुए तेंदुए का शुक्रवार को पोस्टमार्टम हुआ। वेटनरी कॉलेज स्थित स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ सेंटर में डीएफओ रविंद्र मणि त्रिपाठी, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रतिनिधि सोमेन डे एवं कान्हा टाइगर रिजर्व से आए वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ संदीप अग्रवाल की उपस्थिति में विकृति विभाग के विशेषज्ञ और विभाग के फैकेल्टी द्वारा पीएम किया गया।



क्या कहती है पीएम रिपोर्ट..??

शव परीक्षण में पाया गया कि पतले तार के फंदे के कारण तेंदुए की रीढ़ की हड्डी पसली के आसपास के उसको में गंभीर चोटें आई थी जिससे अत्यधिक रक्तस्त्राव हुआ तेंदुए के पैर खासकर पिछले पैरों के नाखून क्षति ग्रस्त पाए गए अंदरूनी जांच में फेफड़ों वा छाती में खून के थक्के भी मिले हैं जिससे अंदरूनी अंग में चोट होना प्रतीत होता है इसके अलावा तेंदुए के पेट में तार का टुकड़ा भी मिला शव परीक्षण के बाद पाया गया कि तेंदुए की मृत्यु अंदरूनी रक्तस्त्राव हाइपोवॉलूमिक शॉक के कारण उत्पन्न रेस्पिरेट्री फैलियर से हुई है।


वन विभाग के अधिकारियों ने किया तेंदुए का दाह संस्कार

पोस्टमार्टम के बाद तेंदुए का शव वन विभाग को सौंप दिया गया । जहां वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में डुमना नेचर पार्क  के  प्राकृतिक  सौंदर्य  में तेंदुए का सुरक्षित एरिया में दाह संस्कार किया गया साथ ही तेंदुए की हड्डियों को वन विभाग को सौंप दिया गया जिससे वे जप्त कर कर रखेंगे।

मौत के बाद जागा वन विभाग- शिकारियों के खिलाफ दर्ज की प्राथमिक रिपोर्ट

तेंदुए की मौत के बाद आखिरकार वन विभाग जाग उठा है वन विभाग ने तार के फंदे बिछाने वाले शिकारियों के खिलाफ अब जाकर प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज करके जांच शुरू की लेकिन वन्य प्राणी विशेषज्ञों के साथ ही आम लोगों ने भी तेंदुए की मौत पर खासा दुख जताया है गुप्त सूत्रों के अनुसार कुछ वन्य प्राणी विशेषज्ञ इस मामले को लेकर अब कोर्ट तक जाएंगे जिसके लिए घटनाक्रम से जुड़े हुए सभी तथ्यों को एक-एक कर जुटाया जा रहा है

विकास की कलम जिम्मेदारों से पूछती है सवाल

तेंदुए की मौत ने कई तरह के सवाल लोगो के जहन में छोड़ दिए है।तेंदुए की मौत का आखिर कौन है जिम्मेदार।तेंदुए की मौत को लेकर अब जहा वन विभाग के अधिकारी बात करने को तैयार नही है तो वही स्कूल वाइल्ड लाइफ ऑफ साइंस इंस्टिट्यूट के अधिकारी तेंदुए की मौत की वजह गहरा घाव होना बता रहे है।

पूरा गांव जानता है शिकारी लगाते हैं फंदे सिर्फ वन विभाग को नहीं है पता

छेवला गांव के पास अति संवेदनशील क्षेत्र कहलाने वाले आर्मी एरिया की फेंसिंग के पास शिकार के लिए तार के फंदे किसने लगाए थे यह सवाल वन विभाग के लिए अब गहरी मुसीबत खड़ी कर सकता है ग्रामीणों का कहना है कि जंगली सूअरों का शिकार करने वाले सालों से इस क्षेत्र में सक्रिय हैं जिसकी शिकायतें अक्सर वन विभागों में दी जाती रही है लेकिन वन विभाग के अधिकारियों ने इस पर कोई कार्यवाही नहीं की वन विभाग की इसी अनदेखी के कारण तेंदुआ जैसा बहुमूल्य वन्यजीव जबलपुर ने खो दिया।

पीएम रिपोर्ट में पेट में मिला तार का टुकड़ा लेकिन एक्स-रे में नहीं दिखा.. ऐसा क्यों??

तेंदुए के घायल होने के बाद तेंदुए की सोनोग्राफी और एक्स-रे भी किया गया था तब उसके पेट या शरीर में तार का टुकड़ा नहीं दिखा लेकिन पीएम के दौरान पेट से तार का टुकड़ा निकलना इलाज में बरती गई लापरवाही को उजागर करता है हालिक हालांकि अधिकृत तौर पर अनुमान लगाया जा रहा है कि फंदे में फसने के बाद तेंदुए ने निकलने के लिए तार को काटने का प्रयास किया होगा इसी दौरान तार का टुकड़ा कट कर उसके पेट में पहुंच गया होगा लेकिन सोनोग्राफी या एक्स-रे रिपोर्ट में वह तार का टुकड़ा क्यों नहीं दिखा।

कलेक्टर ने संभाली कमान कहां स्टेप बाय स्टेप करूंगा मामले की पूरी जांच।

कलेक्टर भरत यादव ने भी विलुप्त हो रहे तेंदुए की मौत पर दुख जताया है साथ ही उन्होंने कहा है कि तेंदुए की मौत कैसे हुई है इसकी फाइल को वो स्वयं देखेंगे साथ ही अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उस पर सख्त कार्यवाही भी की जाएगी।

भरत यादव कलेक्टर जबलपुर जिला



विकास की कलम का जिम्मेदारों से सवाल

घायल तेंदुए को मौके से उठाने में आखिर क्यों लापरवाही हुई...??

जब तेंदुए का रेस्क्यू कर उठा कर लाया जा रहा था तब पोटली बनाकर उसे उठाने से जख्म और रीढ़ पर विपरीत असर हुआ।

क्यो तेंदुए की दो दिन बाद सर्जरी की गई..?

वाइल्ड लाइफ ऑफ एक्सपर्ट को तुरंत क्यों नहीं बुलाया गया?

सर्जरी के एक दिन पहले खड़ा हुआ तेंदुए आखिर सर्जरी के बाद आॅपरेशन टेबल पर ही क्यो दम तोड़ दिया?

जब तेंदुए का रेस्क्यू किया जा रहा था उस समय टीम में ट्रैक्यूलाजर ड्रिप किसने तय की थी?

बहरहाल विलुप्त हो रहे तेंदुए की मौत ने एक बार फिर वन विभाग और वाइल्ड लाइफ ऑफ इंस्टिट्यूट की कार्यवाही पर सवाल खड़े कर दिए है।अब देखना होगा कि लापरवाहो पर क्या?? कार्यवाही होती है।

आखिरकार उस बेजुबान जानवर की मौत के हम सब हैं जिम्मेदार ...कुछ की खामोशी ....कुछ की कामचोरी कुछ की अनदेखी...... और कुछ की लालच....... कुल मिलाकर हम सब ने उतारा है तेंदुए को मौत के घाट अब वक्त है पश्चाताप का.......

 विकास की कलम

 चीफ एडिटर
 विकास सोनी ( लेखक, विचारक, पत्रकार)

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चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार