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मंगलवार, 7 जनवरी 2020

जेएनयू हिंसा / दूसरी एफआईआर में आरोप- आइशी समेत 20 लोगों ने स्टाफ और महिला गार्ड से मारपीट की, धमकाया

     जेएनयू में 5 जनवरी को हुई हिंसा के मामले में पहली एफआईआर में अज्ञात लोगों पर मारपीट और तोड़फोड़ का केस
  • दूसरी एफआईआर में कहा गया- 4 जनवरी को शाम 6:00 बजे छात्रसंघ अध्यक्ष व अन्य ने मारपीट की और धमकाया
  • आइशी व अन्य पर आरोप- प्रशासनिक भवन के 100 मीटर के दायरे में धरना देकर हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया

नई दिल्ली. जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में रविवार को हुई हिंसा के मामले में दूसरी एफआईआर छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष समेत 20 छात्रों पर दर्ज की गई थी। इन पर प्रशासनिक भवन के स्टाफ और महिला गार्ड से मारपीट, गालीगलौज के अलावा तोड़फोड़ का केस दर्ज किया गया। एफआईआर जेएनयू सिक्युरिटी डिपार्टमेंट ने दर्ज करवाई। इसमें वारदात का दिन 4 जनवरी और समय शाम 6:00 बजे का बताया गया है। हालांकि, पुलिस ने इस संबंध में एफआईआर 5 जनवरी को दर्ज की। जेएनयू में हिंसा के मामले में एक और एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें कैम्पस में हिंसा और तोड़फोड़ के लिए अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया गया। 
एफआईआर में क्या आरोप लगाए गए?
 
स्टाफ के साथ मारपीट: जेएनयू सिक्युरिटी डिपार्टमेंट ने पुलिस को दी शिकायत में कहा- कम्युनिकेशन एंड सर्विस ऑफिस (सीआईएस) 3 जनवरी को पूरी तरह बंद रहा। इसके चलते पूरी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया बंद थी। इसके चलते सीआईएस ऑफिस के स्टाफ ने जेएनयू के गार्ड्स के साथ मिलकर 4 जनवरी को सुबह 6:00 बजे दफ्तर खोलने की कोशिश की। इस दौरान छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष समेत अन्य लोगों ने स्टाफ के साथ मारपीट की। महिला गार्ड से भी मारपीट की और उन्हें धमकाया। 
प्रदर्शनकारियों ने गार्ड को पीटा, कुछ घायल हुए: एफआईआर में आइशी घोष, साकेत मून, सतीश यादव, सारिका चौधरी, जी सुरेश, कृष जायसवाल, विवेक कुमार, गौतम शर्मा, भास्कर वी मेक, अपेक्षा प्रियदर्शी, श्रेया घोष, श्वेता कश्यप, संभावित सिद्धि, विवेक कुमार पांडेय, राजू कुमार, मानस कुमार, चुनचुन यादव, कामरान, डोलन, गीता कुमारी के नाम हैं। इन पर आरोप है कि इन लोगों ने स्टाफ को दफ्तर का दरवाजा खोलने से रोका, उनसे कहा कि अगर यह गेट खुला तो अंजाम बुरा होगा। कुछ सुरक्षा गार्डों को प्रदर्शनकारियों ने पीटा और उनमें से कुछ घायल भी हैं। 
दफ्तर में घुसे, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया: एफआईआर के मुताबिक, सीआईएस स्टाफ किसी तरह दफ्तर में दाखिल होने में कामयाब हुआ और उसने इन्फर्मेशन सिस्टम खोला। लेकिन, कुछ ही देर में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी दफ्तर में घुस आए। स्टाफ से गालीगलौज की और उन्हें दफ्तर से बाहर निकाल दिया। इन लोगों ने सरकारी अधिकारियों को अपना काम करने से रोका। विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिसवाले मौके पर आए और हालात का जायजा लेकर चले गए। इसके कुछ देर बाद प्रदर्शनकारियों का एक और दल दफ्तर में घुसा और तोड़फोड़ की। वे बिना इजाजत सरकारी दफ्तर में संपत्ति का नुकसान करने के इरादे से घुसे और सर्वर, केबल, बायोमीट्रिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाया। 
100 मीटर के दायरे में विरोध और प्रदर्शन किया: एफआईआर में कहा गया कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि प्रशासनिक भवन के 100 मीटर के दायरे में धरना, प्रदर्शन, विरोध और जमावड़ा नहीं होना चाहिए। सीआईएस दफ्तर प्रशासनिक भवन के 100 मीटर के दायरे में है। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के दौरान पुलिस बल की तैनाती भी की जाए, ताकि सेमेस्टर के लिए हजारों छात्रों के रजिस्ट्रेशन के काम में बाधा न पड़े। 
हिंदू रक्षा दल ने जिम्मेदारी ली, 3 दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं
जेएनयू कैम्पस में 5 जनवरी को छात्रसंघ के सदस्य फीस बढ़ोतरी को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। शाम के वक्त कुछ नकाबपोश कैम्पस में दाखिल हुए। ये लोग हाथ में डंडा और लोहे की रॉड लिए हुए थे। इन लोगों ने प्रदर्शनकारियों से मारपीट की। यहां पूर्व प्रोफेसर योगेंद्र यादव समेत कुछ मौजूदा शिक्षकों से भी हाथापाई की गई। इस दौरान छात्र संघ अध्यक्ष आइशी समेत 20 लोग घायल हुए थे।  हिंसा के तीन दिन बीत जाने के बाद भी दिल्ली पुलिस ने अब तक किसी को गिरफ्तार नहीं कर पाई। उधर, हिंदू रक्षा दल के नेता पिंकी चौधरी ने हमले की जिम्मेदारी ली है। मामले जांच के लिए क्राइम ब्रांच की टीम जेएनयू पहुंची है।

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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार